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36 वां आसियान शिखर सम्मेलन

चर्चा में क्यों?

  • दक्षिणपूर्व एशियाई देशों (ASEAN ) का 36 वां वार्षिक सम्मेलन कोरोना संकट के कारण 26 जून 2020 को वर्चुअल रुप में आयोजित किया गया।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • शिखर सम्मेलन में महामारी के दौरान तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए आसियान कोविड -19 प्रतिक्रिया कोष स्थापित करने का निर्णय लिया गया है।
  • आसियान ने दक्षिण चीन सागर पर एकजुटता प्रदर्शित की जो कि लंबे समय से जारी प्रतिद्वंदिता और विवादों से घिरा हुआ है।
  • दक्षिण चीन सागर में जहां इसके चार सदस्य वियतनाम, फिलीपीन, मलेशिया और ब्रुनेई दुनिया के सबसे व्यस्त जलमार्गों में से एक पर चीन के दावे के विरोध में हैं।
  • वियतनाम और फिलीपींस ने कहा कि कोविड-19 के संकट के दौरान कोई भी देश दक्षिण चीन सागर में खतरा पैदा करने वाली गतिविधियों को बढ़ावा न दे।

आसियान

  • आसियान () का पूरा नाम Association of Southeast Asian Nations है।
  • यह दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का संगठन, एक क्षेत्रीय संगठन है जो सदस्य देशों के बीच सामाजिक स्थिरता को बढ़ावा देने के लिये स्थापित किया गया था।
  • आसियान का आदर्श वाक्य ‘वन विजन, वन आइडेंटिटी, वन कम्युनिटी’ है।
  • 8 अगस्त आसियान दिवस के रूप में मनाया जाता है।
  • आसियान का सचिवालय इंडोनेशिया के राजधानी जकार्ता में है।

सदस्य राष्ट्र

  • इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, ब्रुनेई, वियतनाम, लाओस, म्यांमार, कंबोडिया

आसियान की उत्पत्ति

  • 1967 – आसियान घोषणापत्र (बैंकॉक घोषणा) पर संस्थापक राष्ट्रों द्वारा हस्ताक्षर करने के साथ आसियान की स्थापना हुई।
  • आसियान के संस्थापक राष्ट्र हैं: इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर और थाईलैंड।

दक्षिण चीन सागर विवाद

  • दक्षिण चीन सागर प्रशांत महासागर के पश्चिमी किनारे से लगता हुआ एशिया के दक्षिण-पूर्व में स्थित है।
  • यह चीन के दक्षिण में स्थित एक सीमांत सागर है जो सिंगापुर से लेकर ताइवान की खाड़ी तक लगभग 5 मिलियन वर्ग किमी क्षेत्र में विस्तृत है। देखें: मानचित्र
  • इस विवाद का मुख्य कारण समुद्र पर विभिन्न क्षेत्रों का दावा और समुद्र का क्षेत्रीय सीमांकन है।
  • चीन दक्षिण-चीन सागर के 80% हिस्से को अपना मानता है। यह एक ऐसा समुद्री क्षेत्र है जहाँ प्राकृतिक तेल और गैस प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है।
  • दक्षिण चीन सागर सबसे महत्त्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों में से एक है। यदि इस क्षेत्र में तनाव इसी प्रकार जारी रहा तो शिपिंग और आर्थिक गतिविधियाँ बाधित हो जाएंगी।

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