मणिपुर के काले चावल और गोरखपुर के टैराकोटा कला को GI टैग

मणिपुर के काले चावल (चाक-हाओ) तथा गोरखपुर टेराकोटा को ‘भौगोलिक संकेतक’ (Geographical Indication- GI) का टैग दिया गया।
चाक-हाओ को GI टैग प्रदान करने के लिये ‘चाक-हाओ उत्पादक संघ’ द्वारा आवेदन दायर किया गया था। GI रजिस्ट्री के डिप्टी रजिस्ट्रार ने इन दोनों उत्पादों GI टैग देने की पुष्टि की है।
चाक-हाओ
चाक-हाओ एक सुगंधित चिपचिपा चावल है जिसकी खेती मणिपुर में पारम्परिक रुप से की जा रही है की जा रही है। चावल की इस किस्म में विशेष प्रकार की सुगंध होती है। व्यंजनों के अलावा इसका उपयोग मणिपुर की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में भी उपयोग किया जाता है।

मणिपुर के अन्य GI टैग प्राप्त उत्पाद

शफी लांफी -टेक्सटाइल

वांग्खी फेई -टेक्सटाइल

मोइरांग फेई -टेक्सटाइल

कछई नींबू -कृषि

गोरखपुर टेराकोटा
गोरखपुर का टेराकोटा (Gorakhpur Terracotta) सदियों पुरानी कला है जिसमें स्थानीय कारीगरों द्वारा विभिन्न जानवरों जैसे कि घोड़े, हाथी, ऊँट, बकरी, बैल आदि की मिट्टी की आकृतियाँ बनाई जाती हैं।
पूरा काम हाथों से किया जाता है तथा रंगने के लिये प्राकृतिक रंग का उपयोग करते हैं, जिसकी चमक लंबे समय तक रहती है।

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