गुजरात में अनुसूचित जनजातियों की समीक्षा

चर्चा में क्यों?

  • गुजरात के सासण गीर जंगल में बसे तथा अनुसूचित जनजाति ( Schedule Tribe (ST) वर्ग का लाभ उठा रही रबारी, भरवाड, चारण जाति के असली आदिवासी होने की अब समीक्षा की जाएगी।
  • राज्‍यमंत्रिमंडल की बैठक में हाल ही में इन जातियों की समीक्षा के लिए न्‍यायिक आयोग का गठन की घोषणा की गई।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • केंद्र सरकार ने 29 अक्टूबर, 1956 की एक अधिसूचना के माध्यम से, राज्य केरबारी, भरवाड, चारण जाति समुदायों के लोगों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया, जो राज्य में गिर, बर्दा और एलेच में रहते थे।
  • हालांकि, कई आदिवासी समुदाय के नेता काफी समय से यह आरोप लगाते हुए विरोध कर रहे हैं कि कई लोग, जो इन स्थानों में नहीं रहते हैं, ST प्रमाण पत्र प्राप्त करने में कामयाब रहे हैं और मुख्य रूप से सरकारी नौकरियों में अनुचित आरक्षण लाभ उठा रहे हैं।
  • इस मुद्दे को हल करने और तीन समुदायों के सदस्यों के बीच ST स्थिति के वैध लाभार्थियों का निर्णय करने के लिए, आयोग का गठन किया गया है।

कौन सी जातियां होती हैं अनुसूचित जनजाति?

  • भारत का संविधान अनुसूचित जनजातियों को परिभाषित नहीं करता है, इसलिए अनुच्छेद 366(25) अनुसूचित जनजातियों का संदर्भ उन समुदायों के रूप में करता है जिन्हें संविधान के अनुच्छेद 342 के अनुसार अनुसूचित किया गया है।
  • संविधान के अनुच्छेद 342 के अनुसार, अनुसूचित जनजातियाँ वे आदिवासी या आदिवासी समुदाय या इन आदिवासियों और आदिवासी समुदायों का भाग या उनके समूह हैं जिन्हें राष्ट्रपति द्वारा एक सार्वजनिक अधिसूचना द्वारा इस प्रकार घोषित किया गया है।
  • राष्ट्रपति, किसी भी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश के विषय में, और जहाँ वह राज्य है, राज्यपाल से सलाह के बाद सार्वजनिक अधिसूचना द्वारा, आदिवासी जाति या आदिवासी समुदायों या आदिवासी जातियों या आदिवासी समुदायों के भागों या समूहों को निर्दिष्ट कर सकते हैं, जो इस संविधान के उद्देश्यों के लिए, उस राज्य या केंद्रशासित प्रदेश, जैसा भी मामला हो, के संबंध में अनुसूचित जनजातियाँ माने जाएंगे।

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