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डॉ. रतन लाल को मिलेगा 'विश्व खाद्य पुरस्कार' 2020

भारतीय मूल के अमेरिकी मृदा वैज्ञानिक डॉ. रतन लाल को कृषि जगत का नोबेल पुरस्कार कहे जाने वाले प्रतिष्ठित ‘विश्व खाद्य पुरस्कार’ 2020 (World Food Prize: 2020) के लिये चुना गया है।
डॉ. रतन लाल को प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करने और जलवायु परिवर्तन को कम करने वाले खाद्य पदार्थों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
उल्लेखनीय है कि डॉ. रतन लाल द्वारा विकसित उपायों के माध्यम से न केवल प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण संभव हो पाया है, बल्कि इनसे जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को भी कम किया जा सका है।
उल्लेखनीय है कि 1987 में पहली बार यह पुरस्कार भारतीय कृषि वैज्ञानिक डॉ. एमएस स्वामीनाथन को मिला था। डॉ. स्वामीनाथ को भारत में हरित क्रांति का जनक माना जाता है।
डॉ. रतन लाल अमेरिका की ओहियो यूनिवर्सिटी में ‘कार्बन मैनेजमेंट एंड सेक्वेस्ट्रेसन सेंटर’ (Carbon Management and Sequestration Center) के संस्थापक हैं।
उन्होंने बिना जुताई, कवर क्रॉपिंग (Cover cropping) यानी मिट्‌टी की उर्वरता बढ़ाने वाली फसलें, मल्चिंग (Mulching) यानी प्लास्टिक से ढककर होने वाली खेती और एग्रोफोरस्ट्री जैसी तकनीकों की खोज की या उनमें बदलाव किया। इन तकनीकों से खेती करने में पानी कम लगता है और मिट्‌टी के पोषक तत्व बने रहते हैं।
इन तकनीकों के जरिए फसल पर बाढ़, सूखा और जलवायु परिवर्तन के दूसरे प्रभाव नहीं पड़ते हैं। 2007 में इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC) को शांति का नोबेल पुरस्कार मिला था। डॉ. रतनलाल भी तब आईपीसीसी का हिस्सा थे।
विश्व खाद्य पुरस्कार
विश्व खाद्य पुरस्कार (World Food Prize)  की स्थापना 1986 में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नॉर्मन बोरलॉग द्वारा की गई थी। यह फाउंडेशन अमेरिका के डेस मोइनेस, आयोवा में स्थित है और इस पुरस्कार के पहले विजेता भारतीय कृषि वैज्ञानिक डॉ. एमएस स्वामीनाथन हैं जिन्हें 1987 में पुरस्कृत किया गया था। एमएस स्वामीनाथन को भारत की हरित क्रांति का जनक माना जाता है। इस पुरस्कार के तहत विजेता को 2, 50,000 अमेरिकी डॉलर की राशि प्रदान की जाती है।

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