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वेस्टर्न कोलफील्ड्स ने 3 नई कोयला खदानें खोलीं

कोल इंडिया (CIL) की सहायक कंपनी वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (Western Coalfields Ltd (WCL) ने 6 जून 2020 को महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में 3 नई कोयला खदानें खोली हैं, जिनकी संयुक्त वार्षिक उत्पादन क्षमता 2.9 मिलियन टन (MT) है।कंपनी इन परियोजनाओं पर कुल 849 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय (Capex) करेगी और 647 लोगों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करेगी।
डब्ल्यूसीएल द्वारा खोली गई तीन खदानें ये हैं- महाराष्ट्र के नागपुर क्षेत्र में अदसा भूमिगत खदान खदान( Adasa underground Mine),  मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के पेंच क्षेत्र में धनकसा भूमिगत खदान (Dhankasa underground mine) और कन्हान क्षेत्र में शारदा भूमिगत खदान (Sharda underground Mine)।
अदसा खदान की वार्षिक कोयला उत्पादन क्षमता 1.5 एमटी है, जबकि शारदा और धनकसा खदानों की वार्षिक कोयला उत्पादन क्षमता क्रमशः 0.4 एमटी और 1 एमटी है।
इस अवसर पर कंपनी ने अपने खनन कार्यों की निगरानी करने के लिए ‘WCL EYE’ के नाम से एक निगरानी प्रणाली शुरू की और इसके साथ ही अपने कर्मचारियों एवं हितधारकों से जुड़ने के लिए ‘SAMVAAD ’ के नाम से एक एप लॉन्च किया।
भारत में कोयला उत्पादन की वर्तमान स्थिति
आठ फरवरी 2020 तक चालू वित्तीय वर्ष के उत्पादन का जो आंकड़ा कोल इंडिया की ओर से जारी किया गया है, उसके अनुसार कोयला उत्पादन में पहले स्थान पर छत्तीसगढ़ में स्थित South Eastern Coalfields Limited (SECL), दूसरे नंबर पर ओडिशा में स्थित Mahanadi Coalfields Limited (MCL) तथा तीसरे नंबर पर यूपी/एमपी में स्थित Northern Coalfields Limited (NCL) है। चौथे स्थान पर झारखंड स्थित Central Coalfields Limited (CCL) एवं Bharat Coking Coal Limited (BCCL) का कुल उत्पादन है। हालांकि कोकिंग कोल के कारण झारखंड (झरिया कोयला क्षेत्र) अभी भी सबसे महत्वपूर्ण है। उल्लेखनीय है कि देश में कोयला खनन की शुरुआत बंगाल के रानीगंज और झारखंड के झरिया कोयला क्षेत्र से हुई थी। कोयला उत्पादन में झारखंड अग्रणी रहा है। बीसीसीएल-सीसीएल दो कोयला कंपनियां झारखंड में है।

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