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चैत्र शुक्ल प्रतिपदा: हिंदू नव वर्ष का शुभारंभ

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को भारत के विभिन्न भागों में अनेक रुपों में मनाया जाता है। उत्तर भारत में यह पारंपरिक हिंदू कैलेंडर विक्रमी संवत में नए वर्ष की शुरुआत के रूप में मनाया जाता है। यह नया वर्ष पारंपरिक हिंदू कैलेंडर के चैत्र महीने (मार्च-अप्रैल) के पहले दिन मनाया जाता है। इस तरह 25 अप्रैल से विक्रम संवत 2077 या हिन्दू नववर्ष 2077 का प्रारंभ हो गया है। इसे नव संवत्सर 2077 के नाम से भी जाना जाता है। इसकी शुरुआत सम्राट विक्रमादित्य ने की थी। भारत के उत्तरी भागों में इस दिन को चैत्र शुक्लादि (Chaitra Shukladi) के रूप में  भी मनाया जाता है।

  • आंध्रप्रदेश और कर्नाटक में इसे उगादि (Ugadi)यानी नए युग की शुरुआत के रूप में मनाया जाता है।
  • महाराष्ट्र और गोवा में इसे गुडी पड़वा (Gudi Padava) के रूप में मनाया जाता है। ‘पड़वा’ का अर्थ ‘फसल’ है। यह रबी की फसल के अंत और एक नए वसंत ऋतु की शुरुआत को चिह्नित करता है।
  • सिंधी लोग नए वर्ष को चेती चंद (Cheti Chand) के रूप में मनाते हैं। चैत्र माह को सिंधी भाषा में ‘चेती’ (Cheti) कहा जाता है, इस दिन को संत झूलेलाल (Saint Jhulelal) के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है।
  • कश्मीरी लोग इस दिन को नवरेह (Navreh) के रूप में मनाते है यह नाम संस्कृत भाषा के ‘नववर्ष’ से लिया गया है।
  • मणिपुर राज्य में इस दिन को साजिबू चिरोबा (Sajibu Cheiraoba) के रूप में मनाया जाता है। ‘साजिबू’ छह ऋतुओं में से पहली ऋतु अर्थात् बसंत को इंगित करता है और ‘चिरोबा’ का अर्थ ‘नए वर्ष की घोषणा’ है।

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