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दुनियाभर में फैलते कोरोना वायरस और लॉकडाउन के बीच विदेश में हजारों की तादाद में भारतीय फंसे हुए हैं जो अपने देश आना चाहते हैं। ऐसे में भारत सरकार ने विदेश में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए वंदे भारत मिशन शुरु किया है।
वंदे भारत मिशन के पहले चरण में 14 हजार 800 लोग भारत आएंगे
7 मई से शुरू हुए इस मिशन का पहला चरण 13 अप्रैल तक चलेगा। इस दौरान 12 देशों से 64 विमानों में 14 हजार 800 लोगों को लाने की योजना है। हालांकि, इसमें कुछ बदलाव हो सकते हैं। लेकिन, 1990 के खाड़ी युद्ध के बाद ये सबसे बड़ा एयरलिफ्ट ऑपरेशन है। खाड़ी युद्ध के वक्त 1.70 भारतीय एयरलिफ्ट किए गए थे।
यात्रियों को फ्लाइट का किराया खुद देना होगा
विदेशों में फंसे लोगों को लाने के लिए सरकार ने जो नियम तय किए हैं उनके मुताबिक लोगों को फ्लाइट का किराया खुद ही देना होगा। अमेरिका से आने वाली फ्लाइट का किराया सबसे ज्यादा एक लाख रुपए होगा। लंदन से आने वालों को 50 हजार रुपए देने होंगे।
मालदीव्स से 2000 भारतीय समुद्र के रास्ते लाए जाएंगे
नेवी के जहाज से समुद्र के रास्ते भी विदेशों से भारतीयों को लाने के लिए ऑपरेशन समुद्र सेतु शुरू किया गया है। इस ऑपरेशन के तहत मालदीव्स से दो फेज में 2 हजार भारतीय निकाले जाएंगे। नेवी के जहाज आईएनएस जलाश्व के जरिए आज 1000 लोगों को निकाला जाएगा। हालांकि, ये पता नहीं चल पाया है कि ये जहाज भारत कब पहुंचेगा।

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