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भारत-अमेरिका: रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बनाने के लिए एक सहमति ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर

चर्चा में क्यों?

  • अमेरिका और भारत ने हाल ही में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic petroleum reserves) बनाने के लिए एक सहमति ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • भारत के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और अमेरिका के ऊर्जा मंत्री डैन ब्राउलेट के साथ अमेरिका-भारत रणनीतिक ऊर्जा भागीदारी मंत्रिस्तरीय वर्चुअल बैठक में इसका निर्णय लिया गया।
  • दोनों देशों के बीच भारत का भंडार बढ़ाने के लिए अमेरिका में कच्चे तेल का भंडारण करने के लिए बातचीत अग्रिम चरण में है।
  • भारत अपनी जरूरत का 84 फीसद क्रूड विदेशी बाजारों से आयात करता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों में बदलाव होने से उसे भारी अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है।
  • भारत अपनी खपत का सिर्फ 15 दिनों का रणनीतिक भंडार बना पाया है। दूसरी तरफ अमेरिका के पास विशाल भंडारण क्षमता है। वहां भारत अपना तेल भंडार रखकर अनिश्चित हालात का ज्यादा बेहतर तरीके से सामना कर सकता है।

भारत में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार

  • रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार कच्चे तेल से संबंधित किसी भी संकट जैसे प्राकृतिक आपदाओं, युद्ध या अन्य आपदाओं के दौरान आपूर्ति में व्यवधान से निपटने के लिये कच्चे तेल के विशाल भंडार होते हैं।
  • भारत के रणनीतिक कच्चे तेल के भंडार वर्तमान में विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश), मंगलुरु और पाडुर (कर्नाटक) में स्थित हैं।
  • हाल ही में सरकार ने चंदीखोल (ओडिशा) और पाडुर (कर्नाटक) में दो अतिरिक्त सुविधाएँ स्थापित करने की घोषणा की है।
  • इन भंडारों में खनिज तेल का भंडारण भूमिगत चट्टान केवर्नों में किया जाता है।खनिज तेल भंडारण सुविधाओं के निर्माण का प्रबंधन इंडियन स्‍ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्वस लिमिटेड (ISPRL) द्वारा किया जा रहा है, जो तेल उद्योग विकास बोर्ड (OIDB) की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी कंपनी है।
  • इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (EIL) द्वारा तीनों स्थलों हेतु परियोजना प्रबंधन परामर्शदाता के रूप में कार्य किया जाता है।

भारत में पेट्रोलियम भंडारों की आवश्यकता

  • वर्तमान समय में भी भारत को अपनी जरुरत का 83% पेट्रोलियम आयात करना पड़ता है। इसके अलावा अक्सर पेट्रोलियम के दामों में उतार चढ़ाव होता रहता है और भारत अपनी ज्यादातर पेट्रोलियम की खपत के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर रहता है।
  • इसी कारण आपात स्थिति का सामना करने के लिए इन रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारों में कच्चा तेल सुरक्षित रखा जाता है।
  • वर्तमान में भारत के इन रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारों 15 दिन की पेट्रोलियम की जरुरत को पूरा किया जा सकता है। लेकिन केवल 15 दिन का भंडार भारत के लिए ज्यादा ऊर्जा सुरक्षा प्रदान नहीं करता है।
  • भारत को 90 दिनों के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त 32 मीट्रिक टन क्षमता भंडार बनाने की जरूरत है जो कि दूसरे चरण में बनने वाले भंडारों की मदद से हासिल कर ली जाएगी।

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