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कोरोना संकट के बीच विश्वभर में में पर्यावरण को सुरक्षित रखने की मांग और तेज हुई है। विशेषकर शहरी क्षेत्रों में इसकी अधिक जरूरत समझी जा रही है, जहां जंगल और जैव-विविधता दोनों ही लगभग समाप्त हो चुकी है। यही वजह है कि विश्व पर्यावरण दिवस पर केंद्र सरकार ने शहरों में फिर से जंगल विकसित करने की एक नई पहल शुरू की है। नगर वन योजना (Urban forest Scheme) के तहत इनका विकास किया जाएगा। इसके तहत अगले पांच सालों में देशभर में दो सौ नगर वन विकसित किए जाएंगे। इसके लिए राज्यों से प्रस्ताव मांगे गए हैं।
ये वन शहरों के फेफड़ों के रूप में काम करेंगे और मुख्य रूप से शहर की वन भूमि पर या स्थानीय शहरी निकायों द्वारा प्रस्तावित किसी अन्य खाली जगह पर होंगे।
शहरों में वन का महत्व?

  • भारत में गांव के समीप जंगल की बहुत ही महत्वपूर्ण परंपरा रही है अब शहरी वन संबंधी इस नई योजना से इस खाई को भरा जा सकेगा क्योंकि शहरी क्षेत्रों में उद्यान तो हैं लेकिन जंगल बहुत ही कम हैं।
  • शहरी वन बनाने की इस गतिविधि के साथ अतिरिक्त कार्बन सिंक भी तैयार किए जा सकेंगे।
  • भारत जंतुओं और पौधों की कई प्रजातियों से समृद्ध जैव विविधता से संपन्न है और जैव-विविधता से युक्‍त 35 वैश्विक हॉटस्पॉट्स में से 4 का मेजबान है, जिनमें अनेक स्थानिक प्रजातियां मौजूदहै। हालांकिबढ़ती जनसंख्या, वनों की कटाई, शहरीकरण और औद्योगीकरण ने हमारे प्राकृतिक संसाधनों पर भारी दबाव डाल दिया है, जिससे जैव विविधता की हानि हो रही है।
  • जैव विविधता पृथ्वी पर सभी जीवन रूपों के अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण है और विभिन्न पारिस्थितिकीय सेवाएं प्रदान करने की कुंजी है। पारंपरिक रूप से जैव विविधता संरक्षण को दूरस्थ वन क्षेत्रों तक ही सीमित माना जाता रहा है, लेकिन बढ़ते शहरीकरण के साथ शहरी क्षेत्रों में भी जैव विविधता को सुरक्षित रखने और बचाने के लिए आवश्यकता उत्पन्न हो गई है।शहरी वन इस अंतर को मिटाने का सबसे अच्छा तरीका है।

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