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द ग्रैंड इथियोपियन रेनेसां डैम

चर्चा में क्यों?

  • अफ्रीकी देश इथियोपिया ने हाल ही में कहा है कि वह नील नदी पर बने द ग्रैंड इथियोपियन रेनेसां डैम (Grand Ethiopian Renaissance Dam, GERD) में पानी भरने की शुरुआत जल्द ही करने जा रहा है।
  • इसके साथ ही इथियोपिया ने यह भी कहा है कि वो पड़ोसी देश मिस्र और सूडान के साथ नदी के पानी को लेकर विवाद को ख़त्म करने के लिए भी प्रतिबद्ध है।
  • द ग्रैंड इथियोपियन रेनेसां डैम या जीईआरडी अफ़्रीका का सबसे बड़ा हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट है और शुरुआत से ही ये नील बेसिन क्षेत्र में तनाव का कारण भी है।
  • यह बांध नील नदी की प्रमुख सहायक नदी नीली नील नदी (Blue Nile River ) पर बनाया जा रहा है।
  • जहां इथियोपिया अपने विकास के लिए इस बांध को जरूरी मानता है वहीं मिस्र और सूडान को डर है कि इससे उनके हिस्से का पानी इथियोपिया में ही रोक लिया जाएगा।
  • फ़रवरी में अमेरिकी राजस्व विभाग की मध्यस्थता में हो रही वार्ता टूट गई थी क्योंकि इथियोपिया की एबी अहमद सरकार ने अमेरिका पर मिस्र का पक्ष लेने के आरोप लगाए थे।

अफ्रीका की जीवन रेखा है नील नदी

  • अफ़्रीका की सबसे बड़ी नदी नील दस देशों से होकर गुज़रती है और ये इन देशों की जीवनरेखा है। पानी के अलावा ये बिजली का भी प्रमुख स्रोत है।
  • नील नदी विश्व की सबसे लंबी नदी है। यह भूमध्य रेखा के दक्षिण से निकलकर उत्तर पूर्वी अफ्रीका से होकर भूमध्य सागर में गिरती है।
  • इसकी लंबाई लगभग 4,132 मील (6,650 किलोमीटर) है। नदी के अपवाह बेसिन का क्षेत्रफल लगभग 1,293,000 वर्ग मील (3,349,000 वर्ग किलोमीटर) है।
  • नील नदी बेसिन तंज़ानिया, बुरुंडी, रवांडा, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, केन्या, युगांडा, दक्षिण सूडान, इथियोपिया, सूडान और मिस्र में विस्तृत है।
  • नील नदी की दो प्रमुख सहायक नदियाँ- व्हाइट नील और ब्लू नील हैं। व्हाइट नील नदी का उद्गम मध्य अफ्रीका के ‘महान अफ्रीकी झील’ (African Great Lakes) क्षेत्र से होता है जबकि ब्लू नील का उद्गम इथियोपिया की ‘लेक टाना’ से होता है।
  • नील नदी पर बन रहे इथियोपिया के जीईआरडी बांध पर क़रीब 4 अरब डॉलर ख़र्च हुए हैं और ये 6450 मेगावॉट बिजली पैदा करेगा।

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