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पद्मनाभस्वामी मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

चर्चा में क्यों?

  • केरल के पद्मनाभस्वामी मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना निर्णय सुनाया है और त्रावणकोर के शाही परिवार को ही इसका ट्रस्टी बरक़रार रखा है।
  • सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार मंदिर मामलों के प्रबंधन के लिए एक प्रशासनिक समिति बनाई जाएगी। तब तक अस्थायी तौर पर कोर्ट की कमेटी और ज़िला न्यायाधीश उसकी देख-रेख करेंगे।
  • कोर्ट ने मंदिर के तहखाने के कमरे यानी ‘वॉल्ट बी’ को खोले जाने को लेकर कुछ नहीं कहा है और इसके खोले या ना खोले जाने का फ़ैसला प्रशासनिक समिति पर छोड़ दिया है।
  • उल्लेखनीय है कि 2011 से यह मंदिर इसके तहखाने में कथित रुप से एक लाख करोड़ रुपए से भी ज़्यादा के ख़ज़ाने के रुप में चर्चित है।

क्या है इस मंदिर का इतिहास?

  • श्री पद्मनाभ मंदिर को 6वीं शताब्दी में त्रावणकोर के राजाओं ने बनवाया था।
  • 1750 में मार्तंड वर्मा ने खुद को भगवान का सेवक यानी ‘पद्मनाभ दास’ बताते हुए अपना जीवन और संपत्ति उन्हें सौंप दी।
  • 1949 तक त्रावणकोर के राजाओं ने केरल में राज किया जिसके बाद राज्य का भारत संघ में विलय हो गया।
  • त्रावणकोर के शासकों ने शासन को दैवीय स्वीकृति दिलाने के लिए अपना राज्य भगवान को समर्पित कर दिया था।
  • उन्होंने भगवान को ही राजा घोषित कर दिया था। मंदिर से भगवान विष्णु की एक मूर्ति भी मिली है जो शालिग्राम पत्थर से बनी हुई है।
  • 2011 में जब मामला अदालतों में पहुंचा तो इसके तहखाने खोले गए।
  • कल्लार (वॉल्ट) ए खोला गया तो उसमें करोड़ों रुपए के बेशकीमती जेवरात, मूर्तियां मिली हैं। कल्लार (वॉल्ट) बी नहीं खोला गया है।
  • शाही परिवार के सदस्यों का कहना है कि वह तहखाना श्रापित है। यदि उसे खोला गया तो वह अनिष्ट को न्योता देगा।

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