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दक्षिण-पश्चिम मानसून ने केरल में दी दस्तक

भारतीय मौसम विभाग ने मानसून-2020 की शानदार बारिश का पूर्वानुमान व्यक्त किया है। मानसून निर्धारित समय से एक जून को केरल पहुंच गया । भारतीय मौसम विभाग के महानिदेशक डॉक्टर मृत्युंजय महापात्र ने इसकी आधिकारिक घोषणा करते हुए कहा कि ‘दक्षिण-पश्चिम मानसून ने केरल में दस्तक दे दी है। इस सीजन में मानसूनी बादल देशभर में सामान्य से अधिक बरसेंगे।’
पूर्वानुमान के अनुसार उत्तर पश्चिम क्षेत्रों में सामान्य से 107 प्रतिशत, सेंट्रल इंडिया में 103 प्रतिशत, दक्षिणी क्षेत्र में 102 प्रतिशत और पूर्वोत्तर के राज्यों में बारिश सामान्य के मुकाबले 96 प्रतिशत होने की संभावना है। वैसे कुल मिलाकर सामान्य से अधिक बरसात होगी।
पूर्वानुमान के अनुसार मानसून सीजन के दौरान प्रशांत महासागर व हिंद महासागर की सतह का तापमान सामान्य रहने की संभावना है। जबकि मानसून के उत्तरार्ध में समुद्री जल की ऊपरी सतह का तापमान औसत से कम होगा, जिससे ला नीनो जैसी स्थिति बनने लगेगी। ऐसे में मानसून की अच्छी बारिश की संभावना बढ़ जाएगी।
दो बार जारी होता है मानसून का पूर्वानुमान
देश में मानसून का सीज़न चार माह का होता है। मानसून जून में शुरू होता है और सितंबर तक सक्रिय रहता है। दीर्घावधि पूर्वानुमान के दौरान मौसम विभाग कई पैमानों का उपयोग कर इन चार माह के दौरान होने वाली मानसूनी बारिश की मात्रा को लेकर संभावना जारी करता है।
इससे कृषि एवं अन्य क्षेत्रों को अपनी जरूरी तैयारियाँ करने में मदद मिलती है। पहला पूर्वानुमान अप्रैल के मध्य में जारी होता है, जबकि दूसरा मई के अंतिम सप्ताह अथवा जून के पहले सप्ताह में।
अप्रैल में जारी पूर्वानुमान में सुधार करते हुए मौसम विभाग ने कहा है कि इस सीजन में पूर्वोत्तर के राज्यों को छोड़कर बाकी जगहों पर चौतरफा बारिश होगी।
दक्षिण पश्चिमी मानसून

  • दक्षिण पश्चिमी मानसून प्राय़: पर जून में शुरू होता है और सितंबर तक लौट जाता है। इसके अंतर्गत दक्षिण से आने वाली आद्र हवाएं भारतीय उपमहाद्वीप की तरफ आती हैं और दो हिस्सों में बंट जाती है। एक भाग अरब सागर की शाखा कहलाती है और दूसरा भाग पश्चिम बंगाल शाखा।
  • अरब सागर की शाखा पहले केरल में एक जून के आस-पास प्रवेश करती है बाद में यह पश्चिमी घाट (कोंकण एवं गोवा) की तरफ बढ़ती है और 10 जून तक मुंबई पहुंच जाती है।
  • इसके साथ ही, पश्चिम बंगाल शाखा बंगाल की खाड़ी की तरफ बढ़ जाती है और वहां से यह पूर्वोत्तर भारत की तरफ चलती है। बंगाल की खाड़ी से यह और अधिक नमी लेती है जिसके साथ यह मानसून एक जून के आस-पास उत्तर पूर्वी भारत के इलाकों में पहुंचता है।
  • पूर्वोत्तर भारत पहुंच कर ये हवाएं पश्चिम की तरफ मुड़ जाती है और सिंध और गंगा के मैदानों की ओर चल पड़ती है। यही मानसून 15 जून के आस-पास उत्तर प्रदेश पहुंच जाता है।
  • उधर अरब सागर वाली शाखा गुजरात पहुंचती है जहां पर दोनों शाखाएं देश के मध्य भाग में मिल जाती है। इसके बाद ये दोनों एक प्रवाह बन जाती है और जुलाई के मध्य तक देश के विभिन्न भागों को वर्षा से भिगोती हैं।

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