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दक्षिण चीन सागर में चीन ने डुबोया वियतनाम का जहाज

चीन ने विवादित दक्षिण चीन सागर में वियतनाम के एक पोत को पैरासेल आइलैंड के पास डुबो दिया। इसे अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय कानून का ऐसे वक्त पर उल्लंघन किया गया, जब पूरी दुनिया चीन की लापरवाही से फैली कोरोना महामारी से जूझ रही है।चीन लगभग पूरे दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है। लेकिन इस दावे का वियतनाम, मलेशिया, फिलीपींस, ब्रुनेई और ताइवान विरोध करते हैं। पूर्वी चीन सागर को भी लेकर चीन का जापान के साथ विवाद है।
दक्षिणी चीन सागर पर चीन एकतरफ़ा हक़ क्यों जताता है?
इंडोनेशिया और वियतनाम के बीच पड़ने वाला दक्षिणी चीन सागर, क़रीब 35 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इस पर चीन, फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ताईवान और ब्रुनेई अपना दावा करते रहे हैं।प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर इस समुद्री इलाक़े में जीवों की सैकड़ों प्रजातियां पाई जाती हैं। चीन ने दक्षिणी चीन सागर में एक आर्टिफ़िशियल द्वीप तैयार कर के उस पर सैनिक अड्डा भी बना लिया है।
2016 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने फैसला दिया था कि ऐसे कोई ऐतिहासिक सबूत नहीं हैं कि चीन का इस समुद्र और इसके संसाधनों पर एकाधिकार रहा है। लेकिन चीन के इस अदालती कार्रवाई को ‘ढोंग’ बताया था और चीन ने कहा था कि अंतरराष्ट्रीय अदालत इस इलाक़े को लेकर उसके सम्प्रभुता के दावे पर चाहे जो फ़ैसला दे, वो दक्षिणी चीन सागर में अपने समुद्री हितों की रक्षा करेगा।
दो हज़ार साल पुराना इतिहास
सात देशों से घिरे दक्षिणी चीन सागर पर इंडोनेशिया को छोड़कर बाक़ी सभी 6 देश अपना दावा जताते रहे हैं। मगर चीन का कहना है कि ये इलाक़ा उसका है। दक्षिणी चीन सागर में स्थित द्वीपों की खोज चीन के समुद्री यात्रियों, नागरिकों और मछुआरों ने ही की थी। चीन का दावा है कि दक्षिणी चीन सागर से उसका संबंध क़रीब 2000 हज़ार साल पुराना है। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान, पूरे दक्षिणी चीन सागर पर जापान का क़ब्ज़ा था, लेकिन विश्व युद्ध के ख़ात्मे के फ़ौरन बाद चीन ने इस पर अपना अधिकार जताया था।
2012 में चीन ने अपने तट से 500 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक छोटे से द्वीप स्कारबरो शोल पर जहाज़ भेजकर क़ब्ज़ा कर लिया था। इसे लेकर फिलीपींस से चीन की कई महीने तक तनातनी रही। क्योंकि स्कारबरो शोल फिलीपींस के ज़्यादा नजदीक है इसलिए फ़िलीपींस इस पर अपना हक़ छोड़ने को तैयार नहीं था।
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