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सेवा क्षेत्र की गतिविधियों पर कोरोना वायरस और इसका तेज संक्रमण रोकने के लिए लागू देशव्यापी लॉकडाउन का गहरा असर हुआ है। एक मासिक सर्वे के मुताबिक मांग घटने के कारण मार्च में सर्विस सेक्टर का बिजनेस घटकर संकुचन की अवस्था में चला गया है। इसके उलट फरवरी में इस सेक्टर ने शानदार प्रदर्शन किया था।
कंपनियों के परचेज मैनजर्स के बीच किए जाने वाले मासिक सर्वेक्षण ‘आइएचएस मार्किट इंडिया सर्विसेज बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स’ (Purchasing Managers Index (PMI)) की 6 अप्रैल को जारी रिपोर्ट से निराशाजनक आंकड़े सामने आए हैं।
इसके मुताबिक मार्च में सर्विस सेक्टर का पीएमआइ 49.3 पर रहा, जो फरवरी में 85 महीनों के ऊंचे स्तर पर 57.5 पर पहुंच गया था। पीएमआई का 50 से नीचे रहना संकुचन यानी गिरावट औरऊपर जाना कारोबार बढ़ने का संकेत होता है।
सर्वेक्षण के लिए आंकड़े 12-27 मार्च के दौरान जुटाए गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए 14 अप्रैल तक 21 दिन के लॉकडाउन (आवाजाही पर पाबंदी) की घोषणा कर रखी है। इस वजह से सर्विस सेक्टर में मांग अचानक घट गई है।
इस बीच एकीकृत पीएमआइ (सेवा और विनिर्माण उद्योग का संयुक्त संकेतक) उत्पादन सूचकांक मार्च में 50.6 पर रहा, जो फरवरी में 57.6 पर था। इस सूचकांक से संयुक्त रूप से मैन्यूफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर की गतिविधियों का संकेत मिलता है।
क्या है PMI Index ?
परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) एक मिश्रित सूचकांक होता है जिसका उपयोग मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर की स्थिति का आंकलन करने के लिए किया जाता है। यह अलग-अलग कारोबारी पहलुओं पर मैनेजरों की राय के आधार पर तैयार होता है, जिसमें हजारों मैनेजरों से उत्पाद, नए ऑर्डर, उद्योग की उम्मीदों एवं आशंकाओं और रोजगार से जुड़ी हुई राय ली जाती है।
इसके साथ ही मैनेजरों से पिछले माह की तुलना में नई स्थिति पर राय और रेटिंग देने के लिए कहा जाता है, जिसके आधार पर इसको प्रत्येक माह जारी किया जाता है। दरअसल पीएमआई आंकड़ों में 50 को आधार माना गया है। साथ ही इसको जादुई आंकड़ा भी माना जाता है। 50 से ऊपर के पीएमआई आंकड़े को कारोबारी गतिविधियों के विस्तार के तौर पर देखा जाता। जबकि 50 से नीचे के आंकड़े को कारोबारी गतिविधियों में गिरावट के तौर पर देखा जाता है। यानी 50 से ऊपर या नीचे पीएमआई आंकड़ों में जितना अंतर होगा, कारोबारी गतिविधि में क्रमश: उतनी ही वृद्धि और कमी मानी जाएगी।
कैसे निकालते हैं ?
भारत में मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर के लिए पीएमआई का आंकड़ा लिया जाता है। सर्विस पीएमआई में छह उद्योगों को शामिल किया जाता है, जिसमें ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन, फाइनेंशियल इंटरमीडिएशन, बिजनेस सर्विसेज, पर्सनल सर्विसेज, कंप्यूटिंग एंड आईटी और होटल्स व रेस्टोरेंट शामिल हैं। पीएमआई के आकलन के लिए इन इंडस्ट्री से जुड़े कंपनियों के मैनेजरों को सर्वे के सवाल भेजे जाते हैं। कंपनी की साइज के हिसाब से इनके जवाब को वेटेज दिया जाता है।
इन सवालों के जवाब से पता लगाया जाता है कि इंडस्ट्री की हालत सामान्य, खराब या अच्छी है। वेटेज फीसदी में होते हैं। अगर हालात अच्छे हैं तो एक फीसदी का वेटेज मिलता है। अगर कोई परिवर्तन नहीं हुआ है तो आधा और गिरावट की स्थिति में शून्य फीसदी की वेटेज दी जाती है।
यह आकलन इस तरह किया जाता है जिसमें 50 का लेवल सामान्य स्थिति कहलाता है। यानी गतिविधियों में कोई परिवर्तन नहीं है। जबकि इससे ऊंची रैंकिंग ग्रोथ में इजाफा को दर्शाती है। वहीं 50 से नीचे की स्थिति कारोबारी गतिविधियों में स्लोडाउन की स्थिति को दर्शाती है।
जहां तक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का सवाल है तो सर्वे के लिए प्रश्नावली 500 मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के परचेजिंग मैनेजरों को भेजा जाता है। हालांकि फाइनल इंडेक्स कंपोजिट इंडेक्स होता है जो पांच संकेतकों को दर्शाता है। जो कि पूर्व निर्धारित वेटेज के होते हैं, उनमें न्यू ऑर्डर इंडेक्स, आउटपुट इंडेक्स, इंप्लॉयमेंट इंडेक्स, सप्लायर्स डिलीवरी टाइम्स इंडेक्स और स्टॉक ऑफ आइटम्स परचेज इंडेक्स शामिल हैं।
सर्विस पीएमआई की तरह ही मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में हर इंडेक्स सकारात्मक जवाब और आधे फीसदी के वेटेज का जोड़ होता है। कंपनियों और परचेजिंग मैनेजरों का फाइनल पैनल देश भर में फैले उद्योगों के परचेजिंग मैनजर्स से चुना जाता है। इसमें 50 का आंकड़ा किसी भी परिवर्तन को सूचित नहीं करता, लेकिन 50 के ऊपर का आंकड़ा सुधार की स्थिति दर्शाता है।

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