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वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के जिनोम सिक्वेंस की खोज की

गुजरात के वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस का जिनोम सिक्वेंस खोज निकालने का दावा किया है। इससे कोरोना की वैक्सीन खोजने में मदद मिलेगी। गुजरात बायोटेक्नालॉजी रिसर्च सेंटर (GBRC) के निदेशक चैतन्य जोशी ने जिनोम खोजने की जानकारी दी। जीबीआरसी ने कोरोना संक्रमित अलग-अलग सौ लोगों के सैंपल लिए तथा उनका डीएनए टेस्ट किया। GBRC के अनुसार कोरोना वायरस में एक माह में दो बार परिवर्तन देखे गए, वह तेजी से बदलता है, लेकिन यह बेहद मामूली होता है। स्वास्थ्य विभाग की प्रधान सचिव डॉ जयंती रवि ने बताया कि वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के मूल को खोजा है। कोविड 19 में अब तक 9 म्यूटेशन पाए गए हैं। गुजरात की स्टेट लैब ने 3 नए म्यूटेशन को खोजा है। इससे पहले 6 म्यूटेशन खोजे जा चुके हैं। शोध से कोरोना की हिस्ट्री का पता चलेगा, साथ ही उसकी दवा या वैक्सीन ईजाद करने में मदद मिलेगी।
जीनोम: Genome
आणविक जीव विज्ञान और आनुवंशिकी के अनुसार जीन जीवों का आनुवंशिक पदार्थ है, जिसके माध्यम से जीवों के गुण एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में पहुँचते हैं।
किसी भी जीव के डीएनए में विद्यमान समस्त जीनों का अनुक्रम जीनोम (Genome) कहलाता है।
मानव जीनोम में अनुमानतः 80,000-1,00,000 तक जीन होते हैं।
जीनोम के अध्ययन को जीनोमिक्स कहा जाता है।
जीनोम अनुक्रमण
जीनोम अनुक्रमण (Genome Sequence) के तहत डीएनए अणु के भीतर न्यूक्लियोटाइड के सटीक क्रम का पता लगाया जाता है।
इसके अंतर्गत डीएनए में मौज़ूद चारों तत्त्वों- एडानीन (A), गुआनीन (G), साइटोसीन (C) और थायामीन (T) के क्रम का पता लगाया जाता है।
डीएनए अनुक्रमण विधि से लोगों की बीमारियों का पता लगाकर उनका समय पर इलाज करना साथ ही आने वाली पीढ़ी को रोगमुक्त करना संभव है।

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