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सउदी अरब में कोड़े मारने की सजा समाप्त

सऊदी अरब में अब अपराधियों को कोड़े मारने की सजा नहीं दी जाएगी। सऊदी सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद  किसी भी मामले में कैद या जुर्माने की सजा ही मिलेगी।कोर्ट ने कहा कि कोड़े या बेंत मारने की सजा समाप्त करने मकसद यह है कि सऊदी शासन को मानवाधिकार के अंतरराष्ट्रीय मानकों के करीब ले जाना है। उल्लेखनीय है यहां की अदालतें पहले व्यभिचार और हत्या जैसे मामलों में कैद के साथ कोड़े मारने की भी सजा सुनाती थीं। कभी-कभी तो हजार-हजार कोड़े मारने की सजा दी जाती थी। मानवाधिकार संगठन इस सजा का लंबे समय से विरोध कर रहे थे। है।
सऊदी अरब में पिछले कुछ सालों में सामाजिक बदलाव के लिए कुछ विशेष कदम उठाए गए हैं। दुनिया के सामने देश की बेहतर छवि पेश करने के लिए महिलाओं को ड्राइिंवग करने, फुटबाल मैच देखने और नए सिनेमा हाल खोलने की छूट जैसे उपाय किए गए हैं। समझा जाता है इन सुधारों के पीछे क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान की भूमिका है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार भविष्य में विभिन्न अपराधों में सजा के तौर पर अदालतों को जुर्माने या जेल भेजने की सजा देनी होगी। ऐसे मामले जिनमें जेल की सजा नहीं दी जा सकती उसमें सामुदायिक सेवा की सजा दी जाएगी।हाल के वर्षो में कोड़ों की सजा का सबसे चर्चित मामला ब्लॉगर रईफ बदवई का था। 2014 में इस ब्लॉगर को इस्लाम के अपमान के आरोप में दस साल की सजा और 1000 कोड़े मारने की सजा सुनाई गई थी। बाद में रईफ को यूरोपीय पार्लियामेंट ने सखारोव मानवाधिकार पुरस्कार दिया था।

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