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पोखरण की प्रसिद्ध बर्तन निर्माण कला

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में राजस्थान के जैसलमेर जिले के एक छोटे से शहर, पोखरण की प्रसिद्ध बर्तनों की कला (Pottery Art of Pokhran) के पुनरुद्धार के लिए , खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) ने 80 कुम्हारों के परिवार को 80 इलेक्ट्रिक पॉटर चाकों का वितरण किया, जिनके पास टेराकोटा उत्पादों की समृद्ध विरासत मौजूद है।

महत्पूर्ण बिंदु

  • राजस्थान राज्य का सम्पूर्ण भू-भाग मृण कलाओं के लिए विशेष रूप से जाना जाता है।
  • हड़प्पा सभ्यता के काल में भी राजस्थान का कालीबंगा क्षेत्र चाक की मदद से बनाई जाने वाली इन मिट्ट की मूर्तियों के लिए जाना जाता था। उत्खनन मे यहां से काले व भूरे रंग के मिट्टी के बर्तन मिले हैं जिनमें विभिन्न ज्यामितीय और प्रकृति से जुड़ी आकृतियां बनी हैं।
  • वर्तमान में भी जैसलमेर का पोकरण, मेवाड़ का मोलेला व गोगुन्दा तथा ढूंढाड़ व मेवात स्थित हाड़ौता व रामगढ़ की मिट्टी की कला की प्रसिद्धि देश में ही नहीं, अपितु विदेशों तक में फैली हुई है।
  • जैसलमेर जिले के पोकरण की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान माटी से लोक देवी-देवताओं की हिंगाण (देवताओं की मूर्तियां) बनाने के रूप में हैं। पोखरण पॉटरी और मोलेला क्ले वर्क को भौगोलिक संकेतक (GI)टैग भी प्राप्त है।

यहां के मृण शिल्पकार विविध प्रकार के लोक देवी-देवताओं का माटी में रूपांकन करते हैं, जिन्हें मेवाड़ के साथ ही गुजरात व मध्यप्रदेश की सीमाओं पर स्थित आदिवासी गांवों के लोग खरीदकर ले जाते हैं और गांव के देवरों में विधि विधानपूर्वक स्थापित कर कला से जुड़ी धार्मिक परम्परा का निर्वाह करते हैं।

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