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पीएम फॉरमलाइजेशन ऑफ माइक्रो फूड प्रोसेसिंग एंटरप्राइजेज (PM-FME) योजना

चर्चा में क्यों?

  • खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्रीमती हरसिमरत कौर बादल ने हाल ही में “आत्मनिर्भर भारत अभियान” के एक भाग के रूप में पीएम फॉरमलाइजेशन ऑफ माइक्रो फूड प्रोसेसिंग एंटरप्राइजेज (PM Formalization of Micro Food Processing Enterprises (PM FME) योजना की शुरुआत की है।

योजना से संबंधित मत्वपूर्ण बिंदु

  • सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों (micro food processing enterprises) के उन्नयन के लिए वित्तीय, तकनीकी और व्यावसायिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने अखिल भारतीय स्‍तर पर इसकी शुरुआत की है।
  • यह एक केन्‍द्र प्रायोजित योजना है जिसे 10,000 करोड़ रुपये की लागत के साथ 2020-21 से 2024-25 तक पांच वर्षों की अवधि में लागू किया जाएगा।

व्यय का बंटवारा

  • इस योजना के तहत खर्च केन्‍द्र और राज्य सरकारों के बीच 60:40 के अनुपात में, पूर्वोत्‍तर और हिमालयी राज्यों के साथ 90:10 के अनुपात में, संघ शासित प्रदेशों के साथ 60:40 के अनुपात में और अन्य केन्‍द्र शासित प्रदेशों के लिए केन्‍द्र द्वारा 100 प्रतिशत साझा किया जाएगा।

एक जिला एक उत्‍पाद (ODOP) के दृष्टिकोण को विस्तार

  • यह योजना एक जिला एक उत्‍पाद (ODOP) के दृष्टिकोण को अपनाती है। राज्य मौजूदा समूहों और कच्चे माल की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए एक जिले के लिए खाद्य उत्पाद की पहचान करेंगे।
  • ओडीओपी उत्पाद खराब होने वाला उत्‍पाद या अनाज आधारित उत्पाद या एक जिले और उनके संबद्ध क्षेत्रों में व्यापक रूप से उत्पादित खाद्य उत्पाद हो सकता है।
  • ऐसे उत्पादों की सूची में आम, आलू, लीची, टमाटर, साबूदाना, कीनू, भुजिया, पेठा, पापड़, अचार, बाजरा आधारित उत्पाद, मछली पालन, मुर्गी पालन, मांस के साथ-साथ पशु चारा भी शामिल है।
  • ओडीओपी उत्पादों का उत्पादन करने वालों को प्राथमिकता दी जाएगी। हालांकि, अन्य उत्पादों का उत्पादन करने वाली इकाइयों को भी सहायता दी जाएगी।

योजना के तहत वित्तीय सहायता:

  • योजना की पात्र इकाइयाँ परियोजना लागत का 35% तक ऋण-आधारित पूंजीगत सब्सिडी का लाभ उठा सकती हैं, जिसकी अधिकतम सीमा 10 लाख रुपए प्रति इकाई है।
  • कृषक उत्पादक संगठनों (FPOs)/स्वयं सहायता समूहों (SHGs)/सहकारी समितियों या राज्य के स्वामित्व वाली एजेंसियों या निजी उद्यमों को सामान्य प्रसंस्करण सुविधा, प्रयोगशाला, गोदाम सहित बुनियादी ढाँचे के विकास के लिये 35% की दर से क्रेडिट-लिंक्ड अनुदान के माध्यम से सहायता प्रदान की जाएगी।
  • सीड कैपिटल (आरंभिक वित्त पोषण) के रूप में प्रति स्वयं सहायता समूह सदस्य को कार्यशील पूंजी और छोटे उपकरण खरीदने के लिये 40,000 रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
  • इस योजना से कुल 35,000 करोड़ रुपये का निवेश होगा और 9 लाख कुशल और अर्ध-कुशल रोजगार सृजित होंगे।

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