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इस वर्ष का सबसे बड़ा और चमकदार ‘पिंक सुपर मून’ (Pink Super Moon) मंगलवार 7 अप्रैल 2020 की रात आसमान में नजर आया। इस समय चंद्रमा-पृथ्वी के बीच 3,56,907 किमी की दूरी रह गई जो सामान्य के मुकाबले इस वर्ष सबसे कम थी। इसे ‘पैरिजी’(Perigee) कहा जाता है।
चंद्रमा सामान्य से बड़ा और रोशन तो नजर आया, लेकिन उसका रंग गुलाबी नहीं था। दरसअल पिंक मून नाम अप्रैल महीने में ही उत्तरी अमेरिका में खिलने वाले गुलाबी फूलों पिंक वाइल्डफ्लावर (Pink Wildflowers) की वजह से अप्रैल के चंद्रमा को दिया गया है। इसी समय चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य एक सीध में आए थे, जिसे ‘सिजजी’(syzygy) कहा जाता है।
क्या होता है सुपरमून?
चंद्रमा से धरती की दूरी करीब 4,06,692 किमी होती है। इस दूरी को विज्ञान की भाषा में एपोजी (Apogee)कहा जाता है। वहीं जब चंद्रमा और पृथ्वी सूरज का चक्कर लगाते हुए एक-दूसरे से सबसे करीब आ जाते हैं, तब इनके बीच की दूरी 3,56,500 किमी होती है। इसे पेरिजी(Perigee) कहते हैं।
जिस दिन और जिस समय चांद और धरती एक-दूसरे के सबसे करीब होते हैं, यानी पेरिजी में होते हैं, उसी दिन सुपरमून दिखाई देता है।
पृथ्वी से सबसे दूर बिंदु को अपोजी (Apogee) कहा जाता है, यह पृथ्वी से लगभग 405,500 किलोमीटर दूर है। वहीं पेरिजी (Perigee) पृथ्वी से लगभग 363,300 किलोमीटर तक की दूरी है।
इस वर्ष का पहला सुपरमून 9 मार्च को हुआ था और अंतिम 7 मई, 2020 को होगा।
पिंक सुपरमून को इसे पास्कल मून (Paschal Moon) भी कहा जाता है क्योंकि ईसाई कैलेंडर में ईस्टर (Easter) के लिये तारीख की गणना करने में इसका उपयोग किया जाता है। पास्कल मून के बाद पहला रविवार ईस्टर रविवार है।
पहली बार कब पता चला था सुपरमून के बारे में?
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) के अनुसार,  1979 में सुपरमून पहली बार देखा गया था। तब एस्ट्रोनॉमर्स ने इसे पेरीजीन फुल मून नाम दिया था। बाद में इसका नाम सुपरमून रखा गया।

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