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रुशिकुल्या नदी के तट पर पहुंचे हजारों ओलिव रिडले कछुए

कोरोनावायरस COVID-19 के लिए चल रहा भले ही इंसानों के लिए एक बहुत बड़ी आपदा के रूप में सामने आया है लेकिन पर्यावरण को इससे फायदा भी हो रहा है। दरअसल, भारत समेत विश्व के कई देशों में कोविड-19 (COVID-19) के बढ़ते मामलों को देखते हुए लॉकडाउन कर दिया गया है। ऐसे में पर्यावरण में कई सकारात्मक बदलाव भी देखे जा रहे हैं। जैसे कि ओडिशा (Odisha) की रुशिकुल्या नदी के मुहाने पर हजारों की संख्या में ओलिव रिडले प्रजनन के लिए पहुंच गए हैं।
वन विभाग की एक रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 70,000 से अधिक ओलिव रिडलेज़ (Olive Ridleys) कछुए अपना घोंसला बनाने के लिए रुशिकुल्या बीच पहुंच गए हैं और जल्द ही ये मादा ओलिव रिडलेज़ प्रजनन करेंगी। इस साल ये कछुए आराम से प्रजनन कर सकेंगे क्योंकि 21 दिनों के लॉकडाउन के चलते इंसानी दखल उन्हें परेशान नहीं करेगा।
ओलिव रिडले
ओलिव रिडले समुद्री कछुओं (Lepidochelys Olivacea) को ‘प्रशांत ओलिव रिडले समुद्री कछुओं’ के नाम से भी जाना जाता है। ये दुनिया के सबसे छोटे समुद्री कछुए  हैं।
यह मुख्य रूप से प्रशांत, हिन्द और अटलांटिक महासागरों के गर्म जल में पाए जाने वाले समुद्री कछुओं की एक मध्यम आकार की प्रजाति है। ये माँसाहारी होते हैं।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काम करने वाले विश्व का सबसे पुराने और सबसे बड़े संगठन आईयूसीएन (International Union for Conservation of Nature- IUCN)  रेड लिस्ट में इसे अतिसंवेदनशील (Vulnerable) प्रजातियों की श्रेणी में रखा गया है।
ओलिव रिडले कछुए हज़ारों किलोमीटर की यात्रा कर ओडिशा के गंजम तट पर अंडे देने आते हैं और फिर इन अंडों से निकले बच्चे समुद्री मार्ग से वापस हज़ारों किलोमीटर दूर अपने निवास-स्थान पर चले जाते हैं।
उल्लेखनीय है कि लगभग 30 साल बाद यही कछुए जब प्रजनन के योग्य होते हैं, तो ठीक उसी जगह पर अंडे देने आते हैं, जहाँ उनका जन्म हुआ था।
दरअसल अपनी यात्रा के दौरान भारत में गोवा, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश के समुद्री तटों से गुज़रते हैं, लेकिन प्रजनन करने और घर बनाने के लिये ओडिशा के समुद्री तटों की रेत को ही चुनते हैं।

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