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महाराष्ट्र के इंजीनियर ने बनाया पहला इंटरनेट नियंत्रित रोबोट

महाराष्ट्र के ठाणे के एक 23 वर्षीय इंजीनियर ने कोविड-19 महामारी से ग्रस्त मरीजों का उपचार करने वाले अस्पतालों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपनी तरह का पहला इंटरनेट नियंत्रित रोबोट (Internet-controlled robot) बनाया है। इसे ‘कोरो -बोट’ (Coro-bot) नाम दिया गया है।
यह रोबोट कोरोना संक्रमितों को भोजन, पानी, पेय पदार्थ और दवाओं सहित कुछ अच्छी सलाह देने का भी कार्य करता है। डिजाइन सहित इसे स्टार्ट-अप पीएनटी सॉल्यूशंस (PNT Solutions) के संस्थापक प्रतीक तिरोड़कर ने बनाया है। वर्तमान में इस रोबोट को मुंबई के कल्याण स्थित होली क्रॉस हॉस्पिटल में सफलतापूर्वक तैनात किया गया है।
कोरो-बोट के कारण कोविड-19 संक्रमित मरीज के लिए नर्सों या वार्ड ब्वॉय की उपस्थिति या संपर्क की आवश्यकता नहीं रहती है। यह मरीज को भोजन, पानी, दवाएं दे सकता है और एक कैमरे के माध्यम से रोगियों के साथ बातचीत भी कर सकता है। एक स्पीकर की सहायता से यह यह विभिन्न सावधानियों सहित रोगियों को सलाह देने जैसा काम भी काम कर सकता है। कंपनी ने इंटरनेट ऑफ थिंग्स (Intenet Of Things, IOT) तकनीक का उपयोग करके दुनिया के किसी भी स्थान से कोरो-बोट संचालित करने के लिए एक विशेष एप भी बनाया है। दावा किया जा रहा है कि इस तकनीक को मेडिकल क्षेत्र में दुनिया में कहीं भी पहली बार तैनात किया जा रहा है।
इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स की अवधारणा
इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स (IOT) के माध्यम से विभिन्न प्रौद्योगिकियों और उपकरणों को एक साथ जोड़ा जा सकता है। यह नेटवर्किंग के विकास की बड़ी सफलता है। इस तकनीक के माध्यम से हम दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाले सभी गैजेट्स और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को इंटरनेट के माध्यम से आपस में जोड़ने सकते हैं। यह एक तरह से ऑटोमेशन का नया युग है। इस तकनीक की मदद से जोड़े गए सभी स्मार्ट डिवाइस और उपकरण एक दूसरे को डाटा भेजते हैं और एक दूसरे से डाटा प्राप्त कर सकते हैं और इस आधार पर कार्य कर सकते हैं।
उदाहरण के लिए अगर कोई व्यक्ति अपने घर पहुंचने से पहले चाहता है कि उसके कमरे का एसी (AC)ऑन हो जाए और घर पहुंचते ही उसे अपना कमरा एकदम ठंड़ा मिले तो इंटरनेट ऑफ थिंग्स के जरिए ऐसा किया जा सकता है। वहीं अगर घर से निकलते हुए आप का एसी ऑन रह जाता है तो आईओटी की मदद से आप उस बंद भी कर सकते हैं।

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