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COVID-19 के कारण स्थगित हुआ NPT समीक्षा सम्मेलन

परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के 191 सदस्यों ने इसके क्रियान्वयन की समीक्षा करने के लिए होने वाले सम्मेलन को कोरोनावायरस वैश्विक महामारी के चलते स्थगित दिया है।यह बैठक न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में 27 अप्रैल से 22 मई के बीच होनी थी। उल्लेखनीय है कि NPT के सदस्य हर पांच साल में यह चर्चा करने के लिए बैठक करते हैं कि यह कैसे काम कर रही है। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि परिस्थितियां ठीक होने पर जल्द से जल्द यह बैठक होगी लेकिन अप्रैल 2021 से पहले तो नहीं होगी।
क्या है परमाणु अप्रसार संधि ?
परमाणु अप्रसार संधि (Non-Proliferation Treaty, NPT), परमाणु हथियारों का विस्तार रोकने और परमाणु टेक्नोलॉजी के शांतिपूर्ण ढंग से इस्तेमाल को बढ़ावा देने के अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों का एक हिस्सा है। इस संधि की घोषणा 1970 में की गई थी। इस संधि इसका उद्देश्य था परमाणु हथियारों को उन पाँच देशों तक सीमित रखना जो यह स्वीकार करते थे कि उनके पास ऐसे हथियार हैं। यह पाँच देश थे-अमेरीका, सोवियत संघ (आज का रूस), चीन, ब्रिटेन और फ़्रांस ।यह पाँच ‘परमाणु हथियार संपन्न’ राष्ट्र संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्य हैं और इस संधि के तहत इस बात से बंधे हुए है कि यह ‘ग़ैर-परमाणु’ देशों को न तो यह हथियार देंगे और न ही इन्हें हासिल करने में उनकी मदद करेंगे।
भारत को स्वीकार नहीं की संधि
अब तक संयुक्त राष्ट्र संघ के 191 सदस्य देश इसके पक्ष में हैं। इस पर हस्ताक्षर करने वाले देश भविष्य में परमाणु हथियार विकसित नहीं कर सकते। हालाँकि, वे शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिये परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन इसकी निगरानी अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (International Atomic Energy Agency-IAEA) के पर्यवेक्षक करेंगे। भारत का मानना है कि 1 जुलाई, 1968 को हस्ताक्षरित तथा 5 मार्च, 1970 से लागू परमाणु अप्रसार संधि भेदभावपूर्ण है, साथ ही यह असमानता पर आधारित एकपक्षीय व अपूर्ण है। इस कारण भारत ने अब तक इस संधि पर हस्ताक्षर नहीं किये हैं। भारत के अतिरिक्त पाकिस्तान, इजराइल, उत्तर कोरिया तथा दक्षिण सूडान भी इसमें शामिल नहीं हैं।

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