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नमामि गंगे योजना

चर्चा में क्यों?

  • विश्व बैंक ने नमामि गंगे योजना के लिए 37 अरब रुपये (60 करोड़ डॉलर) के फंड को मंजूरी दी है। इसका उपयोग नेशनल गंगा रिवर बेसिन प्रोजेक्ट के तहत गंगा नदी से जुड़ी यमुना और काली नदी जैसी सहायक नदियों में प्रदूषण रोकने वाली ढांचागत परियोजनाओं के विकास में किया जाएगा।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • विश्व बैंक ने इस फंड को स्वीकृति राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) के साथ द्वितीय गंगा रिवर बेसिन प्रोजेक्ट (गंगा की सहायक नदियों की सफाई के लिए) को लेकर चर्चा के बाद दी है।
  • 45 अरब रुपये का यह कर्ज 5 साल के लिए दिया गया है। इसमें से 11.34 अरब रुपये के कर्ज के इस्तेमाल से मेरठ, आगरा और सहारनपुर में गंगा की सहायक नदियों पर तीन नए हाइब्रिड एन्युटी प्रोजेक्ट (Hybrid Annuity Project) बनाने में किया जाएगा।
  • हाइब्रिड एन्युटी मॉडल में परियोजना की लागत का 40 प्रतिशत सरकार डेवलेपर को कंस्ट्रक्शन के दौरान कंस्ट्रक्शन सपोर्ट के तौर पर उपलब्ध कराती है और बाकी का 60 पर्सेंट कंसेशन पीरियड में एन्यूटी पेमेंट के तौर पर इंटरेस्ट के साथ दिया जाता है।

‘नमामि गंगे’ योजना

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ्लैगशिप योजना ‘नमामि गंगे’ को मई 2015 में स्वीकृति दी गई थी।
  • इस योजना के तहत गंगा नदी को समग्र तौर पर संरक्षित और स्वच्छ करने के कदम उठाए जा रहे हैं।
  • इस पर वर्ष 2020 तक 20 हज़ार करोड़ रुपए खर्च करने की योजना है।
  • गंगा को स्वच्छ करने के लिये पिछले 30 सालों में सरकार की ओर से खर्च की गई राशि से यह चार गुना अधिक है।
  • बेहतर और टिकाऊ परिणाम हासिल करने के लिये इस कार्यक्रम में अहम् बदलाव करते हुए गंगा नदी के किनारे बसे लोगों को ‘स्वच्छ गंगा मिशन’ में शामिल किया गया है।
  • गंगा स्वच्छता मिशन में राज्यों और ज़मीनी स्तर के संस्थानों, जैसे- शहरी स्थानीय निकाय और पंचायती राज संस्थानों को शामिल किया गया है।
  • यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (National Mission for Clean Ganga-NMCG) द्वारा लागू किया जा रहा है।
  • गंगा की सफाई के लिये इस मिशन को बेहतर तरीके से लागू करने के लिये इसकी त्रिस्तरीय निगरानी की जा रही है—
  • 1-कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय कार्यबल का गठन किया गया है, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर एन.एम.सी.जी. मदद करता है।
  • 2-राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है, जिसे एस.पी.एम.जी.ए. सहायता करते हैं।

3-ज़िलाधिकारी की अध्यक्षता में ज़िला स्तर पर कमेटियाँ बनाई गई हैं।

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