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न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सबसे अधिक गेहूं खरीदने वाला राज्य बना मध्य प्रदेश

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर 1.27 करोड़ मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की खरीद कर मध्यप्रदेश देश में प्रथम स्थान पर पहुंच गया है। देश के सभी राज्यों द्वारा कुल गेहूं खरीद का 33 प्रतिशत मध्यप्रदेश में की गई है।
पंजाब जो कि अब तक शीर्ष स्थान पर था अब दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।पंजाब ने 127 लाख 67 हजार 473 मीट्रिक गेहूं खरीदा है।
पिछले वर्ष की तुलना में मध्यप्रदेश में गेहूँ खरीद में 74 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।2019 में मध्यप्रदेश में 73.69 लाख गेहूं समर्थन मूल्य पर खरीदा गया था। देश में अभी तक न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सर्वाधिक गेहूं की खरीद पंजाब करता आया है।
क्या है न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP)?
न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) वह न्यूनतम मूल्य होता है, जिस पर सरकार किसानों द्वारा विक्रय किए जाने वाली उपज की पूरी मात्रा क्रय करने के लिये तैयार रहती है।
इस नीति से सरकार किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कृषि उत्पादों को क्रय कर उनके हितों की रक्षा करती है। अन्यथा किसान सिर्फ जोखिमरहित व्यवसायिक फसलों को उगाने की ओर ही प्रेऱित हो सकते हैं जो खाद्य सुरक्षा के लिए संकट उत्पन्न कर सकता है।
न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा फसल बोने से पहले की जाती है।
न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा सरकार द्वारा कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की संस्तुति पर वर्ष में दो बार रबी और खरीफ के मौसम में की जाती है।
कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP)
कृषि लागत एवं मूल्य आयोग भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से संबंधित निकाय है। यह आयोग जनवरी1965 में स्तापित किया गया।
यह आयोग कृषि उत्पादों के संतुलित एवं एकीकृत मूल्य संरचना तैयार करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया। कृषि लागत एवं मूल्य आयोग कृषि उत्पादों के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सलाह देता है।
कृषि लागत एवं मूल्य आयोग 23 कृषि फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य जारी करता है।
जिनमें 7 अनाज (धान, गेहूं, मक्का,शोर्घम, बाजरा, जौ और रागी), 5 दालें (चना, अरहर, मूंग, उड़द, मसूर), 7 तिलहन (मूंगफली, रेपसीड-सरसों, सोयाबीन, समुद्री घास, सूरजमुखी, कुसुम,नाइजरसीड), और 4 वाणिज्यिक फसलें (नारियल, गन्ना, कपास और कच्चा जूट) शामिल हैं।
नोट- गन्ने के लिये न्यूनतम समर्थन मूल्य की जगह उचित एवं लाभकारी मूल्य की घोषणा की जाती है। गन्ने का मूल्य निर्धारण आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा अनुमोदित किया जाता है।

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