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मंगोलियाई कंजुर के 108 अंकों की पुनर्मुद्रण परियोजना

चर्चा में क्यों?

  • संस्कृति मंत्रालय ने राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन ( National Mission for Manuscripts (NMM) के तहत मंगोलियाई कंजुर (Mongolian Kanjur) के 108 अंकों के पुनर्मुद्रण करने परियोजना आरंभ की है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन (NMM)भारत सरकार के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय द्वारा फरवरी 2003 में पांडुलिपियों में संरक्षित ज्ञान के दस्तावेजीकरण, संरक्षण एवं प्रसार करने के अधिदेश के साथ लांच किया गया था।
  • मिशन का एक उद्देश्य दुर्लभ एवं अप्रकाशित पांडुलिपियों को प्रकाशित करना है जिससे कि उनमें प्रतिष्ठापित ज्ञान शोधकर्ताओं, विद्वानों एवं बड़े पैमाने पर आम लोगों तक प्रसारित हो सके।
  • इस योजना के तहत, मंगोलियाई कंजुर के 108 अंकों के पुनर्मुद्रण का कार्य मिशन द्वारा आरंभ किया गया है।
  • यह कार्य विख्यात विद्वान प्रो. लोकेश चंद्रा के पर्यवेक्षण के तहत किया जा रहा है।

क्या है मंगोलियाई कंजुर

  • 108 अंकों का बौद्ध धर्म वैधानिक ग्रंथ मंगोलियाई कंजुर मंगोलिया में सर्वाधिक महत्वपूर्ण धर्म ग्रंथ माना जाता है।
  • मंगोलियाई भाषा में ‘कंजुर‘ का अर्थ होता है ‘संक्षिप्त आदेश‘ जो विशेष रूप से भगवान बुद्ध के शब्द होते हैं।
  • मंगोलियाई बौद्धों द्वारा इसका काफी सम्मान किया जाता है तथा वे मंदिरों में कंजुर की पूजा करते हैं तथा एक धार्मिक रिवाज के रूप में अपने प्रतिदिन के जीवन में कंजुर की पंक्तियों का पाठ करते हैं।
  • मंगोलिया में लगभग प्रत्येक बौद्ध मठ में कंजुर को रखा जाता है।
  • मंगोलियाई कंजुर को तिब्बती भाषा से अनुदित किया गया है। कंजुर की भाषा शास्त्रीय मंगोलियाई है।

भारत – मंगोलिया ऐतिहासिक संबंध

  • भारत और मंगोलिया के बीच ऐतिहासिक परस्पर संबंध सदियों पुराने हैं।
  • मंगोलिया में बौद्ध धर्म भारतीय सांस्कृतिक एवं धार्मिक राजदूतों द्वारा आरंभिक ईस्वी के दौरान ले जाया गया था। इसके परिणामस्वरूप, आज मंगोलिया में बौद्धों का सबसे बड़ा धार्मिक प्रभुत्व है।
  • भारत ने 1955 में मंगोलिया के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित किए। तब से, दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ संबंध एक नई ऊंचाई तक पहुंच गए हैं।
  • अब भारत सरकार द्वारा मंगोलियाई सरकार के लिए मंगोलियाई कंजुर का प्रकाशन भारत और मंगोलिया के बीच सांस्कृतिक सिम्फनी के प्रतीक के रूप में कार्य करेगा तथा आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों को और आगे ले जाने में योगदान देगा।

हमारी संस्कृति,  हमारी सॉफ्ट पॉवर

  • बौद्धिक व सांस्कृतिक शक्ति अर्थात् ”सॉफ्ट पॉवर” का प्रयोग विभिन्न देशों द्वारा अपने अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को विकसित और प्रभावी बनाने में किया जाता है।
  • वर्तमान दौर में सैन्य और धन की ताकत यानी “हार्ड पावर” की तुलना में इसे अधिक महत्व दिया जा रहा है।
  • पिछले कुछ दशकों से भारत ने अपनी ”सॉफ्ट पॉवर” के प्रयोग की रणनीति काफी व्यवस्थित की है और एक रणनीतिक उपकरण के रूप में इसका प्रयोग करने में सक्षम रहा है।
  • योग, आयुर्वेद, बौद्ध एवं धर्म, क्रिकेट, भारतीय प्रवासी, बॉलीवुड, भारतीय भोजन, गांधीवादी आदर्श आदि भारत की ” सॉफ्ट पॉवर ” में शामिल की जाती हैं।

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