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कुशीनगर हवाई अड्डा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रूप में घोषित

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाले केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 24 जून 2020 को उत्तर प्रदेश में कुशीनगर हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रूप में घोषित किए जाने को स्वीकृति दे दी है।
महत्वपूर्ण बिंदु

  • बौद्ध सर्किट में कुशीनगर का महत्वपूर्ण स्थान है इसके पास कई अन्य बौद्ध स्थल जैसे श्रावस्ती (238 किमी), कपिलवस्तु (190 किमी) और लुम्बिनी (195 किमी) स्थित हैं। अब अंतराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनने से यहां पर्यटन संबंधी गतिविधियों का और अधिक विकास होगा।
  • कुशीनगर उत्तर प्रदेश के उत्तर-पूर्वी भाग में स्थित है और गोरखपुर से 50 किलोमीटर पूर्व में है।
  • वर्तमान कुशीनगर की पहचान कुसावती (पूर्व बुद्ध काल में) और कुशीनारा (बुद्ध काल के बाद) से की जाती है।
  • 483 ई.पू. यहीं पर महात्मा बुद्ध को परिनिर्वाण प्राप्त हुआ था।
  • कुशीनारा मल्ल गणराज्य की राजधानी थी जो छठी शताब्दी ईसा पूर्व के सोलह महाजनपदों में से एक थी। तब से, यह मौर्य, शुंग, कुषाण, गुप्त, हर्ष और पाला राजवंशों के तत्कालीन साम्राज्यों का एक अभिन्न अंग बना रहा।
  • कुशीनारा 12 वीं शताब्दी ईस्वी तक अस्तित्व में रहा और उसके बाद गुमनामी में खो गया।
  • आधुनिक कुशीनगर की खोज 19 वीं शताब्दी में ब्रिटिश भारत के महान पुरातत्वविद अलेक्जेंडर कनिंघम द्वारा करवाए गए उत्खनन में हुई थी।
  • इसके बाद सी.एल. कार्ललेइल ने यहां मुख्य स्तूप की खोज की और 1876 में महात्मा बुद्ध की 6.10 मीटर लंबी प्रतिमा को भी खोज निकाला। इसे महापरिनिर्वाण मूर्ति के नाम से जाना जाता है।
  • बर्मा के एक संन्यासी, चंद्र स्वामी 1903 में भारत आए और महापरिनिर्वाण मंदिर का निर्माण करवाया।
  • आजादी के बाद, कुशीनगर देवरिया जिले का हिस्सा रहा। 13 मई 1994 को, यह उत्तर प्रदेश के एक नए जिले के रूप में अस्तित्व में आया

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