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जम्मू-कश्मीर: 6 प्रमुख पुल राष्ट्र को समर्पित

चर्चा में क्यों?

  • जम्मू-कश्मीर में अंतर्राष्ट्रीय सीमा (IB) और नियंत्रण रेखा (LOC) के निकट स्थित संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में छह प्रमुख पुलों को राष्ट्र को समर्पित किया गया।
  • सामरिक दृष्टि से अत्‍यंत महत्वपूर्ण इन पुलों का निर्माण कार्य सीमा सड़क संगठन (BRO) ने किया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वर्चुअली इनको राष्ट्र को समर्पित किया।
  • बीआरओ के ‘प्रोजेक्ट संपर्क’ द्वारा निर्मित इन पुलों से सशस्त्र बलों को सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र में आवाजाही करने में काफी सुविधा होगी। यही नहीं, ये पुल दूरस्‍थ सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र आर्थिक विकास में भी अहम योगदान देंगे।
  • इसके तहत कठुआ जिले में तरनाह नाले पर दो पुल और अखनूर/जम्मू जिले में अखनूर-पल्लनवाला रोड पर स्थित चार पुल 30 से 300 मीटर तक फैले हुए हैं और ये कुल 43 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए।

सीमा सड़क संगठन

  • सीमा सड़क संगठन (BRO) की स्थापना 7 मई, 1960 को हुई थी और यह रक्षा मंत्रालय के तहत एक प्रमुख सड़क निर्माण संस्था के रूप में कार्य करता है।
  • 07 मई, 2020 को सीमा सड़क संगठन (Border Road Organization-BRO) ने अपना 60 वाँ स्थापना दिवस मनाया।
  • इसके महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह हैं।

अंतरराष्ट्रीय सीमा, नियंत्रण रेखा और वास्तविक नियंत्रण रेखा – ये क्या हैं?

  • भारत की थल सीमा की कुल लंबाई 15,106.7 किलोमीटर है जो कुल सात देशों से लगती है। इसके अलावा 6 किलोमीटर लंबी समुद्री सीमा है।
  • ये सात देश हैं, बांग्लादेश (4,096.7 किमी), चीन (3,488 किमी), पाकिस्तान (3,323 किमी), नेपाल (1,751 किमी), म्यांमार (1,643 किमी), भूटान (699 किमी) और अफ़ग़ानिस्तान (106 किमी)।

भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC)

  • भारत चीन के साथ 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। ये सीमा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश से होकर गुज़रती है।
  • ये तीन सेक्टरों में बंटी हुई है – पश्चिमी सेक्टर यानी लद्दाख, मिडिल सेक्टर यानी हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड और पूर्वी सेक्टर यानी सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश।
  • हालांकि दोनों देशों के बीच अब तक पूरी तरह से सीमांकन नहीं हुआ है। क्योंकि कई इलाक़ों को लेकर दोनों के बीच सीमा विवाद है।
  • इन विवादों की वजह से दोनों देशों के बीच कभी सीमा निर्धारण नहीं हो सका। हालांकि यथास्थिति बनाए रखने के लिए लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल (Line of Actual Control, LAC ) टर्म का इस्तेमाल किया जाता है।

भारत-पाकिस्तान: नियंत्रण रेखा (LOC)

  • जम्मू-कश्मीर विवाद के कारण यह क्षेत्र इस समय एक नियंत्रण रेखा से बँटा हुआ, जिसके एक तरफ़ का हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में है।
  • 1947-48 में भारत और पाकिस्तान के बीच जम्मू और कश्मीर के मुद्दे पर पहला युद्ध हुआ था जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में युद्धविराम समझौता हुआ।
  • इसके तहत एक युद्धविराम सीमा रेखा तय हुई, जिसके मुताबिक़ जम्मू और कश्मीर का लगभग एक तिहाई हिस्सा पाकिस्तान के पास रहा जिसे पाकिस्तान ‘आज़ाद कश्मीर’ कहता है जबकि भारत पाक अधिकृत कश्मीर (Pakistan-occupied Kashmir, POK) कहता है।
  • 1971 के युद्ध के बाद शिमला समझौता हुआ जिसके तहत युद्धविराम रेखा को ‘नियंत्रण रेखा’ ( Line Of Controle) का नाम दिया गया। दोनो पक्षों ने ये माना कि जब तक आपसी बातचीत से मसला न सुलझ जाए तब तक यथास्थिति बहाल रखी जाए।
  • भारत और पाकिस्तान के बीच ये नियंत्रण रेखा 740 किलोमीटर लंबी है।
  • इसके अलावा भारत पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा (International Border , IB) राजस्थान, गुजरात, जम्मू और गुजरात से लगती है।

सियाचिन ग्लेशियरः एक्चुअल ग्राउंड पोजिशन लाइन

  • सियाचिन ग्लेशियर के इलाके में भारत-पाकिस्तान की स्थिति ‘एक्चुअल ग्राउंड पोजिशन लाइन’ (Actual Ground Position Line) से तय होती है।
  • 2 किलोमीटर लंबी ‘एक्चुअल ग्राउंड पोजिशन लाइन’ की रखवाली भारतीय सेना करती है।

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