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It’s Time: विश्व तपेदिक दिवस – 2020

24 मार्च को विश्व तपेदिक दिवस ( World Tuberculosis Day ) मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन बीमारी के बैक्टीरिया की पहचान हुई थी। डा. राबर्ट कोच ने 24 मार्च 1882 को यह ऐलान किया था कि उन्होंने माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्युलोसिस (Mycobacterium tuberculosis) का पता लगा लिया है, जो इन्सानों में तपेदिक की बीमारी के लिए जिम्मेदार है। यही वजह है कि दुनियाभर में 24 मार्च को ‘‘विश्व तपेदिक दिवस’’ के तौर पर मनाया जाता है। 2020 के लिए इस दिवस की थीम : It’s Time है।
2025 तक भारत को तपेदिक मुक्त बनाने लक्ष्य
भारत ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की निर्धारित समय सीमा से पांच साल पहले 2025 तक भारत को तपेदिक मुक्त बनाने लक्ष्य तय किया है। 2019 में तपेदिक के उन्मूलन के लिये विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की पहली मंत्रिस्तरीय बैठक रूस के मास्को शहर में हुई। इसमें 2030 तक टीबी उन्मूलन का वैश्विक लक्ष्य रखा गया है। यह संयुक्त राष्ट्र के सतत् विकास लक्ष्यों-2030 के तीसरे लक्ष्य (SDG-3) की प्राप्ति में सहायक सिद्ध होगा, जिसमें सभी आयु के लोगों में स्वास्थ्य सुरक्षा और स्वस्थ जीवन को बढ़ावा देने की बात कही गई है। साथ ही HIV-टीबी दोहरे संक्रमण से होने वाली मौतों को 2020 तक रोके जाने की प्रतिबद्धता भी ज़ाहिर की गई है।
क्या है तपेदिक? 
टीबी यानी ट्यूबरक्युलोसिस बैक्टीरिया से होने वाली फेफड़ों की बीमारी है। यह संक्रामक बीमारी है, जो मरीज के लार, बलगम और उसके संपर्क में रहने से होती है। फेफड़ों के अलावा तपेदिक यूटरस, हड्डियों, मस्तिष्क, लिवर, किडनी और गले में भी हो सकती है। खास बात यह है कि फेफड़े की टीबी के अलावा अन्य अंगों की टीबी संक्रामक नहीं होती है।
क्यों खतरनाक है टीबी? 
टीबी का मरीज जब छींकता है तो दबाव से 10 हजार बूंदे मुंह से निकलती हैं। वहीं, खांसते समय तीन हजार बूंदे मुंह से निकलती हैं। इसलिए टीबी के मरीज को छींकते और खांसते समय रुमाल का प्रयोग करना चाहिए। इसका संक्रमण काफी तेजी फैलता है। इसके अलावा टीबी शरीर के जिस हिस्से को अपना शिकार बनाती है, सही इलाज न मिलने पर वह पूरी तरह बेकार हो जाता है। यूटरस की टीबी के कारण बांझपन होता है, फेफड़ों में तपेदिक होने पर यह कमजोर और बेकार हो जाते हैं। इसी तरह ब्रेन की टीबी होने पर मरीज को दौरे पड़ते और हड्डी की टीबी में हड्डियां गलने लगती हैं।
वैश्विक तपेदिक रिपोर्ट? 
विश्व स्वास्थ्य संगठन वर्ष 1997 से प्रत्येक वर्ष विश्व तपेदिक रिपोर्ट जारी करता है।
इसका उद्देश्य तपेदिक के निदान के लिये वैश्विक, क्षेत्रीय तथा देशों के स्तर पर व्यक्त की गईं प्रतिबद्धताओं और रणनीतियों के संदर्भ में व्यापक एवं अद्यतन मूल्यांकन करना है।

  • वैश्विक तपेदिक रिपोर्ट-2019 के अनुसार, भारत में पिछले वर्ष तपेदिक के रोगियों की संख्या में 50000 की कमी आई है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2017 में भारत में तपेदिक रोगियों की संख्या 27.4 लाख थी जो वर्ष 2018 में घटकर 26.9 लाख हो गई।
  • वर्ष 2017 में प्रति एक लाख लोगों पर तपेदिक के रोगियों की संख्या 204 थी जो कि वर्ष 2018 में घटकर 199 हो गई।

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