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COVID-19 की जांच के लिए देश की पहली मोबाईल लैब

COVID-19 की जांच के लिए देश की पहली मोबाईल लैब
चर्चा में क्यों?

  • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल ही में कोरोना वायरस (COVID-19) की जांच के लिए देश की पहली चलती-फिरती लैब आई लैब (I-Lab (Infectious disease diagnostic lab) की शुरुआत की है।
  • आई-लैब वैन देश के दूर-दराज और ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर कोरोना की टेस्टिंग करेगी।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • आई-लैब एक दिन में 25 आरटी-पीसीआर टेस्ट ( RT-PCR Polymerase Chain Reaction)और 300 एलाइजा टेस्ट कर सकती है।
  • इसके अलावा इसमें टीबी और एचआईवी जांच की सुविधा भी है, जो सरकारी योजना के मुताबिक दरों पर की जाएगी।
  • आई-लैब की फंडिंग विज्ञान एंव प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कोविड-19 प्रोग्राम के तहत की है जबकि इसका निर्माण नेशनल बायोफार्मा मिशन (NBM) के तहत आंध्र प्रदेश मेडटेक ज़ोन लिमिटेड (AMTZ) की एक टीम ने बनाया है।
  • विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) ने आंध्र प्रदेश मेड-टेक ज़ोन ( Andhra Pradesh Med Tech Zone Limited (AMTZ) के साथ स्वास्थ्य देखभाल प्रौद्योगिकी की देश में कमी को दूर करने के लिए डीबीटी-एएमटीजेड कमांड समूह की शुरुआत की है।
  • एएमटीजेड 2016 में स्थापित एशिया का पहला चिकित्सा उपकरण विनिर्माण पार्क है जो चिकित्सा प्रौद्योगिकी के लिए समर्पित है। इसे कई मंत्रालयों से सहयोग मिलता है।

यह लैब BioSafety Level (BSL-II) श्रेणी का है।

  • बीएसएल के तहत एक से चार तक रैंक दिया जाता है जो उन जीवों के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है जिन पर शोधकर्ताओं काम कर रहे हों।
  • इनमें वायरस, बैक्टीरिया, कवक, परजीवी आदि शामिल हैं। BSL-I को सबसे कम खतरनाक माना जाता है, जबकि BSL-IV में अधिकतम सुरक्षा जोखिम होता है।

नेशनल बायोफार्मा मिशन

  • भारत में बायोफार्मास्यूटिकल्स के विकास को गति देने के लिये 2017 में शुरु किया गया था। नवाचार-3 (I-3) नाम से शुरू हो रहे इस कार्यक्रम इसे जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (Biotechnology Industry Research Assistance Council, BIRAC) द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।
  • 1500 करोड़ रुपये की लागत से इस मिशन में से 50% विश्व बैंक ऋण द्वारा सह-वित्त पोषित है।

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