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भारत-चीन सीमा विवाद पर लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की वार्ता

भारत-चीन सीमा विवाद पर 7 जून 2020 को लद्दाख में चीन सीमा के अंतर्गत मोलडो चुशुल में लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की वार्ता संपन्न हुई। वार्ता में भारत ने चीन से स्पष्ट कहा है कि सीमा पर अप्रैल 2020 की स्थिति बनाई जाए । वार्ता के दौरान भारत ने चीनी सेना से पीछे हटने को कहा है। वहीं, सीमा पर सड़क निर्माण रोकने की चीन की मांग को भी भारत ने खारिज कर दिया है।
भारत की ओर से लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने वार्ता का नेतृत्व किया। हालांकि वार्ता में कोई नतीजा तो नही निकला, लेकिन दोनो पक्षों ने अपनी मांग एक दूसरे के सामने रखी है। जिससे गतिरोध के कूटनीतिक हल की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
उल्लेखनीय है कि भारत को लद्दाख में स्थित पैंगोंग झील के समीपवर्ती फिंगर्स और गलवान घाटी से चीनी सेनाओं और उनके द्वारा बनाए गए कैंप पर आपत्ति है। भारत चाहता है कि फिंगर- 4 में मौजूद चीनी सेना पीछे हटे। जबकि चीन ने भारत सीमा पर सड़क निर्माण रोकने को कहा है।
पिछले एक माह से भी अधिक समय से इन स्थानों पर दोनों सेनाओं में गतिरोध था और तनाव की स्थिति बनी हुई थी। इस वार्ता को दोनों देशों के बीच जल्द विवाद सुलझने का संकेत समझा जा रहा है।
लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बातचीत के पहले दोनों पक्षों में 12 राउंड स्थानीय कमांडर स्तर पर और तीन बार मेजर जनरल स्तर पर वार्ता हुई है। साथ ही कूटनीतिक स्तर पर भी बातचीत जारी है। 5 जून 2020 को संयुक्त सचिव स्तर की बातचीत में दोनो पक्षों ने मतभेद को विवाद में बदलने देने पर सहमति जताई थी।
क्यों है विवाद?
लद्दाख में फिंगर 4 और 8 के बीच चीन और भारत की सेना गश्त करती है।आम तौर पर भारतीय सेना फिंगर 8 तक गश्त करती है, और इसी रास्ते में चीनी सेना भी गश्ती करती है। लेकिन कई बार दोनों देशों की सेना की टुकड़ियां आमने-सामने होती हैं और इनके बीच झड़प हो जाती है।
कोरोना वायरस संकट को देखते हुए भारतीय सेना से कहा गया था कि वो अपनी गतिविधियों को सीमित रखे ताकि कोरोना का संक्रमण न फैले। लेकिन इसी का फायदा उठाते हुए चीन की सेना फिंगर 4 के पास आकर जम गई और यही पर विवाद शुरू हो गया है।
चीनी सेना भारतीय सेना के जवानों को फिंगर 4 से आगे जाने नहीं दे रहे हैं। भारत की मांग है कि चीनी सेना वापस चली जाए। यानी फिंगर 4 के पास दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है।
यह तनाव दोनों देशों की सीमा के स्पष्ट निर्धारित न होने के कारण उत्पन्न होता रहता है। इससे पहले 2017 में डोकलाम में भी दोनों देशों के बीच लंबे समय तक गतिरोध बना रहा था।
क्या है फिंगर्स?
लद्दाख में फिंगर 4 और फिंगर 8 को लेकर तनाव बना हुआ। आखिर ये फिंगर्स क्या हैं? दरअसल ये फिंगर्स पेंगोंग झील के उत्‍तरी किनारे पर बंजर पहाड़ियां हैं। इन्हें स्थानीय भाषा में छांग छेनमो कहते हैं। इन पहाड़ियों के उभरे हुए हिस्‍से को ही भारतीय सेना ‘फिंगर्स’ कहती है।
भारत का दावा है कि एलएसी की सीमा फिंगर 8 तक है.। लेकिन वह फिंगर 4 तक को ही नियंत्रित करती है। फिंगर 8 पर चीन का पोस्ट है। वहीं, चीन की सेना का मानना है कि फिंगर 2 तक एलएसी है।
2014 में चीन की सेना ने फिंगर 4 पर स्‍थाई निर्माण की कोशिश की थी, लेकिन भारत के विरोध पर इसे गिरा दिया गया था। मई 2020 में भारत और चीन के सैनिकों के बीच फिंगर 5 के इलाके में झगड़ा हुआ था। इसके बाद चीनी सेना ने भारतीय सैनिकों को फिंगर 4 से आगे बढ़ने से रोक दिया था।
क्या है एलएसी?
भारत और चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा पर वास्तविक नियंत्रण रेखा (Line of Actual Control) तीन सेक्‍टर्स में बंटी है। पहला अरुणाचल प्रदेश से लेकर सिक्किम तक का पूर्वी सेक्टर (Eastern Sector)। दूसरा, हिमाचल प्रदेश और उत्‍तराखंड का हिस्‍सा जो मध्य सेक्टर (Middle Sector ) कहलाता है। तीसरा है लद्दाख पश्चिमी सेक्टर( western Sector)। तीनों ही सेक्टर में अक्सर चीन घुसपैठ करता रहता है।
चीन पूर्वी सेक्टर में अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताते हुए अपना दावा करता है। चीन, तिब्बत और अरुणाचल प्रदेश के बीच की मैकमोहन रेखा को ये कहते हुए मानने से इनकार करता है कि 1914 में जब ब्रिटिश भारत और तिब्बत के प्रतिनिधियों ने समझौता किया था, तब वो वहां मौजूद नहीं था।
जबकि  भारत के ब्रिटिश शासकों ने तवांग और दक्षिणी हिस्से को भारत का हिस्सा माना और जिसे तिब्बतियों ने भी सहमति दी।चीनी प्रतिनिधियों ने इसे मानने से इनकार कर दिया।
चीन के मुताबिक तिब्बत पर उनका हिस्सा है इसलिए वो बिना उनकी सहमति के कोई फैसला नहीं ले सकते। चीन ने 1950 में तिब्बत पर पूरी तरह से अपने कब्जा जमा लिया।
नियंत्रण रेखा (Line Of Control)जो भारत और पाकिस्तान सीमा के नक़्शे पर चित्रित की गई है। जिसपर दोनों देशों की सेनाओं के दस्तख़त हैं और जिसे अंतर्राष्ट्रीय मान्यता हासिल है, के विपरीत चीन सीमा पर एलएसी बहुत अस्पष्ट है। दोनों देशों की सेनाएं एलएसी पर अपने-अपने हिस्‍से में लगातार गश्‍त करती रहती हैं।
इसके पैंगोंग झील पर अक्सर झड़प होती है। इस झील 45 किलोमीटर का पश्चिमी हिस्‍सा भारत के नियंत्रण में आता है जबकि बाकी चीन के हिस्‍से में है। पूर्वी लद्दाख एलएसी के पश्चिमी सेक्‍टर का निर्माण करता है जो कि काराकोरम पास से लेकर लद्दाख तक आता है। उत्‍तर में काराकोरम पास जो 18 किमी लंबा है, यहीं पर देश की सबसे ऊंची एयरफील्‍ड दौलत बेग ओल्‍डी है। अब काराकोरम सड़क के रास्‍ते दौलत बेग ओल्‍डी से जुड़ा है।

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