Follow Us On

भारत आठवीं वार बना संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अस्थाई सदस्य

भारत बुधवार को 8वीं बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (United Nations Security Council, UNSC) का अस्थाई सदस्य चुन लिया गया है। निर्विरोध चुने जाने के बाद अब भारत 2021-22 कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद अस्थाई सदस्य बन जाएगा।
193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अपने 75वें सत्र के लिए अध्यक्ष, सुरक्षा परिषद के अस्थाई सदस्यों और आर्थिक एवं सामाजिक परिषद के सदस्यों के लिए चुनाव कराया था। भारत के साथ-साथ आयरलैंड, मेक्सिको और नॉर्वे को भी सुरक्षा परिषद में चुना गया है।
2021-22 कार्यकाल के लिए भारत एशिया प्रशांत क्षेत्र ( Asia-Pacific Category) से उम्मीदवार था। भारत की जीत तय थी क्योंकि इस क्षेत्र से भारत इकलौता उम्मीदवार था। एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 55 सदस्यीय समूह ने भारत की सीट का एकमत से समर्थन किया।
उल्लेखनीय है कि सुरक्षा परिषद में अस्थाई सदस्य चुनने का उद्देश्य क्षेत्रीय संतुलन बनाना है। परिषद का सदस्य बनने के लिए उम्मीदवार देशों को दो तिहाई मतों की जरूरत होती है जो असेंबली में मौजूद सदस्य देशों का होता है। वोटिंग के लिए 192 सदस्य देश उपस्थित थे और दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। भारत को 184 वोट मिले।
भारत कब-कब अस्थाई सदस्य चुना गया?
भारत आठवीं बार सुरक्षा परिषद का अस्थाई सदस्य चुना जा रहा है। इसके पहले 1950-51, 1967-68, 1972-73, 1977-78, 1984-85, 1991-92 और 2011-12 में भारत यह जिम्मेदारी निभा चुका है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद संयुक्त राष्ट्र के छः प्रमुख अंगों में से एक अंग है, जिसका उत्तरदायित्व है अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना।
परिषद को अनिवार्य निर्णयों को घोषित करने का अधिकार भी है। ऐसे किसी निर्णय को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव कहा जाता है।
इसे विश्व का सिपाही भी कहते है क्योंकि वैश्विक शांति और सुरक्षा की जिममेदारी इसी के पास में है
सुरक्षा परिषद की संरचना
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 देश हैं। इनमें पांच स्थायी सदस्य हैं। ये हैं- अमेरिका, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन और चीन। इनको वीटो पावर दी गई है।
10 देशों को अस्थाई सदस्यता दी जाती है। हर साल पांच अस्थायी सदस्य चुने जाते हैं। अस्थाई सदस्यों का कार्यकाल दो साल होता है। इनको वीटो पावर नहीं दी जाती।
वीटो पावर का तात्पर्य यह है कि सुरक्षा परिषद के विचार हेतु लाए गए किसी महत्वपूर्ण मुद्दे पर यदि कोई वीटो पावर देश अपने इस अधिकार का उपयोग करता है तो उस प्रस्ताव पर फिर विचार नहीं किया जा सकता। चीन ने कई बार भारत के खिलाफ और पाकिस्तान के पक्ष में इसका उपयोग किया है
स्थाई सदस्यता के लिए भारत के प्रयास
यह एक विडंबना ही कही जाएगी कि विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र संयु्क्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य तक नहीं है। सुरक्षा परिषद में भारत की स्‍थायी सदस्‍यता के लिए सबसे बड़ा रोड़ा चीन है। चीन के पास में वीटो पावर है जिसका उपयोग वो हर बार करता आया है।
हालांकि संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में चीन को छोड़कर दूसरे देश भारत की स्‍थायी सदस्‍यता का समर्थन कई मंचों पर करते आए हैं, लेकिन कहीं न कहीं वे भी नहीं चाहते हैं कि इसके सदस्‍यों की संख्‍या बढ़े। इसका कारण वीटो पावर के रुप में मिले असाधारण विशेषाधिकार का बंटवारा ये ताकतवर मुल्क नहीं करना चाहते।
हाल के वर्षों में भारत सरकार ने विस्तारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के लिए स्थायी सदस्यता प्राप्त करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।
भारत का यह दृढ़ विश्वास है कि पुनर्गठित एवं विस्तारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक स्थायी सदस्य बनने हेतु उसके पास सभी योग्यताएं मौजूद हैं जो समकालीन वैश्विक वास्तविकताओं को व्यक्त करती हैं।
भारत सरकार ने अपने इस उद्देश्य को पाने के लिए संयुक्त राष्ट्र और साथ ही द्विपक्षीय स्तर पर अन्य देशों के साथ कई पहल की है।
कब हो सकता है भारत की उम्मीवारी पहर विचार?
बड़ी संख्या में देशों ने विस्तारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता हेतु भारत की उम्मीदवारी का समर्थन किया है। इसे द्विपक्षीय अंतर-सरकारी बैठकें एवं विचार-विमर्श सहित विभिन्न मंचों पर कहा भी गया है।
हालांकि, सुरक्षा परिषद में भारत की सदस्यता पर केवल तभी विचार किया जाएगा जब संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उपबंधों के अनुसार सुरक्षा परिषद के विस्तार के स्वरूप एवं इसकी सीमा पर कोई सहमति बन पाए जिसके लिए संयुक्त राष्ट्र के दो-तिहाई सदस्यों का अनुमोदन जरुरी होता है।
अंतर- सरकारी बातचीत जारी
भारत संयुक्त राष्ट्र में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सुधार के संबंध में चल रही अंतर- सरकारी बातचीत में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहा है।
भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार हेतु परिषद के सदस्य राष्ट्रों का समर्थन जुटाने के लिए जी-4 समूह (भारत, जापान, ब्राजील तथा जर्मनी) और एल.69 समूह (एशिया, अफ्रीका तथा लातिन अमरीका के विकासशील देशों का अंतरक्षेत्रीय समूह) में अपनी सदस्यता के जरिए अन्य सुधार चाहने वाले देशों के साथ मिलकर कार्य कर रहा है।
कॉफी क्लब भी है सुरक्षा परिषद के विस्तार में बाधक
“यूनाइटेड फॉर कंसेंसस (कॉफी क्लब)” भी है UNSC के सुधार में बाधक
ये ऐसे देश हैं जो अपने पड़ोसी देशों को सुरक्षा परिषद् में शामिल नहीं होने देना चाहते हैं।
इस अनौपचारिक समूह को यूनाइटेड फॉर कंसेंसस और कॉफी क्लब कहा जाता है। इस समूह में क़रीब 40 से अधिक देश हैं जो अपने हितों के लिए अपने पड़ोसी मुल्क़ को सुरक्षा परिषद् में शामिल नहीं होने देना चाहते हैं।
इस समूह में पाकिस्तान (भारत की सदस्यता का विरोधी), इटली (जर्मनी का विरोधी), मैक्सिको और अर्जेंटीना (ब्राज़ील के विरोधी), कोरिया गणतंत्र (जापान का विरोधी), मिस्र (अफ़्रीका को दी जाने वाली दो सीटों में से एक का इच्छुक) और इसी तरह के कई अन्य देश हैं।

Related Posts

Leave a Reply