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भारत-चीन: पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत-चीन के शीर्ष सैन्य अधिकारियों की वार्ता

चर्चा में क्यों?

  • पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन की ओर मोल्डो में 22 जून 2020 को हुई भारत-चीन के शीर्ष सैन्य अधिकारियों के बीच बातचीत सकारात्मक रही है। इसके बाद दोनों देशों की सेनाओं ने पूर्वी लद्दाख से पीछे हटने पर सहमति जताई है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • भारतीय सेना के अनुसार ‘कॉर्प्स कमांडर स्तर की वार्ता भारत-चीन के बीच वार्ता सौहार्दपूर्ण, सकारात्मक और रचनात्मक माहौल संपन्न हुई। दोनों देशों की सेनाओं ने सहमति जताई है कि वे पीछे हटेंगी।’
  • वार्ता के दौरान भारत ने चीनी सैनिकों से उसी स्थान पर वापस जाने को कहा, जहां पर वे अप्रैल महीने की शुरुआत में थे।
  • बातचीत का उद्देश्य फिंगर एरिया, गोगरा पोस्ट-हॉट स्प्रिंग्स और गलवान घाटी में पहले की यथास्थिति को बहाल करना था।

गलवान घाटी में हिंसक झड़प के बाद और बढ़ गया था तनाव

  • लद्दाख की गलवान घाटी में 15 जून 2020 को भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक टकराव हो गया था, जिसके बाद सीमा पर तनाव में बढ़ोतरी हुई थी।
  • इस झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे और चीन के भी जवान मारे गए थे जिनमें चीन का कमांडर भी शामिल था।
  • इसके बाद से ही दोनों देशों के बीच लगातार तनाव कम करने को लेकर एलएसी पर बातचीत का दौर जारी था।

भारत-चीन विवाद की शुरुआत

  • भारत-चीन सीमा वर्ता विवाद की शुरुआत अप्रैल 2020 के तीसरे हफ़्ते में हुई थी, जब लद्दाख बॉर्डर यानी लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर चीन की तरफ़ सैनिक टुकड़ियों और भारी ट्रकों की संख्या का जमावड़ा दिखा था।
  • इसके बाद से मई महीने में सीमा पर चीनी सैनिकों की गतिविधियाँ रिपोर्ट की गई हैं. चीनी सैनिकों को लद्दाख में सीमा का निर्धारण करने वाली झील में भी गश्त करते देखे जाने की बातें सामने आई थीं।

गालवन घाटी में हिंसक संघर्ष का कारण

  • गालवन घाटी विवादित क्षेत्र अक्साई चिन क्षेत्र में लद्दाख और अक्साई चिन के बीच भारत-चीन सीमा के नज़दीक स्थित है, यहां पर वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) अक्साई चिन को भारत से अलग करती है।
  • अक्साई चिन पर भारत का क्षेत्र है जिस पर चीन का कब्जा है। गालवान घाटी चीन के दक्षिणी शिनजियांग और भारत के लद्दाख तक फैली है।
  • यह क्षेत्र भारत के लिए सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये पाकिस्तान, चीन के शिनजियांग और लद्दाख की सीमा के साथ लगा हुआ है।
  • 1962 की जंग के दौरान भी गालवन नदी का यह क्षेत्र युद्ध का प्रमुख केंद्र रहा था । इस घाटी के दोनों तरफ के पहाड़ रणनीतिक रूप से सेना को लाभ देते हैं।
  • चीन यहां पहले ही सैन्य संरचनाओं का विकास कर चुका है और अब वह इसी स्थिति बनाए रखने की बात करता है।
  • वहीं, अपनी सामरिक स्थिति मजबूत करने के लिए अब भारत भी वहां पर निर्माण करना चाहता है। इसी को लेकर चीन आशंकित है।

DSDBO रोड से चिंचित है चीन

  • गालवन घाटी में सेना द्वारा बनाई जा रही दारबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी रोड (DSDBO रोड) भारत को इस पूरे इलाके में बढ़त देगी। यह रोड काराकोरम पास के नजदीक तैनात जवानों तक रसद पहुंचाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
  • लगभग 255 किमी. लंबी यह सड़क दारबुक (Darbuk)से लद्दाख अंतिम भारतीय ग्राम श्योक (Shyok)तक जाती है।
  • बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (BRO)को उम्मीद है कि इस साल के अंत तक 255 किलोमीटर लंबे इस सड़क का निर्माण संपन्न कर लिया जाएगा।

इसलिए महत्वपूर्ण है यह सड़क

  • इस सड़क के बन जाने से लेह और दौलत बेग ओल्डी के बीच की दूरी महज छह घंटे में पूरी हो सकती है।
  • उल्लेखनीय है कि दौलत बेग ओल्डी लद्दाख में भारतीय क्षेत्र का सबसे उत्तरी सीमांत इलाका है, जिसे सेना के बीच सब-सेक्टर नॉर्थ (Sub-Sector North) के नाम से जाना जाता है।
  • यह सड़क भारत-चीन LAC के लगभग समानांतर लेह को काराकोरम दर्रे से जोड़ती है तथा चीन के शिनजियांग (Xinjiang) प्रांत से लद्दाख को अलग करती है।

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