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रेमेडिसविर का COVID-19 के उपचार के लिए आपातकालीन उपयोग स्वीकृत

केंद्रीय दवा नियामक प्राधिकरण (Central Drugs Standard Control Organisation(CDSCO) ने कोरोनावायरस COVID-19 के उपचार में प्रभावी पाई गई दवा रेमेडिसविर (Remdesivir) को देश में आपातकालीन उपयोग की स्वीकृति प्रदान कर दी है।
इस फैसले के बाद अब अस्पतालों में डॉक्टर कोरोना मरीजों के उपचार में इस दवा का उपयोग कोरोनायरस के उपचार के लिए कर सकेंगे। यह दवा एक इंजेक्शन के रूप में होगी, जिसे दस दिन तक कोविड मरीजों को दिया जा सकेगा।
अमेरिकी ड्रग प्रशासन ने भी इसे मई 2020 में आपातकालीन उपचार में मंजूरी दी है जबकि पूर्व में जापान समेत कई अन्य देश भी मंजूरी प्रदान कर चुके हैं। मूलत: यह दवा इबोला (Ebola Virus ) के उपचार के लिए बनाई गई थी।
चूंकि इस दवा को देश में बेचने से पूर्व क्लिनिकल ट्रायल नहीं करने होंगे, इसलिए यह दवा शीघ्र ही देश में उपलब्ध हो जाएगी। उल्लेखनीय है कि जब आपातकालीन उपयोग के लिए किसी दवा को स्वीकृति दी जाती है तो क्लिनिकल ट्रायल की आवश्यकता नहीं होती है।
रेमेडिसविर दवा का निर्माण अमेरिका की कंपनी गेलर्ड साइंसेज (Gilead Sciences) ने किया है। गेलर्ड साइंसेज ने देश में इसका पेटेंट भी फाइल किया है। उसने दवा के निर्माण व वितरण के लिए तीन भारतीय कंपनियों के साथ समझौता किया है लेकिन जब तक देश में इसका निर्माण नहीं हो जाता है, वे बाहर से मंगाकर इसे बेच सकती हैं।
भारतीय कंपनियां भी कर रही हैं अनुसंधान
रेमेडिसविर को देश में विकसित करने के लिए सिप्ला, ग्लेनमार्क और डॉ रेड्डीज सहित प्रमुख फार्मा कंपनियां काम कर रही हैं। यह दवा 2035 तक पेटेंट संरक्षण के अधीन है। हलांकि भारतीय कंपनियों को उम्मीद है कि यूएस-आधारित गेलर्ड साइंसेज, जो दवा के पेटेंट की मालिक है, उन्हें लाइसेंसिंग प्रावधान देगी, जैसे कि 2014 में हेपेटाइटिस सी ड्रग सोवलाडी के साथ किया था, जिससे उत्पादन शुरू हो सका था।
उल्लेखनीय है कि ‘बोलर प्रोविज़न (Bolar Provision) के अनुसार कंपनियों को अनुसंधान और विकास के उद्देश्यों के लिए दवा तैयार करने की अनुमति है। बोलर प्रोविजन पेटेंट उल्लंघन के खिलाफ बचाव करता है। यह जेनेरिक दवा निर्माताओं को एक दवा विकसित करने, उस पर अनुसंधान करने की अनुमति देता है, लेकिन वे केवल इनोवेटर कंपनी के पेटेंट की समाप्ति के बाद इसे बाजार में लॉन्च कर सकते हैं।
इस प्रावधान का उपयोग करते हुए, कंपनियां मूल पेटेंट की समय सीमा समाप्त होने से कई साल पहले जेनेरिक दवा को अप्रूवल के लिए मंजूरी देती हैं।

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