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COVID-19 संकट से निपटने को 75 लाख करोड़ रुपये का फंड बनाएगा IMF

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund, IMF) का मानना है कि कोरोना वायरस महामारी के कारण विश्व की सबसे बड़ी मंदी की शुरुआत हो चुकी है। आइएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टीना जॉर्जिवा के मुताबिक ऐसे हालात पहले कभी नहीं देखे गए जब इतने बड़े पैमाने पर औद्योगिक कल-कारखाने बंद हुए हों।
यह वर्ष 2008 की वैश्विक मंदी से भी ज्यादा गंभीर हालात हैं। आइएमएफ ने कहा है कि उसने विभिन्न देशों की मदद के लिए एक लाख करोड़ डॉलर यानी करीब 75 लाख करोड़ रुपये का फंड बनाया है। इसका उपयोग विभिन्न देशों को आपातकालीन हालात में वित्तीय मदद के लिए जाएगा।
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष

  • अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund- IMF) एक अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्था है जो अपने सदस्य देशों को आर्थिक एवं तकनीकी सहायता प्रदान करने के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय विनिमय दरों को स्थिर रखने तथा आर्थिक विकास को सुगम बनाने में भी सहायता प्रदान करती है।
  • इसकी स्थापना अंतर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण और विकास बैंक (International Bank for Reconstruction and Development-IBRD)के साथ वर्ष 1944 में अमेरिका के न्यू हैम्पशायर में ब्रेटन वुड्स सम्मेलन (Bretton Woods Conference) के दौरान हुई थी।
  • ब्रेटन वुड्स सम्मेलन को आधिकारिक तौर पर संयुक्त राष्ट्र मौद्रिक और वित्तीय सम्मेलन (United Nations Monetary and Financial Conference) के रूप में जाना जाता है।
  • IMF का मुख्यालय वाशिंगटन डी.सी. संयुक्त राज्य अमेरिका में है।
  • IMF की विशेष मुद्रा SDR (Special Drawing Rights) कहलाती है।
  • IMF का उद्देश्य आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करना, आर्थिक प्रगति को बढ़ावा देना, गरीबी को कम करना, रोज़गार के नए अवसरों का सृजन करने के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को सुविधाजनक बनाना है।

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