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रिटर्न भरने में राहत के लिए सरकार लाई अध्यादेश

कोरोना वायरस के कारण बनी आपात स्थिति में आयकर, जीएसटी, कस्टम व सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी रिटर्न भरने में राहत के लिए सरकार अध्यादेश लाई है। कराधान एवं अन्य कानून (कुछ प्रावधानों में छूट) अध्यादेश, 2020 को राष्ट्रपति की भी मंजूरी मिल गई है। इसमें पीएम केयर्स फंड में 30 जून तक दिए जाने वाले दान को 100 प्रतिशत करमुक्त करने का भी प्रावधान जोड़ा गया है।
अध्यादेश से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदु

  • सरकार ने उस सीमा से भी छूट दे दी है, जिसके तहत अधिकतम छूट सकल आय के 10 फीसद से ज्यादा नहीं हो सकती है। सरकार ने वित्त वर्ष 2018-19 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न भरने और आधार-पैन को लिंक करने की अंतिम तारीख 30 जून, 2020 कर दी है। मार्च, अप्रैल एवं मई में भरे जाने वाले सेंट्रल एक्साइज रिटर्न की तारीख भी 30 जून कर दी है।
  • सरकार ने विभिन्न प्रत्यक्ष करों एवं बेनामी कानून के तहत नोटिस जारी करने की तारीख और विवाद से विश्वास स्कीम की तारीख भी 30 जून तक के लिए बढ़ा दी है। जीएसटी रिटर्न भरने में भी छूट दी गई है।
  • आयकर कानून अध्याय छह ए-बी के तहत धारा 80C, 80D, 80G जिनके तहत क्रमश: बीमा पॉलिसी, पीपीएफ, NSC आदि, चिकित्सा बीमा प्रीमियम और दान, भुगतान पर कर कटौती दी जाती है ऐसे निवेशों के लिये भी समयसीमा को 30 जून 2020 तक बढ़ाया गया है। यानी 2019- 20 के दौरान इनकम टैक्‍स में छूट पाने के लिए अब इनमें 30 जून तक निवेश किया जा सकेगा।
  • अध्यादेश के जरिये मार्च, अप्रैल और मई में दी जाने वाली केन्द्रीय उत्पाद शुल्क की रिटर्न को भी अब 30 जून 2020 तक भरा जा सकेगा।

राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति

  • संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत राष्ट्रपति के पास संसद के सत्र में न होने की स्थिति में अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्राप्त है।
  • अध्यादेश की शक्ति संसद द्वारा बनाए गए कानून के बराबर ही होती है और यह तत्काल लागू हो जाता है।
  • अध्यादेश के अधिसूचित होने के बाद इसे संसद पुनः बैठक के 6 सप्ताह के भीतर संसद द्वारा अनुमोदित किया जाना आवश्यक है।
  • संसद या तो इस अध्यादेश को पारित कर सकती है या इसे अस्वीकार कर सकती है अन्यथा 6 सप्ताह की अवधि बीत जाने पर अध्यादेश प्रभावहीन हो जाएगा।
  • चूँकि सदन के दो सत्रों के बीच अधिकतम अंतराल 6 महीने का हो सकता है, इसलिये अध्यादेश का अधिकतम 6 महीने और 6 सप्ताह तक लागू रह सकता है। इसके अलावा राष्ट्रपति कभी भी अध्यादेश को वापस ले सकता है।

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