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सरकार ने मलेरिया रोधी दवा हाइड्रो क्लोरोक्विन के निर्यात रोक लगाई

केन्द्र सरकार ने नॉवल कोरोनावायरस (COVID-19) के प्रकोप को ध्यान में रखते हुए मलेरियारोधी दवा हाइड्रोक्सिक्लोरोक्विन (Hydroxychloroquine) के निर्यात रोक लगा दी है। स्थानीय बाजार में दवा की निर्बाध आपूर्ति को ध्यान में रखते हु्ए ऐसा किया गया है। हालांकि विदेश मंत्रालय की सिफारिश पर मानवीय आधार पर दवा का निर्यात किया जा सकता है।इससे पहले, भारतीय औषधि अनुसंधान परिषद (ICMR) ने स्वास्थ्यकर्मियों को कोरोना वायरस के संदिग्ध और पॉजिटिव मरीजों को हाइड्रो क्लोरोक्विन देने की सिफारिश की थी।
अमेरिकी सरकार ने भी इसके कोरोना के लिए इस्तेमाल करने की मंजूरी भी दे दी है। भारत में भी जयपुर के सवाई मान सिंह अस्पताल में इटली के कोरोना वायरस पीड़ित नागरिक के इलाज में एड्स की दवाओं के साथ-साथ क्लोरोक्वीन का इस्तेमाल किया गया था।
दरअसल, कोविड-19 भी सार्स की तरह कोरोना फैमली का एक वायरस है। कोविड-19 वायरस का वैज्ञानिक नाम SARS-CoV-2 है। इसीलिए इसे न्यू कोरोना वायरस (New Coronavirus) भी कहा जाता है। 2002 में सार्स वायरस के 23 देशों में फैलने के बाद इसको लेकर दुनियाभर में शोध किए गए। इन शोधों के दौरान ही पता चला कि सार्स वायरस को रोकने में क्लोरोक्वीन काफी हद तक कारगर है।
ऐसे काम करती है हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन
शोध में सामने आया कि क्लोरोक्वीन मानव शरीर के भीतर कोशिका के ऊपर एक परत बना देता है। इस परत के कारण वायरस मानव कोशिका से जुड़ नहीं पाता है। परिणाम यह होता है कि वायरस को पनपने और कई गुना बढ़ने के लिए कोशिका से जरूरी प्रोटीन नहीं मिल पाता। इस कारण वायरस का प्रभाव सीमित हो जाता है।चूंकि कोविड-19 की कोई निश्चित दवा नहीं है, इसीलिए इससे पीड़ित मरीजों के इलाज के कई दवाओं का एक साथ प्रयोग किया जाने लगा।
सार्स वायरस के खिलाफ क्लोरोक्वीन के कारगर होने के कारण कोविड-19 के इलाज में इसे भी शामिल किया गया। लेकिन अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि यह क्लोरोक्वीन कोविड-19 वायरस से ग्रसित होने के पहले काम करता है या फिर उसके बाद भी काम करता है। इसे लेकर अमेरिका से लेकर यूरोप तक में जांच शुरू हो गई है।
ध्यान देने की बात यह है कि क्लोरोक्वीन केवल कोरोना वायरस के खिलाफ कारगर साबित नहीं हो रही है। दूसरी बीमारियों के इलाज में यह कारगर साबित हो चुकी है। आर्थराइटिस और लीवर की एक प्रकार की बीमारी के इलाज में भी इसका इस्तेमाल लंबे समय से हो रहा है।

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