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कोरोनावायरस संकट पर G -20 देशों का वर्चुअल सम्मेलन

G- 20 समूह के राष्ट्रीय नेताओं द्वारा 26 मार्च 2020 को COVID-19 महामारी से उत्पन्न संकट से निपटने के लिए विचार विमर्श हेतु एक वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से वर्चुअल  सम्मेलन आयोजित किया ।  इस आपातकालीन आभासी सम्मेलन (Virtual Summit) की अध्यक्षता सऊदी अरब के सुलतान सलमान बिन अब्दुल अजीज अल साऊद ने की। उल्लेखनीय है कि सऊदी अरब वर्तमान में (वर्ष 2020 के लिये) इस जी 20 का अध्यक्ष (G- 20 प्रेसीडेंसी) भी है।
 ये निर्णय लिए गए शिखर सम्मेलन में
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुझाव पर यह आपात बैठक बुलाई गई थी। इस संम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में अमेरिका, चीन जैसे देशों के राष्ट्राध्यक्षों से कहा कि हमें इस वक्त आर्थिक लक्ष्यों की बजाय इंसानियत पर फोकस करना चाहिए। कोरोना ने हम सभी को एक अवसर दिया है, जिसमें हम ग्लोबलाइजेशन के नए कंसेप्ट की ओर देख सकते हैं। समिट के दौरान जी-20 देशों ने कोरोना संकट से निपटने के लिए वैश्विक अर्थव्यवस्था में 5 लाख करोड़ डॉल का निवेश का फैसला लिया है।
सऊदी अरब के शाह सलमान ने गुरुवार को समूह- 20 के नेताओं से आग्रह किया कि वे कोरोना वायरस महामारी से उत्पन्न वैश्विक संकट से निपटने के लिए “प्रभावी और समन्वित” कार्रवाई करें। इसके साथ ही उन्होंने विकासशील देशों की मदद करने का भी आह्वान किया। शाह समूह- 20 के नेताओं की हुई आकस्मिक ऑनलाइन बैठक को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने अपने आरंभिक संबोधन में कहा कि हमें इस वैश्विक महामारी के मद्देनजर प्रभावी और समन्वित कार्रवाई करनी होगी तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था में विश्वास बहाल करना होगा। उन्होंने कहा कि यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम विकासशील देशों और कम विकसित देशों की मदद के लिए हाथ बढ़ाएं ताकि उनकी क्षमताओं का निर्माण हो सके और वे इस संकट और इसके नतीजों का मुकाबला करने के लिए अपने बुनियादी ढांचे को बेहतर बना सकें। वहीं, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कोरोना वायरस को लेकर जी-20 देशों की वार्ता में शुल्क कटौती का आह्वान किया।
सम्मेलन में शामिल होने वाले प्रमुख समूह व देश:
इस G- 20 सम्मेलन में सदस्य राष्ट्रों के अलावा आमंत्रित देश-स्पेन, जॉर्डन, सिंगापुर एवं स्विट्जरलैंड, के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय संगठन– संयुक्त राष्ट्र संघ (United Nations), विश्व बैंक समूह (World Bank Group), विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation), विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organisation), खाद्य एवं कृषि संगठन (Food and Agriculture Organisation), अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund) और आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (Organisation for Economic Cooperation and Development) के नेता शामिल हुए।
2022 में जी-20 देशों का नेतृत्व करेगा भारत
2022 में जी-20 देशों की अगुआई करने की जिम्मेदारी भारत के पास आ जाएगी। ऐसे में अभी कोरोनावायरस की चुनौतियों को लेकर जो फैसला किया जाएगा, उन्हें आगे लागू करने में भारत को भी अहम जिम्मेदारी निभानी होगी। जी-20 में दुनिया के सबसे प्रभावशाली 20 देश शामिल हैं।
G- 20 समूह:
वर्ष 1997 के वित्तीय संकट के पश्चात् यह निर्णय लिया गया कि दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं को एक मंच पर एकत्रित होना चाहिये।
G-20 समूह की स्थापना वर्ष 1999 में 7 देशों-अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान, फ्राँस और इटली के विदेश मंत्रियों द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य वैश्विक वित्त को प्रबंधित करना है।
सदस्य देश:
इस फोरम में भारत समेत 19 देश तथा यूरोपीय संघ भी शामिल है। जिनमें अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील, कनाडा, चीन, यूरोपियन यूनियन, फ्राँस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं।G- 20 एक मंच के रूप में कार्य करता है न कि एक संगठन के रूप में, अत: इसका कोई स्थायी सचिवालय और प्रशासनिक संरचना नहीं है।
 

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