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चेरनोबिल के जंगलों में लगी आग दुर्घनाग्रस्त परमाणु संयंत्रों के करीब पहुंची

यूक्रेन में चेरनोबिल के जंगलों में लगी आग दुर्घनाग्रस्त परमाणु संयंत्रों के करीब पहुंच गई है। आग बुझाने में करीब 400 दमकलकर्मी पिछले दो सप्ताह जुटे हैं। चेरनोबिल में अप्रैल 1986 में भीषण परमाणु हादसा हुआ था। जिसके बाद इस क्षेत्र को खतरनाक घोषित कर दिया गया है। आग इन संयंत्रों तक पहुंचती है तो बड़ी मात्र में विकिरण होने का खतरा है।
चेरनोबिल हादसा
26 अप्रैल, 1986 के दिन चेरनोबिल परमाणु संयंत्र में इतिहास का सबसे भयंकर हादसा हुआ था। 32 लोगों की तो तुरंत मौत हो गई थी और दर्जनों आदमी पहले दिन रेडिएशन की वजह से बुरी तरह जल गए थे। सोवियत संघ ने शुरू में तो इस घटना को छिपा लिया था लेकिन स्वीडिश अथॉरिटीज की रिपोर्ट के बाद स्वीकारा कि ऐसी दुर्घटना हुई थी।
कहां था चेरनोबिल स्टेशन
चेरनोबिल पावर स्टेशन यूक्रेन की राजधानी कीव से करीब 130 किलोमीटर उत्तर में प्रिपयेट शहर में था। उस समय यूक्रेन सोवियत संघ का हिस्सा होता था जो सोवियत संघ के विघटन के बाद स्वतंत्र हो गया था। यह बेलारूस की सीमा से करीब 20 किलोमीटर दक्षिण में था। चर्नोबिल पावर स्टेशन में चार न्यूक्लियर रिऐक्टर्स थे। दुर्घटना के समय दो रिऐक्टर्स पर काम चल रहा था। संयंत्र के दक्षिण पूर्व की ओर प्रिपयेट नदी के पास एक कृत्रिम झील बनाई गई थी। प्लांट को ठंडा पानी मुहैया कराने के लिए इस झील को बनाया गया था। यूक्रन के इस हिस्से में आबादी बहुत कम थी। रिऐक्टर से करीब 3 किलोमीटर की दूरी पर नया बसा शहर प्रिपयेट था। वहां करीब 49,000 लोग रहते थे। चर्नोबिल के पुराने शहर में 12,500 लोग रहते थे। पावर प्लांट के 30 किलोमीटर के अंदर दुर्घटना के समय कुल जनसंख्या करीब 1.5 लाख थी।
नुकसान
शुरू में तो चेरनोबिल में 32 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों लोग रेडिएशन की वजह से बुरी तरह से जल गए। सोवियत वैज्ञानिकों का मानना है कि संयंत्र में मौजूद 190 टन यूरेनियम डायऑक्साईड का चार प्रतिशत हिस्सा हवा में फैल गया। यह रेडिएशन यानी रेडियोधर्मी तत्व आसपास के पूरे माहौल में फैल गया। हिरोशिमा और नागासाकी पर गिराए गए परमाणु बम से जितना रेडिएशन नहीं पैदा हुआ था, उससे कई गुना ज्यादा इसमें पैदा हुआ था। हवा के साथ रेडियोधर्मी तत्व उत्तरी और पूर्वी यूरोप में फैल गए। इस रेडिएशन से होने वाले कैंसर से बाद में सोवियत संघ के करीब 5,000 नागरिकों की मौत हो गई थी। लाखों लोगों का स्वास्थ्य बुरी तरह प्रभावित हुआ था। साल 2000 में चर्नोबिल में आखिरी काम कर रहे रिऐक्टर्स को भी बंद कर दिया गया।

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