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मध्यम उद्यमों को दिए जाने वाले ऋणों को एक्‍सटर्नल बेंचमार्क से जोड़ने का निर्देश

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सभी बैंकों को फ्लोटिंग दर (Floating rate) पर मध्यम उद्यमों को दिए जाने वाले ऋणों को एक्‍सटर्नल बेंचमार्क से जोड़ने का निर्देश दिया  है। यह निर्देश एक अप्रैल 2020 से प्रभावी होगा। सूक्ष्‍म और लघु उद्यमों के लिए फ्लोटिंग ऋण दरें पहले से ही एक्‍सटर्नल बेंचमार्क दरों से जुड़ीं हैं। इस निर्णय का उद्देश्‍य मौद्रिक नीति प्रभाव का हस्‍तांतरण और सशक्‍त बनाना है ताकि प्रमुख ऋण दरों में कटौती का लाभ मझौले उद्यमों को मिल सके। रिजर्व बैंक के अनुसार उन क्षेत्रों में मौद्रिक नीति हस्‍तांतरण में सुधार हुआ है जहां फ्लोटिंग दर पर नए ऋणों को एक्‍सटर्नल बेंचमार्क से जोड़ा गया है।
क्या है फ्लोटिंग दर ?
फिक्स ब्याज दर में जहां एक तय ब्याज दर होती है, वहीं फ्लोटिंग दर के तहत ब्याज दर बदला करती है। कभी यह फिक्स्ड दर से 1-3 प्रतिशत तक कम रहती है, तो कभी इससे ज्यादा भी हो सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि फ्लोटिंग दर बाजार पर निर्भर करती है। हालांकि यह फिक्स्ड ब्याज दर से काफी सस्ती होती है।
एक्सटर्नल बेंचमार्क रेट क्या है?
बेंचमार्क दर वह न्‍यूनतम दर है जिस पर बैंक ऋण दे सकते हैं। वाणिज्यिक बैंक इसके लिए चार एक्सटर्नल बेंचमार्क- रेपो रेट, तीन महीने का ट्रेजरी बिल यील्ड (Yield), छह महीने का ट्रेजरी बिल यील्ड (Yield) या फाइनेंशियल बेंचमार्क इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (Financial Benchmarks India Private Ltd) द्वारा जारी किसी एक बेंचमार्क को चुन सकते हैं।
एक बैंक को एक से अधिक बेंचमार्क अपनाने की अनुमति नहीं है, साथ ही एक्सटर्नल बेंचमार्क के तहत ब्याज दर प्रत्येक तीन महीने में कम-से-कम एक बार पुनः निर्धारित किया जाएगा।
भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India- RBI) ने 1 अक्तूबर, 2019 से सभी बैंकों के लिये नए फ्लोटिंग रेट (Floating Rate) लोन (व्यक्तिगत/खुदरा ऋण और MSME हेतु ऋण) को एक एक्सटर्नल बेंचमार्क रेट (External Benchmark Rates) से जोड़ना अनिवार्य कर दिया है।
 

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