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लॉकडाउन के बीच मनाया गया अर्थ आवर

कोरोनावायरस के लॉकडाउन के बीच 28 मार्च 2020 को रात 8:30 बजे दुनियाभर में अर्थ आवर (Earth Hour) मनाया गया। इस दौरान ऊर्जा की बचत कर धरती को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से लोग अपने घरों की गैर जरूरी लाइट्स और बिजली से चलने वाले उपकरण बंद रखे। 2020 में अर्थ आवर का यह 14 वां संस्करण था और इसकी थीम ‘जलवायु परिवर्तन को थामने के कदम और सतत विकास'(Earth Hour is Climate Change and sustainable development) है। अर्थ आवर डे की शुरुआत वन्यजीव एवं पर्यावरण संगठन ‘वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (wwf)’ ने 2007 में की थी।
पहली बार इसे साल 2007 में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में मनाया गया। इसमें लोगों से 60 मिनट के लिए सारी लाइटें बंद करने की अपील की गई थी। धीरे-धीरे इसे विश्वभर में मनाया जाने लगा। आज यह एक आंदोलन बन चुका है। 2019 में ‘अर्थ ऑवर’ की थीम ‘जीने का तरीका बदलो’ था। इसमें 187 देशों के सात हजार से ज्यादा शहरों ने हिस्सा लिया था।
इस अवसर पर वन्यजीव एवं पर्यावरण संगठन ने अपने संदेश में कहा है कि, इस समय दुनिया बहुत बड़ी मुश्किल से घिरी है, लेकिन हम ऐसे ही तरीकों से खुद को जोड़कर प्रेरित कर सकते हैं और चीजों को बदल सकते हैं। आइए हमारे साथ इस #EarthHour में शामिल हो जाइए क्योंकि दुनिया की एकजुटता को दिखाने के लिए करोड़ों लोग घरों में बंद हैं। इस मौके पर हम उनके साथ अपना समर्थन दिखाएं और शनिवार रात 8.30 बजे अपनी लाइट बंद करें और हमारे ग्रह पर अपनी आवाज़ बुलंद करें।
प्रकृति के संरक्षण हेतु विश्वव्यापी कोष
WWF (Worldwide Fund for Nature-WWF) का गठन वर्ष 1961 में हुआ तथा यह पर्यावरण के संरक्षण, अनुसंधान एवं रख-रखाव संबंधी विषयों पर कार्य करता है।
इससे पूर्व इसका नाम विश्व वन्यजीव कोष (World Wildlife Fund) था।
इसका उद्देश्य पृथ्वी के पर्यावरण के क्षरण को रोकना और एक ऐसे भविष्य का निर्माण करना है जिसमें मनुष्य प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर सके।
WWF द्वारा लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट (Living Planet Report), लिविंग प्लैनेट इंडेक्स (Living Planet Index) तथा इकोलॉजिकल फुटप्रिंट कैलकुलेशन (Ecological Footprint Calculation) प्रकाशित की जाती है।
इसका मुख्यालय ग्लैंड (स्विट्ज़रलैंड) में है।

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