Follow Us On

कोरोनावायरस संक्रमितों का इलाज कर रहे चिकित्सा पेशेवरों की सुरक्षा के लिए DRDO ने बनाया ‘बायो सूट’

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (Defence Research and Development Organisation – DRDO) ने कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों का इलाज कर रहे डॉक्टरों सहित चिकित्सा पेशेवरों की सुरक्षा के लिए ‘बायो सूट’(Bio Suit) विकसित किया है। डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं में कार्यरत वैज्ञानिकों ने वस्त्र, परत और नैनोटेक्नोलॉजी (Nanotechnology)में अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल कर पीपीई (Personal Protective Equipment (PPE) विकसित किया है जिसमें विशेष परत के साथ खास तरह के रेशों का इस्तेमाल किया गया है। सूट को वस्त्र उद्योग की मदद से विभिन्न कसौटियों पर परखने के बाद तैयार किया गया है और इससे साथ ही कृत्रिम खून से रक्षा का परीक्षण भी किया गया है।
डीआरडीओ बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन शुरू करने की कोशिश कर रहा है ताकि कोरोना वायरस के संक्रमितों का इलाज कर रहे डॉक्टरों और पैरामेडिक कर्मियों की पीपीई के लिए भारी मांग के अनुपात में इसकी आपूर्ति की जा सके। अब तक डीआरडीओ और अन्य उद्योगों की साझेदारी में बायो सूट बनाने का काम ‘ सीम सीलिंग टेप’ (Seam Sealing Tapes) (जो आद्र कण को अंदर आने से रोकने के लिए लगाया जाता है) की अनुपलब्धता की वजह से बाधित हुआ। इसके बाद डीआरडीओ ने पनडुब्बी को जलरोधी बनाने में इस्तेमाल द्रव के आधार पर तैयार द्रव का इस्तेमाल सीम सीलिंग टेप की जगह बायो सूट में किया।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO)
डीआरडीओ की स्थापना 1958 में रक्षा विज्ञान संगठन (Defence Science Organisation- DSO) के साथ भारतीय सेना के तकनीकी विकास प्रतिष्ठान (Technical Development Establishment- TDEs) और तकनीकी विकास और उत्पादन निदेशालय (Directorate of Technical Development & Production- DTDP) के संयोजन के बाद किया गया।DRDO रक्षा मंत्रालय के रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग के तहत काम करता है। इसके वर्तमान अध्यक्ष जी सथीश रेड्डी हैं।

Leave a Reply