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दक्षिण चीन सागर पर चीन और अमेरिका में विवाद गहराया

चर्चा में क्यों?

  • अमरीका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने अब पहली बार स्पष्ट रुप से यह कहा है कि ‘दक्षिण चीन सागर में चीन के क्षेत्रीय दावे पूरी तरह ग़ैर-क़ानूनी हैं।’

महत्वपूर्ण बिंदु

  • उल्लेखनीय है कि दक्षिण चीन सागर पोत परिवहन का एक महत्वपूर्ण रूट रहा है, जिसे लेकर बीते कई वर्षों से विवाद की स्थिति बनी हुई है।
  • इंडोनेशिया और वियतनाम के बीच पड़ने वाला प्रशांत महासागर का ये हिस्सा क़रीब 35 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है जिस पर चीन, फ़िलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ताइवान और ब्रूनेई अपना दावा करते रहे हैं।
  • हाल के वर्षों में चीन ने इस बात पर और अधिक ज़ोर देना शुरू किया है कि इस इलाक़े पर उसी का दावा है क्योंकि वो इस क्षेत्र में सदियों से है।
  • नाइन-डैश-लाइन (nine dash line) के नाम से पहचाने जाने वाले इलाक़े पर चीन ने अपने दावे को मज़बूती देने के लिए दक्षिण चीन सागर में अपनी सैन्य उपस्थिति को बढ़ा रहा है।
  • अमरीकी पैसिफ़िक कमांड के पूर्व कमांडर, एडमिरल हैरी हैरिस ने एक बार ‘द ग्रेट वॉल ऑफ़ सैंड’ के रूप में चीन के निर्माण का वर्णन किया था।
  • 2016 में हेग (द नीदरलैंडस) में स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय भी दक्षिण चीन सागर पर चीन के दावों को क़ानूनी तौर पर निराधार बता चुका है।

वर्तमान विवाद की शुरुआत

  • अप्रैल 2020 की शुरुआत में, एक चीनी तटरक्षक पोत ने पैरासेल द्वीप समूह के निकट मछली पकड़ने वाले एक वियतनामी जहाज़ को टक्कर मारी और डुबा दिया
  • फिर चीनी नौसेना और तटरक्षक बल द्वारा समर्थित एक चीनी समुद्री सर्वेक्षण पोत ने बोर्नियो के तट पर एक मलेशियाई तेल खोज परियोजना के काम को भी बाधित किया।
  • नतीजतन, अमरीकी नौसेना को एक युद्धपोत जिसे एक ऑस्ट्रेलियाई युद्धक जहाज़ का समर्थन भी प्राप्त था, उन्हें इस इलाक़े में तैनात करना पड़ा।
  • इसके बाद अमरीका ने दो और बड़े युद्धपोत पैरासेल और स्प्रैटली द्वीप के पास तैनात कर दिए थे।
  • हाल ही में चीन ने पैरासेल द्वीप समूह के आसपास का क्षेत्र नौसैनिक अभ्यास करने के लिए बंद कर दिया।
  • इस बीच अमरीकी नौसेना ने इस क्षेत्र में जॉइंट ऑपरेशन के लिए एक नहीं, बल्कि दो विमान वाहक युद्धपोत उतार दिए।

दक्षिण चीन सागर में चीन का उद्देश्य क्या है?

  • चीन दक्षिण चीन सागर को अपने समुद्री क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है।
  • उसके लिए यह एक महत्वपूर्ण व्यापारिक रूट है और यह ‘चीनी बेल्ट एंड रोड परियोजना’ भाग भी है।
  • चीन ने पहले दक्षिण चीन सागर में एक बंदरगाह बनाया था जिसे विकसित कर अब आर्टिफ़िशियल द्वीप तैयार कर के उस पर सैनिक अड्डा बना लिया है।
  • चीन के ‘ग्रेटर बे एरिया इकोनॉमिक डिवेलपमेंट प्लान’ के लिए भी दक्षिण चीन सागर महत्वपूर्ण है। इसी प्लान के अंतर्गत चीन ने हॉन्ग-कॉन्ग को भी शामिल किया है।

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