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COVID-19: देश में पहली बार डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट लागू

कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी के कारण देश में पहली बार डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट (Disaster Management Act-2005) लागू कर दिया गया है। इसके तहत अब कोरोना वायरस (COVID-19) से निपटने के मामले में राज्य सरकारें केंद्र सरकार के निर्देशों पर काम करेंगी।  साधारण परिस्थितियों में कानून-व्यवस्था की तरह स्वास्थ्य भी राज्यों का विषय होता है, लेकिन अब ऐसा नहीं है। एक आदेश में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कोरोना वायरस को देश के लिए खतरा बताया है जिससे निपटने की कमान नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) को दे दी गई है। इसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA)
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण(NDMA) भारत में आपदा प्रबंधन के लिये सर्वोच्च वैधानिक निकाय है।
इसका गठन 27 सितम्बर, 2006 को आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत हुआ।
इसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री और नौ अन्य सदस्य होंते हैं।
इसका प्राथमिक उद्देश्य प्राकृतिक या मानव निर्मित आपदाओं के दौरान प्रतिक्रियाओं में समन्वय कायम करना और आपदा-प्रत्यास्थ (आपदाओं में लचीली रणनीति) व संकटकालीन प्रतिक्रिया हेतु क्षमता निर्माण करना है।
आपदाओं के प्रति समय पर और प्रभावी प्रतिक्रिया के लिये आपदा प्रबंधन हेतु नीतियाँ, योजनाएँ और दिशा-निर्देश तैयार करने हेतु यह एक शीर्ष निकाय है।
आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के महत्वूर्ण बिंदु
आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 का उद्देश्य, आपदाओं का प्रबंधन करना है, जिसमें शमन रणनीति, क्षमता-निर्माण और अन्य चीज़ें शामिल है।
आमतौर पर, एक आपदा को एक प्राकृतिक आपदा जैसे कि चक्रवात या भूकंप से समझा जा सकता है। इसके अलावा, इस अधिनियम की धारा 2 (D) में दी गई “आपदा” की परिभाषा के अनुसारआपदा का अर्थ है, “किसी भी क्षेत्र में प्राकृतिक या मानवकृत कारणों से या उपेक्षा से उद्भूत कोई महाविपत्ति…”।
कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप को दूर करने के लिए, केंद्र सरकार ने COVID -19 प्रकोप को “गंभीर चिकित्सा स्थिति या महामारी की स्थिति” के रूप में “अधिसूचित आपदा” के रूप में शामिल किया है।
दरअसल, आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 10 (2) (l) के तहत यह निर्देश जारी किया गया है। इस निर्देश के अंतर्गत, भारत सरकार के सम्बद्ध मंत्रालयों या विभागों, राज्य सरकारों/संघ राज्य सरकारों और राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों प्राधिकरणों को उनके द्वारा किसी आपदा की आशंका की स्थिति या आपदा के मोचन के लिए किये जाने वाले उपायों के सम्बन्ध में मार्गदर्शन सिद्धांत अध्कथित कर सकती है या निर्देश दे सकती है (यह निर्देश आगामी 21 दिनों के लिए लागू रहेंगे)।

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