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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की रूस यात्रा

चर्चा में क्यों?

  • भारत-चीन तनाव के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 22 से 24 जून 2020 के बीच तीन दिन के रूस दौरे पर रहे।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • इस दौरान रक्षा मंत्री रुस की राजधानी मास्को में आयोजित द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी पर सोवियत विजय की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित भव्य सैन्य परेड में शामिल हुए।
  • कोविड-19 महामारी के बाद भारत की तरफ से यह पहला आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का दौरा है।
  • इस दौरान रक्षा मंत्री ने रुस के उप प्रधानमंत्री यूरी बोरिसोव के साथ द्विपक्षीय रक्षा संबंधों पर चर्चा की, रूस ने भारत को आश्‍वासन दिया है कि वह दुनिया के सबसे एडवांस्ड एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम S-400 की जल्‍दी डिलीवरी करेगा।
  • इस दौरान रुस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि भारत की संयुक्त राष्ट्र की स्थायी सदस्यता होनी ही चाहिये। उनका देश समर्थन करता है।

5 अरब डॉलर में पांच S-400 खरीद रहा है भारत

  • भारत सरकार ने S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम को जल्‍दी देने का आग्रह किया था और रूस इस पर सहमत हो गया है।
  • भारत और रूस के बीच 2018 में दुनिया के सबसे एडवांस्ड एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम (Advanced Air Defence Missile System) S-400 की 5 यूनिट की डील 5 अरब डॉलर यानी 40,000 करोड़ रुपये में फाइनल हुई थी।
  • इससे पहले रूस ने योजना बनाई थी कि कोरोना वायरस को देखते हुए वह दिसंबर 2021 तक S-400 की सप्‍लाई करेगा।

क्या विशेषता है S-400 मिसाइल सिस्टम की?

  • रूस की अल्माज़ केंद्रीय डिज़ाइन ब्यूरो द्वारा 1990 के दशक में विकसित यह वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली करीब 400 किलोमीटर के क्षेत्र में शत्रु के विमान, मिसाइल और यहाँ तक कि ड्रोन को नष्ट करने में सक्षम है।
  • इसका पूरा नाम S-400 ट्रायम्फ (S-400 Triumph) है जिसे नाटो देशों में SA-21 ग्रोलर के नाम से जाना जाता है। रूस द्वारा विकसित यह मिसाइल सिस्टम जमीन से हवा (Surface To Air) में मार करने में सक्षम है।
  • इस मिसाइल सिस्टम को जमीन से हवा में मार करने वाला दुनिया का सबसे शक्तिशाली हथियार माना जाता है। क्योंकि यह एक साथ तीन दिशाओं में मिसाइल दाग सकता है।
  • यह सिस्टम एयरक्राफ्ट, क्रूज मिसाइल और यहां तक कि हमलावर परमाणु मिसाइल को 400 किलोमीटर पहले ही नष्ट कर सकता है।
  • 2007 में इसका पहली बार इस्तेमाल मॉस्को की रक्षा के लिए किया गया था। इसके लॉन्चर से 48N6 सीरीज की मिसाइलें लॉन्च की जा सकती हैं जिनके जरिए बड़ी तबाही मचाई जा सकती है।
  • चीन के पास यह रक्षा प्रणाली पहले से मौजूद है।
  • S-400 को अमेरिका की थाड एंटी मिसाइल सिस्टम की टक्कर का माना जाता है।

भारत के लिये महत्त्व

  • चीन और पाकिस्तान जैसे शत्रुओं से घिरे भारत के लिए यह मिसाइल डिफेंस सिस्टम सामरिक दृष्टि से बहुत महत्त्वपूर्ण है।
  • भारत के लिये S-400 की तैनाती का अर्थ है कि शत्रु के विमान अपने हवाई क्षेत्र में भारत की ओर उड़ रहे होंगे तभी उन्हें ट्रैक किया जा सकेगा और समय रहते हवा में ही नष्ट किया जा सकेगा।
  • युद्ध की स्थिति में इसे केवल 5 मिनट में सक्रिय किया जा सकता है।
  • एस-400 को अमेरिका की थाड एंटी मिसाइल सिस्टम की टक्कर का माना जाता है।

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