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Daily Current Affairs 27 May 2021

पुरस्कार/सम्मान

प्रिंसेस ऑफ एस्टुरियस अवार्ड

चर्चा में?

  • भारतीय अर्थशास्त्री एवं नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन को सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में स्पेन के सर्वोच्च पुरस्कार ‘प्रिंसेस ऑफ एस्टुरियस अवार्ड’ (Princess of Asturias Award) से नवाजा गया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • प्रिंसेस ऑफ एस्टुरियस फाउंडेशन ने 20 देशों के 41 उम्मीदवारों में से इस पुरस्कार के लिए चुना गया।
  • भुखमरी पर उनके अनुसंधान और मानव विकास पर उनके सिद्धांत, लोक कल्याण से जुड़ी अर्थ नीतियों ने अन्याय, असमानता, बीमारी और अज्ञानता से लड़ने में योगदान दिया है।’
  • पुरस्कार में जोआन मिरो की प्रतिमा और 50,000 यूरो नकद दिए जाते हैं।
  • जूरी ने कोविड-19 की वजह से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पुरस्कार की घोषणा की।
  • सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में ‘प्रिंसेस ऑफ एस्टुरियस अवार्ड’ इतिहास, कानून, भाषा, शिक्षण, राजनीति विज्ञान, समाज शास्त्र, दर्शन शास्त्र, भूगोल, अर्थशस्त्र आदि में शोध कार्य के लिए दिया जाता है।
  • सेन को 1998 में अर्थशास्त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार मिला था।

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लैंगिक अधिकारों की पैरोकारी के लिये, वर्ष 2020 के संयुक्त राष्ट्र पुरस्कार

चर्चा में क्यों?

  • केन्या की संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षक स्टैपलिन न्याबोगा को लैंगिक अधिकारों की पैरोकारी के लिये, वर्ष 2020 के संयुक्त राष्ट्र पुरस्कार (UN Military Gender Advocate of the Year) से सम्मानित किये जाने की घोषणा की गई है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • 32 वर्षीया केनयाई शान्तिरक्षक ने हाल ही में सूडान के दार्फ़ूर में यूएन मिशन (UNAMID) में अपना कार्यकाल पूरा किया है, जहाँ लैंगिक मुद्दों पर उत्कृष्ट योगदान देने के लिये उन्हें चुना गया है।
  • यूएन शान्ति अभियानों के प्रमुखों व फ़ोर्स कमाण्डरों द्वारा नामान्कित, मेजर न्याबोगा यह सम्मान पाने वालीं, केन्या की पहली शान्तिरक्षक हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षकों के अन्तरराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले एक ऑनलाइन कार्यक्रम में उन्हें पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

लैंगिक मुद्दों पर योगदान

  • मेजर न्याबोगा ने अन्य सैन्य शान्तिरक्षकों के लिये लैंगिक शिक्षा पर भी ध्यान केंद्रित किया, और पिछले वर्ष दिसम्बर तक UNAMID सैन्य दल के लगभग 95 फ़ीसदी हिस्से को प्रशिक्षण दिया जा चुका था।
  • इसके साथ-साथ, उन्होंने निर्बल पुरुषों, महिलाओं, लड़के, लड़कियों की ज़रूरतों की बेहतर ढँग से शिनाख़्त करने और मिशन द्वारा किये जाने विश्लेषण, योजना व संचालन में उसे समाहित किये जाने उपायों पर भी परामर्श प्रदान किया।
  • इसके ज़रिये यूएन मिशन को संरक्षा सम्बन्धी ज़रूरतों को समझने और उसके अनुरूप जवाबी कार्रवाई को बेहतर बना पाना सम्भव हुआ।
  • इस पुरस्कार की शुरुआत 2016 में हुई और इसका उद्देश्य, सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव संख्या 1325 के सिद्धांतों को बढ़ावा देने में जुटे शान्तिरक्षकों के समर्पण और प्रयासों को पहचानना और उन्हें सम्मानित करना है।
  • यह प्रस्ताव मुख्य रूप से महिलाओं, शान्ति और सुरक्षा पर केंद्रित है जिसमें तीन प्रमुख बिन्दुओं पर बल दिया गया है: हिंसक संघर्ष की रोकथाम; महिलाओं और उनके अधिकारों का संघर्ष के दौरान और उसके बाद संरक्षण; और संघर्ष को सुलझाने के लिए सभी प्रक्रियाओं में महिलाओं की हिस्सेदारी को बढ़ाना।

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समारोह/सम्मेलन

वेसाक वैश्विक समारोह

चर्चा में क्यों?

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर ‘वेसाक वैश्विक समारोह’ (Vesak Global Celebrations) को संबोधित किया। यह समारोह वर्चुअल हुआ।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • यह आयोजन भारत सरकार का संस्कृति मंत्रालय अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (IBC) के सहयोग से करता है। इसमें दुनियाभर के बौद्ध संघों के सर्वोच्च प्रमुख शामिल हुए।
  • वेसाक-बुद्ध पूर्णिमा को गौतम बुद्ध के जन्म, बुद्धत्व की प्राप्ति और महा परिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है।

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चर्चित क्यों?

सुशील कुमार

चर्चा में क्यों?

  • सागर धनखड़ की हत्या के मामले में गिरफ्तार हुए पहलवान सुशील कुमार को उत्तर रेलवे ने नौकरी से निलंबित कर दिया है। सुशील कुमार रेलवे में जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड (JAG) के अधिकारी थे।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • उत्तर रेलवे की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि डी एंड नए रूल्स 1968 के नियम 5 (2) के हिसाब से सुशील कुमार को सेवा से निलंबित कर दिया गया है।
  • बयान में कहा गया है कि सुशील कुमार के खिलाफ आपराधिक मामले की जांच चल रही है, ऐसे में उन्हें उत्तर रेलवे की नौकरी से निलंबित किया जाता है। बता दें कि लंबे वक्त से फरार चल रहे सुशील को 23 मई को पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
  • उत्तर रेलवे द्वारा सुशील को नौकरी से निलंबित किए जाने के पहले ही दिल्ली सरकार ने सुशील कुमार की ओर से डेपुटेशन अवधि बढ़ाने का आवेदन खारिज कर दिया गया था।
  • सरकार ने आवेदन को उत्तर रेलवे विभाग को भेज दिया था, जहां सुशील कार्यरत थे। सुशील दिल्ली सरकार में 2015 से डेपुटेशन पर थे और उनका कार्यकाल 2020 तक बढ़ाया गया था

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राष्ट्रीय परिदृश्य

मेकेदातु परियोजना

चर्चा मे क्यों?

  • कर्नाटक के मेकेदातु में कावेरी नदी पर एक जलाशय के निर्माण में मानदंडों के कथित उल्लंघन पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (National Green Tribunal – NGT) द्वारा एक समिति का गठन किया गया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • न्यायमूर्ति के. रामकृष्णन ( Ramakrishnan) की एनजीटी पीठ ने बांध के संबंध में अखबार की रिपोर्ट का स्वत: संज्ञान लिया। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कर्नाटक कावेरी नदी पर एक बांध बनाने का प्रस्ताव कर रहा है, जबकि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (Cauvery Water Management Authority) द्वारा इस प्रस्ताव को तमिलनाडु सरकार के विरोध के कारण दो बार टाल दिया गया था।
  • कावेरी नीरावरी निगम लिमिटेड; MoEF, बैंगलोर के एकीकृत क्षेत्रीय कार्यालय और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य इस समिति के सदस्य हैं।
  • एनजीटी ने समिति को यह पूछने का निर्देश दिया है कि क्या वन विभाग और MoEF से वन संरक्षण अधिनियम और EIA अधिसूचना, 2006 के तहत आवश्यक मंजूरी प्राप्त करने से पहले यह कथित निर्माण गतिविधि शुरू की गई है।

मेकेदातु परियोजना (Mekedatu Project)

  • इस परियोजना को 2017 में कर्नाटक द्वारा मंज़ूरी दी गयी थी।
  • इस परियोजना का उद्देश्य बेंगलुरु शहर के लिए पीने के पानी का भंडारण और आपूर्ति करना है। इससे 400 मेगावाट बिजली भी पैदा करने का लक्ष्य भी है।
  • यह परियोजना कावेरी नदी और उसकी सहायक अर्कावती (Arkavathi) नदी के संगम पर स्थित गहरी घाटी में क्रियान्वित की जा रही है।
  • तमिलनाडु कावेरी के ऊपरी तट पर किसी भी प्रस्तावित परियोजना का विरोध करता है जब तक कि इसे सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मंज़ूर नहीं किया जाता है।
  • इसके अलावा, कर्नाटक ने बिना सहमति और मंजूरी के परियोजना शुरू की जो कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण (Cauvery Water Disputes Tribunal – CWDT) के अंतिम आदेश के खिलाफ है।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT)

  • राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत 18 अक्तूबर, 2010 को की गई थी।
  • इसके साथ ही विशेष पर्यावरण न्यायाधिकरण स्थापित करने वाला दुनिया का तीसरा (और पहला विकासशील) देश बन गया। इससे पहले केवल ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में ही ऐसे किसी निकाय की स्थापना की गई थी।
  • इसकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संबंधी मुद्दों का तेज़ी से निपटारा करना है, जिससे देश की अदालतों में लगे मुकदमों के बोझ को कुछ कम किया जा सके।
  • राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) का मुख्यालय दिल्ली में है, जबकि अन्य चार क्षेत्रीय कार्यालय भोपाल, पुणे, कोलकाता एवं चेन्नई में स्थित हैं।
  • राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम के अनुसार, NGT के लिये यह अनिवार्य है कि उसके पास आने वाले पर्यावरण संबंधी मुद्दों का निपटारा 6 महीनों के भीतर हो जाए।

कावेरी नदी

  • यह कर्नाटक में पश्चिमी घाट की ब्रह्मगिरी पहाड़ से निकलती है।
  • कर्नाटक और तमिलनाडु राज्यों से बहकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है।
  • यह नदी एक विशाल डेल्टा का निर्माण करती है, जिसे ‘दक्षिण भारत का बगीचा’ (Garden of Southern India) कहा जाता है।
  • सहायक नदियाँ: अर्कवती, हेमवती, लक्ष्मणतीर्थ, शिमसा, काबिनी, भवानी, हरंगी आदि।
  • कुर्ग की पहाड़ियों से लेकर समुद्र तक कावेरी की लंबाई 772 कि.मी. है।

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