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Daily Current Affairs: 12 November 2020

राज्य परिदृश्य:

झारखंड विधानसभा से सरना धर्म कोड पारित

चर्चा में क्यों?

  • झारखंड विधानसभा के एक विशेष सत्र में 11 नवंबर 2020 को सरना कोड का प्रस्ताव सर्वसम्मति के बाद पारित कर दिया गया है।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • सरना एक धर्म है जो प्रकृतिवाद पर आधारित है और सरना धर्मावलंबी प्रकृति के उपासक होते हैं।
  • पृथक कोड आवंटित होने से अब इस धर्म को मानने वालों की सही जनगणना हो सकेगी। कोड के अभाव में इस धर्म को मानने वालों को कभी हिंदू तो कभी इसाई लिख दिया जाता है।जबकि इस समुदाय की अपनी अलग पृथक पहचान है।
  • झारखंड कैबिनेट में पारित हुआ सरना कोड का प्रस्ताव, जनगणना 2021 से पहले केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
  • आदिवासियों का कहना है कि 1951 में पहली जनगणना में आदिवासियों के लिए धर्म के कॉलम में नौवें नंबर पर ‘ट्राइब’ उपलब्ध था, जिसे बाद में खत्म कर दिया गया। इसे हटाने की वजह से आदिवासियों की गिनती अलग-अलग धर्मो में बंटती गई जिसके चलते उनके समुदाय को काफी नुकसान हुआ है।

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निधन

खलीफा बिन सलमान अल खलीफा

कौन थे?

  • बहरीन के प्रधानमंत्री खलीफा बिन सलमान अल खलीफा का 84 साल की उम्र में निधन हो गया है। हाल में ही वह इजरायल के साथ शांति समझौता करने के कारण वैश्विक चर्चा में आए थे।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • खलीफा बिन सलमान अल खलीफा दुनिया के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रधानमंत्रियों में से एक थे।
  • उन्होंने साल 1970 से देश के प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली थी।
  • 2011 में अरब क्रांति के दौरान भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते उनको हटाने के लिए भी खूब प्रदर्शन हुए थे।

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आर्थिक एवं वाणिज्यिक परिदृश्य

10 प्रमुख क्षेत्रों में उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजना

चर्चा में क्यों?

  • केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में विनिर्माण और निर्यात को एक बड़ी गति प्रदान करते हुए 10 प्रमुख क्षेत्रों में उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजना शुरू करने के नीति आयोग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
  • ये 10 क्षेत्र हैं:-इलेक्ट्रॉनिक/प्रौद्योगिकी उत्पाद,ऑटोमोबाइल एवं ऑटो घटक,फार्मास्यूटिकल्स ड्रग्स,दूरसंचार एवं नेटवर्किंग उत्पाद,वस्त्र उत्पाद,खाद्य उत्पाद, उच्च दक्षता सौर पीवी मॉड्यूल,व्हाइट गुड्स (एसी और एलईडी),विशिष्ट स्टील।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • इन 10 प्रमुख विशिष्ट क्षेत्रों में पीएलआई योजना भारतीय निर्माताओं को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगी, महत्वपूर्ण प्रतिस्पर्धी और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करेगी; क्षमता सुनिश्चित करेगी; बड़े पैमाने की अर्थव्यवस्थाओं का निर्माण करेगी; निर्यात बढ़ाएगी और भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का अभिन्न अंग बनाएगी।
  • भारतीय फार्मास्यूटिकल उद्योग परिमाण की दृष्टि से दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा और मूल्य की दृष्टि से 14वां सबसे बड़ा है। यह वैश्विक स्तर पर निर्यात की जाने वाली कुल ड्रग्स और दवाओं में 3.5% का योगदान करता है।
  • भारतीय वस्त्र उद्योग दुनिया के सबसे बड़े उद्योगों में एक है और कपड़ा और परिधान के वैश्विक निर्यात के 5% की हिस्सेदारी है। लेकिन मैनमेड फाइबर (एमएमएफ) क्षेत्र में भारत की हिस्सेदारी वैश्विक खपत पैटर्न, जो इस क्षेत्र में अधिक है, की तुलना में कम है।
  • खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के विकास से किसानों के लिए बेहतर मूल्य प्राप्त होगा और बड़े पैमाने पर अपव्यय कम होगा। पीएलआई योजना
  • वाइट गुड्स (एयर कंडीशनर और एलईडी) में घरेलू मूल्यवर्धन की और इन उत्पादों को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की अत्यधिक संभावना है। इस क्षेत्र के लिए पीएलआई योजना से अधिक घरेलू विनिर्माण, नौकरियों का सृजन और निर्यात बढ़ेगा।
  • स्टील रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण उद्योग है और भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्टील उत्पादक है। भारत तैयार स्टील का असल निर्यातक है और स्टील के कुछ श्रेणियों में चैंपियन बनने की क्षमता रखता है।
  • विशिष्ट स्टील में पीएलआई योजना से मूल्यवर्धित स्टील के लिए विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाने में मदद मिलेगी जिससे कुल निर्यात में वृद्धि होगी।

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आपरेशन ग्रीन योजना का विस्तार

चर्चा में क्यों?

  • केंद्र सरकार ने हाल ही में पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों से 41 अधिसूचित फलों और सब्जियों को भारत के किसी भी स्थान पर पहुंचाने के लिए हवाई परिवहन पर 50 प्रतिशत सब्सिडी सुविधा देने की घोषणा की है।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • कोरोना संक्रमण के चलते बागवानी की खेती करने वाले कृषकों को आर्थिक नुकसान से बचाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा आपरेशन ग्रीन योजना के दायरे को बढ़ाया गया है।
  • खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के मुताबिक आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत ऑपरेशन ग्रीन्स योजना के तहत शुरू की गयी इस सुविधा के अनुसार एयरलाइंस कम्पनियां आपूर्तिकर्ता / माल भेजने वाले / माल प्राप्तकर्ता तथा एजेंट को परिवहन सब्सिडी सीधे प्रदान करेंगी और वास्तविक अनुबंधित माल ढुलाई शुल्क का केवल 50 प्रतिशत ही उनसे लेंगी।
  • ऑपरेशन ग्रीन्स योजना के तहत परिवहन सब्सिडी को इससे पहले किसान रेल योजना पर लागू किया गया था जो 12 अक्टूबर 2020 से प्रभावी हुई थी।

योजना के तहत 21 फलों को शामिल किया गया

  • भारतीय रेलवे अधिसूचित फल और सब्जियों पर केवल 50 प्रतिशत भाड़ा ही लेता है। इस योजना के तहत 21 फलों में आम, केला, अमरूद, कीवी, लीची, मौसम्बी, संतरा, किन्नु, नींबू, पपीता, अनानास, अनार, कटहल, सेब, बादाम, आंवला, पैशन फ्रूट, नाशपाती, शकरकंद और चीकू हैं. 20 सब्जियां में फ्रेंच बीन्स, करेला, बैंगन, शिमला मिर्च, गाजर, फूलगोभी, मिर्च (हरी), ओकरा, ककड़ी, मटर, लहसुन, प्याज, आलू, टमाटर, बड़ी इलायची, कद्दू, अदरक, गोभी, स्क्वैश और हल्दी (सूखी) को रखा गया है।

इन राज्यों के लिए लागू होगी योजना

  • इसमें पूर्वोत्तर से अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम (बागडोगरा) और त्रिपुरा के सभी हवाई अड्डे तथा हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड एवं केंद्रशासित प्रदेशों जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख के सभी हवाई अड्डों से इन फल/सब्जियों की ढुलाई को इस योजना के तहत सब्सिडी के दावे का पात्र माना जाएगा।

क्या है आपरेशन ग्रीन योजना?

  • केंद्र सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत आपरेशन ग्रीन योजना संचालित की गई है।
  • इसके तहत उत्पादकों को फल एवं सब्जियों का उचित मूल्य दिलाने के लिए 500 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
  • इस योजना में टमाटर, प्याज व आलू के साथ ही सभी फल व सब्जियों के अधिक उत्पादन होने पर बाजारों में परिवहन के माध्यम से भेजने पर कुल लागत का 50 प्रतिशत अनुदान के रूप में किसानों को मिलेगा।
  • यहीं नहीं इस योजना का लाभ उन किसानों को भी मिलेगा जो फल या सब्जी को कोल्ड स्टोरेज में या अन्य किसी वेयरहाउस में भंडारित करेंगे. उनके लिए भंडार शुक्ल की कुल लागत का 50 प्रतिशत अनुदान की व्यवस्था की गई है।
  • इस योजना में आलू, प्याज, टमाटर के साथ अब विभिन्न प्रकार के फलों और सब्जियों को भी शामिल करने की घोषणा आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तीसरे भाग में की गई है।

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पुरस्कार/सम्मान

राष्ट्रीय जल पुरस्कार, 2019

चर्चा में क्यों?

  • भारत के उपराष्ट्रपति, एम. वेंकैया नायडू ने 11 नवंबर 2020 को राष्ट्रीय जल पुरस्कार, 2019 के पुरस्कार वितरण समारोह का उद्घाटन किया।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • 2019 के लिए राष्ट्रीय जल पुरस्कार के अंतर्गत प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान के लिए सर्वश्रेष्ठ राज्य पुरस्कार तमिलनाडु, महाराष्ट्र और राजस्थान में दिए गए
  • मिजोरम ने विशेष श्रेणी के राज्यों में पहला पुरस्कार जीता।
  • उत्तर में, नदियों और जल संरक्षण के पुनरुद्धार में सर्वश्रेष्ठ जिले का पुरस्कार अयोध्या और अल्मोड़ा को, दक्षिण में, वेल्लोर और वाईएसआर कडप्पा को, पश्चिम में, सांगली और कच्छ को, पूर्व में बिलासपुर और सूरजपुर को, पूर्वोत्तर मेंपश्चिम त्रिपुरा (डब्ल्यूसी) को और आकांक्षी जिले की श्रेणी मेंक्रमशः खंदाना और विजयनगरम को दिए गये।

राष्ट्रीय जल पुरस्कार का उद्देश्य

  • राष्ट्रीय जल पुरस्कार का उद्देश्य जल संरक्षण और प्रबंधन के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने वाले व्यक्तियों / संगठनों कोसम्मानित करना है। इसके अलावा, यह लोगों में पानी के महत्व के बारे में जागरूकता पैदा करने और उन्हें सर्वोत्तम जल उपयोग प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रेरित करने का प्रयास करता है।
  • इसके अतरिक्त, यह लोगों में पानी के महत्व के विषय में जागरूकता पैदा करने और उन्हें सर्वोत्तम जल उपयोग प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रेरित करने का प्रयास करता है।

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रक्षा-प्रतिरक्षा

स्कॉर्पियन श्रेणी के पनडुब्बी वागीर

चर्चा में क्यों?

  • मुंबई के मझगांव डाक पर 12 नवंबर 2020 को भारतीय नेवी की पांचवी स्कॉर्पियन श्रेणी के पनडुब्बी वागीर (Scorpene class submarine Vagir) को लांच किया गया।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • वागीर देश में बनने वाली छह कलावरी श्रेणी के पनडुब्बियों में से एक है।
  • इस पनडुब्बी को फ्रेंच नेवल डिफेंस और एनर्जी कंपनी डीसीएनएस ने डिजाइन किया है और यह भारतीय नेवी के प्रोजेक्ट-75 के तहत तैयार किया जा रहा है।
  • वागीर से पहले अब तक स्कॉर्पियन श्रेणी के चार पनडुब्बियां लांच हो चुकी हैं।
  • सबसे पहली पनडुब्बी आईएनएस कलावरी 2017 में लांच हुई थी। इसके बाद खंडेरी, करंज और वेला पनडुब्बियों को लांच किया जा चुका है।
  • प्रोजेक्ट-75 के तहत अभी स्कॉर्पियन श्रेणी के एक और पनडुब्बी की लांचिंग बाकी है।
  • दुश्मनों की जानकारी जुटाने में सक्षम
  • स्कॉर्पियन श्रेणी की पनडुब्बियों को न सिर्फ पानी की सतह के ऊपर बल्कि पानी के भीतर भी दुश्मनों के खिलाफ लड़ाई में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा यह दुश्मनों की जानकारी जुटाने और एरिया सर्विलांस जैसे काम भी बखूबी कर सकती हैं।

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कृषि, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी

ऑस्ट्रेलिया में 500 मीटर लंबी प्रवाल भित्ति की खोज

चर्चा में क्यों?

  • ऑस्ट्रेलिया के खोजकर्त्ताओं ने ‘ग्रेट बैरियर रीफ’ में 500 मीटर लंबी प्रवाल भित्ति (Coral Reef) की खोज की है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • इस प्रवाल भित्ति की संरचना एक ब्लेड जैसी है, जिसका निचला हिस्सा लगभग 1.5 किलोमीटर चौड़ा है।
  • उल्लेखनीय है कि ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी तट पर स्थित ‘ग्रेट बैरियर रीफ’ में विश्व की सबसे अधिक प्रवाल भित्तियाँ पाई जाती हैं।
  • प्रवाल (Coral) एक सूक्ष्म जीव होता है। चूना पत्थर (कैल्शियम कार्बोनेट) से निर्मित इसका निचला हिस्सा काफी कठोर होता है, जो कि प्रवाल भित्तियों की संरचना का निर्माण करता है।
  • प्रवाल भित्तियों का निर्माण तब शुरू होता है जब प्रवाल स्वयं को समुद्र तल पर मौजूद चट्टानों से जोड़ते हैं, फिर हज़ारों की संख्या में विभाजित हो जाते हैं।
  • धीरे-धीरे कई सारे प्रवाल पॉलिप्स एक-दूसरे से जुड़ते हैं और एक कॉलोनी बनाते हैं। फिर जैसे-जैसे ये कॉलोनियाँ अन्य कॉलोनियों के साथ जुड़ती हैं तो प्रवाल भित्तियों (Coral Reefs) का रूप ले लेती हैं। इस प्रक्रिया में कई हज़ार वर्षों का समय लगता है।

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चर्चित व्यक्तित्व

अजीम प्रेमजी

चर्चा में क्यों?

  • भारत में आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी विप्रो (Wipro) के पूर्व चेयरमैन अजीम प्रेमजी ने भारत में दान देने के मामले में सबसे शीर्ष स्थान प्राप्त किया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • हाल ही में जारी किये गए एडलिव हुरुन इंडिया फिलैन्थ्रॉपी लिस्ट 2020 के सांतवें संस्करण के अनुसार, अजीम प्रेमजी ने वर्ष 2020 में कुल 7,904 करोड़ रुपए यानी प्रतिदिन लगभग 22 करोड़ रुपए दान दिये हैं, इसलिये वे इस सूची में पहले स्थान पर हैं।
  • 1 अप्रैल, 2020 को अजीम प्रेमजी फाउंडेशन, विप्रो और विप्रो एंटरप्राइज़ेज़ ने कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप से निपटने के लिये 1,125 करोड़ रुपए दान करने की घोषणा की थी।
  • यह विप्रो की वार्षिक CSR गतिविधियों और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के सामान्य खर्च से अलग था।
  • HCL के संस्थापक और चेयरमैन शिव नादर को इस सूची में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है, जिन्होंने वर्ष 2020 में कुल 795 करोड़ रुपए दान किये हैं।
  • वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड के चेयरमैन और एशिया के सबसे अमीर आदमी मुकेश अंबानी को इस सूची में तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है और उन्होंने वर्ष 2020 में कुल 458 करोड़ रुपए दान किये हैं।
  • हुरुन इंडिया और एडलिव फाउंडेशन द्वारा तैयार की जाने वाली इस सूची के माध्यम से राष्ट्र के निर्माण में योगदान देने वाले लोगों को रेखांकित करने का प्रयास किया जाता है।

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राष्ट्रीय परिदृश्य

जहाज़रानी मंत्रालय का नाम बदला गया

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जहाज़रानी मंत्रालय (Ministry of Shipping) का नाम बदलकर मिनिस्ट्री ऑफ पोर्ट्स, शिपिंग एंड वाटरवेज़ (Ministry of Ports, Shipping and Waterways) करने की घोषणा की है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • इस संबंध में घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में जहाज़रानी मंत्रालय द्वारा कई महत्त्वपूर्ण कार्य किये जाते हैं, जिनमें बंदरगाहों और जलमार्गों की देखरेख करना भी शामिल है।
  • जबकि मंत्रालय के नाम से इसके कार्यों की स्पष्टता दिखाई नहीं देती है, इसलिये इसके नाम में परिवर्तन करके इसे और अधिक समावेशी बनाना आवश्यक है।

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अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य

आर्मीनिया और अज़रबैजान के बीच शांति समझौता

चर्चा में क्यों?

  • आर्मीनिया और अज़रबैजान ने 10 नवंबर 2020 को रूस की मध्यस्थता में शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • आर्मीनिया और अजरबैजान ने नगोर्नो-काराबाख के विवादित क्षेत्र में सैन्य संघर्ष समाप्त करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं। इस शांति समझौते पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, अज़रबैजान के राष्ट्रपति इलहाम अलीयेव और आर्मीनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान के हस्ताक्षर हुए हैं और यह समझौता स्थानीय समयानुसार 10 नवंबर रात एक बजे से लागू हो गया है।
  • समझौते के तहत नगोर्नो-काराबाख का वो हिस्सा अजरबैजान के अधिकार में रहेगा जिस पर उसने लड़ाई के दौरान कब्जा किया। वहीं आर्मीनिया अगले कुछ हफ्तों में आसपास के इलाकों से सेना हटाने के लिए राज़ी हो गया है।
  • आर्मीनिया के प्रधानमंत्री ने इस समझौते को उनके और उनके देश के लोगों के लिए बेहद दर्दनाक करार दिया।
  • कुल मिलाकर, इस समझौते को अज़रबैजान की जीत और आर्मीनिया की हार के तौर पर देखा जा रहा है।
  • हाल ही में अज़रबैजान की सेना ने नागोर्नो-काराबाख़ के शुशा (आर्मीनिया में शुशी) शहर पर कब्ज़ा कर लिया था. इसे एक बड़ी रणनीतिक जीत बताया जा रहा था।
  • इस नए युद्धविराम से आर्मीनिया में गुस्से की लहर पैदा हो गई और प्रदर्शनकारियों ने संसद पर हमला बोल दिया।

रूस ने तैनात की शांति सेना

  • रूस के राष्ट्रपति ने टेलीविजन पर संदेश में कहा कि रूस की शांति सेना को सीमावर्ती इलाकों में गश्त लगाने के लिए तैनात किया जाएगा। रूस के रक्षा मंत्रालय ने एक हजार 960 जवानों को इस सिलसिले में तैनात करने की पुष्टि की है।
  • उन पर उस “लाचिन कॉरिडोर” की रक्षा की भी जिम्मेदारी होगी जो काराबाख़ की राजधानी स्टेपनाकर्ट को आर्मीनिया से जोड़ता है।

नागोर्नो-काराबाख़ के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य

•नागोर्नो काराबाख़ 4,400 वर्ग किलोमीटर यानी 1,700 वर्ग मील का पहाड़ी इलाक़ा है.

•पारंपरिक तौर पर यहां ईसाई आर्मीनियाई और तुर्क मुसलमान रहते हैं.

•सोवियत संघ के विघटन से पहले ये एक स्वायत्त क्षेत्र बन गया था जो अज़रबैजान का हिस्सा था.

•अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस इलाक़े को अज़रबैजान के हिस्से के रूप में मान्यता दी जाती है, लेकिन यहां की अधिकांश आबादी आर्मीनियाई है.

•आर्मीनिया समेत संयुक्त राष्ट्र का कोई सदस्य किसी स्व-घोषित अधिकारी को मान्यता नहीं देता.

•1980 के दशक से अंत से 1990 के दशक तक चले युद्ध में 30 हज़ार से अधिक लोगों की जानें गईं. उस दौरान अलगावादी ताक़तों ने कुछ इलाक़ों पर कब्ज़ा जमा लिया.

•उस दौरान अलगावादी ताक़तों ने नागोर्नो-काराबाख़ के कुछ इलाक़ों पर कब्ज़ा जमा लिया. 1994 में यहाँ युद्धविराम की घोषणा हुई थी, उसके बाद भी यहाँ गतिरोध जारी है और अक्सर इस क्षेत्र में तनाव पैदा हो जाता है.

•1994 में यहां युद्धविराम हुआ जिसके बाद से यहां गतिरोध जारी है.

•तुर्की खुल कर अज़रबैजान का समर्थन करता है.

•यहां रूस का एक सैन्य ठिकाना है.

•इस इलाक़े को लेकर 27 सितंबर 2020 को एक बार फिर अज़रबैजान और आर्मीनिया के बीच जंग शुरू हो गई.

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