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Daily Current Affairs 11 June 2021

राज्य परिदृश्य

मुख्यमंत्री किसान मित्र ऊर्जा योजना

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में राजस्थान सरकार ने ‘मुख्यमंत्री किसान मित्र ऊर्जा योजना’ के प्रस्ताव को स्वीकृति दी है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा मीटर उपभोक्ताओं को बिजली बिलों पर प्रतिमाह 1,000 रुपए और अधिकतम 12,000 रुपए प्रतिवर्ष प्रदान किये जाएंगे।
  • इस योजना के कारण राज्य सरकार पर प्रतिवर्ष 1,450 करोड़ रुपए का वित्तीय बोझ आएगा।
  • इसके तहत बिजली वितरण कंपनियों द्वारा द्वैमासिक आधार पर बिजली बिल जारी किये जाएंगे।
  • केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारी तथा अन्य आयकर दाता इस योजना के तहत सब्सिडी के लिये पात्र नहीं होंगे।
  • पात्र उपभोक्ताओं को योजना के साथ अपना आधार नंबर और बैंक खाता लिंक कराना होगा।
  • योजना के तहत अनुदान राशि तभी देय होगी जब उपभोक्ताओं द्वारा अपनी सभी बकाया राशि का भुगतान किया जाएगा।
  • बकाया राशि का भुगतान करने के बाद उपभोक्ताओं को आगामी बिजली बिल पर सब्सिडी राशि देय होगी।
  • इस योजना की घोषणा राज्य के मुख्यमंत्री द्वारा वर्ष 2021-22 के बजट में की गई थी।

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पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी

मोनाल की दो नई प्रजातियां

चर्चा में क्यों/

  • हाल ही में अरुणाचल प्रदेश के सियांग ज़िले में मोनाल की दो नई प्रजातियाँ देखी गई हैं।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • खोजकर्त्ताओं की टीम ने समुद्र तल से 4,173 मीटर की ऊँचाई पर माउंट एको डंबिंग पर इन पक्षियों को देखा। इन दो प्रजातियों का यहाँ देखा जाना इस क्षेत्र के पारिस्थितिक तंत्र के लिये एक बेहतर संकेतक है।
  • इसमें पहली प्रजाति हिमालयी मोनाल (लोफोफोरस इम्पेजेनस) की है, जो कि मुख्य तौर पर अफगानिस्तान से पूर्वोत्तर भारत तक अधिक व्यापक स्तर पर पाई जाती है, जबकि दूसरी प्रजाति दुर्लभ स्क्लेटर मोनाल (लोफोफोरस स्क्लेटेरी) है।
  • यह प्रजाति मुख्य तौर पर दक्षिणी चीन और उत्तरी म्यांमार में पाई जाती है।
  • मोनाल उत्तराखंड का राज्य पक्षी भी है।
  • यह एक हिमालयी उच्च क्षेत्रों में पाए जाने वाला पक्षी है।
  • पर्यावास नुकसान और शिकार के कारण इंटरनेशनल यूनियन ऑफ कंज़र्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) द्वारा इसे ‘सुभेद्य’ के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

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देहिंग पटकाई नेशनल पार्क

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में असम सरकार ने देहिंग पटकाई वन्यजीव अभयारण्य (Dehing Patkai Wildlife Sanctuary) को असम का 7वां नेशनल पार्क घोषित किया है। हाल ही में एक और नेशनल पार्क रायमोना नेशनल पार्क का भी गठन किया गया है। अब असम में कुल 7 नेशनल पार्क हो गए हैं।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • असम अब देश का दूसरा सबसे ज्यादा नेशनल पार्क वाला राज्य बन गया है। उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश और अंडमान निकोबार द्वीप समूहों में नौ-नौ नेशनल पार्क हैं।
  • इसके पहले 5 जून को असम सरकार, रायमोना नेशनल पार्क (Raimona National Park) को असम का छठवां नेशनल पार्क घोषित कर चुकी है।

देहिंग पटकाई नेशनल पार्क (Dehing Patkai National Park)

  • देहिंग पटकाई नेशनल पार्क (Dehing Patkai National Park) को देहिंग पटकाई वर्षा वन के नाम से भी जाना जाता है।
  • यहां वनस्पति और जीवों की काफी अधिक विविधता पाई जाती है।
  • इस राष्ट्रीय उद्यान को वर्ष 2004 में वन्यजीव अभ्यारण्य के रूप में मान्यता दी गई थी।
  • देहिंग पटकाई राष्ट्रीय उद्यान का क्षेत्रफल लगभग 111.19 वर्ग किलोमीटर है।
  • इस राष्ट्रीय उद्यान में हूलॉक गिब्बन, हाथी, स्लो लॉरिस, बाघ, तेंदुआ, क्लाउडेड तेंदुआ, सुनहरी बिल्ली, फिशिंग कैट, मार्बल कैट, सांभर, हॉग डियर, स्लॉथ बियर, लुप्तप्राय राज्य पक्षी सफेद पंख वाली बत्तख आदि पाये जाते हैं।

असम के नेशनल पार्क

  • काजीरंगा नेशनल पार्क
  • मानस नेशनल पार्क
  • नामेरी नेशनल पार्क
  • ओरंग नेशनल पार्क
  • डिब्रू-सैखोवा नेशनल पार्क
  • रायमोना नेशनल पार्क
  • देहिंग पटकाई नेशनल पार्क

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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

नासा के दविंची+ और वेरिटास मिशन

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने शुक्र ग्रह के अध्ययन और शोध के लिए ‘दविंची+’ और वेरिटास मिशन (Davinci+ and Veritas Mission) की घोषणा की है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • इन दो मिशनों का उद्देश्य शुक्र के वातावरण की भीषण गर्मी के बारे शोध करना है।
  • शुक्र ग्रह का इतिहास, ग्रीनहाउस प्रभाव को पढ़ने और धरती पर इसका प्रबंधन कैसे किया जाए, यह समझने का बेहतरीन मौका उपलब्ध कराएगा।
  • इसके लिए ऐसे मॉडलों का इस्तेमाल किया जा सकता है जिसमें शुक्र के वायुमंडल की चरम स्थितियों को तैयार किया जा सकता है और परिणामों की तुलना धरती पर मौजूदा स्थितियों से कर सकते हैं।
  • ‘दविंची+’ अर्थात (Deep Atmosphere Venus Investigation of Noble Gases, Chemistry and Imaging- DAVINCI+), शुक्र के कार्बन डाइऑक्साइड वातावरण की उत्पत्ति का पता लगाने की कोशिश करेगा।
  • इसके साथ ही यह भी पता लगाने की कोशिश होगी कि क्या शुक्र पर कोई समुद्र भी था।

वेरिटास

  • वेरिटास यानी (Venus Emissivity, Radio Science, InSAR, Topography, and Spectroscopy) , शुक्र की सतह पर कठोर चट्टान के नमूने प्राप्त करके इस पड़ोसी ग्रह के भूवैज्ञानिक विज्ञान को समझने में मदद करेगा। इसके जरिए यह समझने में मदद मिल सकती है कि यह ग्रह कैसे बना ?
  • ऑर्बिटर अपने साथ दो उपकरण ले जाएगा जिनकी मदद से सतह का मानचित्र तैयार किया जाएगा और दाविंची से मिले विस्तृत इन्फ्रारेड अवलोकनों का पूरक होगा।
  • शुक्र ग्रह के लिए विश्व का पहला मिशन सोवियत संघ का वनेरा-3 ( Venera- 3) था।
  • हाल ही में खगोलविदों की एक अंतर्राष्ट्रीय टीम ने शुक्र ग्रह के वातावरण में फॉस्फीन गैस (Phosphine Gas) का पता लगाया है। इस खोज ने शुक्र ग्रह पर जीवन की उपस्थिति की संभावना को बढ़ाया है।
  • शुक्र ग्रह पर वातावरण काफी सघन और विषाक्त है, जिसमें मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड गैस और सल्फ्यूरिक एसिड के बादल विद्यमान हैं।

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