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Daily Current Affairs 10 June 2021

अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य

आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC)

चर्चा में क्यों?

  • संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (ECOSOC) में 2022-24 की अवधि के लिए भारत को निर्वाचित किया गया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • 08 जून 2021 को हुए चुनाव में भारत को अफगानिस्तान, कजाखस्तान और ओमान के साथ एशिया-प्रशांत देशों की श्रेणी में चुना गया है।
  • आर्थिक और सामाजिक परिषद (Economics and Social Council) यानी इकॉसॉक यूएन के छह प्रमुख अंगों में से एक है।
  • लिए 54 सदस्यीय इस परिषद की स्थापना साल 1945 में हुई थी।
  • टिकाऊ विकास के तीन आयामों – आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरण – को आगे बढ़ाने के लिये, संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के केन्द्र में है।
  • यह परिषद पारस्परिक विमर्श और नवाचारी सोच को बढ़ावा देने, प्रगति के रास्तों पर आम सहमति और सहयोग पर बल देने और अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर सहमति प्राप्त लक्ष्यों को प्राप्त करने के प्रयासों के समन्वय के लिए केन्द्रीय मँच है।
  • यहाँ संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख सम्मेलनों और शिखर बैठकों का आयोजन किया जाता है।
  • संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत परिषद का मुख्य शासनादेश (Mandate) अन्तरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग के माध्यम से बेहतर जीवन स्तर को बढ़ावा देना है।
  • बीस अन्तरराष्ट्रीय संगठन, क्षेत्रीय आयोग और स्वायत्त संस्थाएँ हर वर्ष आर्थिक एवँ सामाजिक परिषद को रिपोर्ट करते हैं।
  • इकॉसॉक प्रमुख ने ध्यान दिलाते हुए कहा कि अतीत के वर्षों में अन्तरराष्ट्रीय आर्थिक, सामाजिक और विकास नीतियों के लिये परिषद एक केन्द्रीय अंग रहा है।
  • विकास के मुख्य सिद्धान्तों, जैसेकि 7 प्रतिशत आधिकारिक विकास सहायता का लक्ष्य, स्पेशल ड्राइन्ग राइट्स, और अन्तरराष्ट्रीय व्यापार में विकासशील देशों के साथ विशेष बर्ताव, ये सभी परिषद की चर्चाओं के परिणामस्वरूप ही सम्भव हो पाये हैं।
  • इसके अतिरिक्त वैश्विक विकास लक्ष्यों व रणनीतियों को पारित करने में भी परिषद की अहम भूमिका रही है. इनमें सहस्राब्दी विकास लक्ष्य (MDG), टिकाऊ विकास का 2030 एजेण्डा और टिकाऊ विकास के 17 लक्ष्य शामिल हैं।

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एंतोनियो गुटेरेश, यूएन महासचिव के दूसरे कार्यकाल के लिये नामित

चर्चा में क्यों?

  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने महासचिव के तौर पर पाँच-वर्षीय दूसरे कार्यकाल के लिये यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश को औपचारिक रूप से नामित किया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • यूएन के शीर्षतम पद के लिये अगला कार्यकाल जनवरी 2022 में शुरू होना है।ष्
  • सुरक्षा परिषद में पारित एक प्रस्ताव में, इस सम्बन्ध में यह सिफ़ारिश पेश की है, जिसे अब औपचारिक स्वीकृति के लिये 193 सदस्य देशों वाली यूएन महासभा में भेजा जाएगा।

कैसे होता है संयुक्त राष्ट्र महासचिव का चुनाव?

  • संयुक्त राष्ट्र के नए प्रमुख के लिये तय प्रक्रिया के तहत, सुरक्षा परिषद से नाम की सिफ़ारिश जनरल असेम्बली को प्रेषित की जाती है, और महासभा के लिये एक प्रस्ताव का मसौदा जारी किया जाता है।
  • सदस्य देशों के साथ समुचित विचार-विमर्श के बाद, महासभा अध्यक्ष प्रस्ताव के इस मसौदे पर कार्रवाई के लिये एक तिथि तय करते हैं।
  • महासचिव के चयन के लिये अतीत की छह प्रक्रियाओं में आम सहमति से प्रस्ताव को पारित किये जाने के बाद उम्मीदवार को जनरल असेम्बली द्वारा नियुक्त किया गया।
  • मतदान, किसी सदस्य देश के अनुरोध पर ही कराया जाएगा और इस स्थिति में प्रस्ताव पारित करने के लिये, मतदान करने वालों देशों के आम बहुमत की आवश्यकता होगी।
  • मगर, जनरल असेम्बली यह तय कर सकती है कि इस निर्णय के लिये दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी। ऐसी स्थिति में अगर वोटिन्ग होती है तो फिर यह गुप्त मतदान होगा।
  • संयुक्त राष्ट्र के चार्टर पर हस्ताक्षर वर्ष 1945 में हुए थे, मगर महासचिव के चयन पर संक्षिप्त जानकारी ही दी गई है।
  • यूएन चार्टर के अनुच्छेद 97 के तहत महासचिव के पद पर नियुक्ति, यूएन महासभा द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सिफ़ारिश पर की जाती है।

कौन हैं एंटोनियो गुटेरेस?

  • एंटोनियो गुटेरेस पुर्तगाल के राजनेता हैं और 1995 से 2002 तक पुर्तगाल के प्रधानमंत्री रहे हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र महासचिव बनने से पहले वह 2005 से 2015 तक संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी उच्चायुक्त (UNHCR) रहे हैं।

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ब्लू डॉट परियोजना

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में अमेरिका ने ब्लू डॉट नेटवर्क परियोजना (Blue Dot Network- BDN) को पुनर्जीवित करने की पहल की है। इस परियोजना का उद्देश्य चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) परियोजना का जवाब देना है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • ब्लू डॉट परियोजना की रूपरेखा दो साल पहले तैयार की गई थी। लेकिन तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने इसमें अपेक्षित दिलचस्पी नहीं ली। अब चूंकि अमेरिका में सत्ता परिवर्तन हो चुका है इसलिए अमेरिकी विदेश मंत्रालय इसे साकार करने में जुट गया है।
  • अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा है ब्लू डॉट नेटवर्क एक बाजार संचालित, पारदर्शी और टिकाऊ इन्फ्रास्ट्रक्चर संबंधी परियोजना होगी। इस परियोजना के लिए मंत्रालय ने एक सलाहकार समूह बनाया है, जिसकी पहली बैठक इसी हफ्ते पेरिस (फ्रांस) में हुई।
  • पेरिस की बैठक में अमेरिका के सहयोगी पश्चिमी देशों और जापान के प्रतिनिधियों के अलावा कुछ सिविल सोसायटी संगठन के नुमाइंदों और शिक्षाशास्त्रियों ने भी भाग लिया। तकरीबन 150 कंपनी अधिकारी भी इसमें शामिल हुए। इस परियोजना पर अमेरिका ने 12 ट्रिलियन डॉलर खर्च करने की महत्वाकांक्षा जताई है।

क्या है बीडीएन परियोजना?

  • ब्लू डॉट नेटवर्क (बीडीएन) परियोजना के बारे में पहली घोषणा 2019 में की गई थी।
  • उस समय इसकी कल्पना अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया-जापान की परियोजना के रूप में की गई थी।
  • लेकिन ट्रंप प्रशासन के दौर में इस पर काम आगे नहीं बढ़ सका था।
  • अब बाइडन प्रशासन ने इसे लागू करने का फैसला किया है।
  • लेकिन चीन के बीआरआई और अमेरिका के बीडीएन में बुनियादी फर्क यह है कि चीन की परियोजना पूरी तरह सरकार संचालित है, जिस पर अमल पब्लिक सेक्टर की कंपनियां करती हैं।
  • जबकि बीडीएन एक प्राइवेट-पब्लिक पार्टनरशिप परियोजना होगी, जिसमें निजी क्षेत्र की बड़ी बीमा और पेंशन फंड कंपनियों का बड़ा रोल होगा। इसके तहत सामरिक रूप से महत्वपूर्ण देशों में आधुनिक तकनीक संचालित परियोजनाएं लागू की जाएंगी।
  • विश्लेषकों का कहना है कि प्राइवेट कंपनियों के लिए मुनाफा सबसे अहम पहलू रहता है। इसलिए अपना पैसा लगाने के पहले परियोजना का लागत-मुनाफा आकलन करेंगी। जबकि चीन सरकार अपने रणनीतिक मकसदों के लिए आर्थिक घाटा उठाने को भी तैयार रहती है। इस पहलू के कारण अमेरिकी परियोजना के आगे बढ़ने में कुछ समस्याएं आ सकती हैं।

चीन की बीआरआई परियोजना

  • बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) चीन की सबसे अधिक महत्वाकांक्षी परियोजना है जिसमें एशिया, यूरोप तथा अफ्रीका के बीच भूमि और समुद्र क्षेत्र में कनेक्टिविटी बढ़ाने कई परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं।
  • इसके तहत आधारभूत ढांचे एवं संपर्क परियोजनाओं का विकास करना है जिसका लक्ष्य चीन को सड़क, रेल एवं जलमार्गों के माध्यम से यूरोप, अफ्रीका और एशिया से जोड़ना है।
  • इस परियोजना की परिकल्पना वर्ष 2013 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने की थी। हालांकि चीन इस बात से इनकार करता है किंतु इसका प्रमुख उद्देश्य चीन द्वारा वैश्विक स्तर पर अपना भू-राजनीतिक प्रभुत्व कायम करना है।
  • BRI को ‘सिल्क रोड इकोनॉमिक बेल्ट’ और 21वीं सदी की सामुद्रिक सिल्क रोड के रूप में भी जाना जाता है।
  • विश्व की 70% जनसंख्या तथा 75% ज्ञात ऊर्जा भंडारों को समेटने वाली यह परियोजना चीन के उत्पादन केंद्रों को वैश्विक बाज़ारों एवं प्राकृतिक संसाधन केंद्रों से जोड़ेगी।
  • BRI के तहत पहला रूट जिसे चीन से शुरू कर रूस और ईरान होते हुए इराक तक ले जाने की योजना है, जबकि इस योजना के तहत दूसरा रूट पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से श्रीलंका और इंडोनेशिया होकर इराक तक ले जाया जाना है।
  • BRI वास्तव में चीन द्वारा परियोजना निर्यात करने का माध्यम है जिसके ज़रिये वह अपने विशाल विदेशी मुद्रा भंडार का प्रयोग बंदरगाहों के विकास, औद्योगिक केंद्रों एवं विशेष आर्थिक क्षेत्रों के विकास के लिये कर वैश्विक शक्ति के रूप में उभरना चाहता है।

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भारत एवं विश्व

भारत एव थाइलैंड में निगरानी अभ्यास

चर्चा में क्यों?

  • भारत और थाईलैंड की नौसेनाओं ने हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती मौजूदगी को लेकर चिंता की पृष्ठभूमि में अंडमान सागर में तीन दिन का समन्वित निगरानी अभ्यास (Coordinated Patrols) 9 जून को शुरू कर दिया।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • भारतीय नौसेना का अपतटीय गश्ती जहाज आईएनएस सरयू और थाईलैंड का जहाज क्राबी दोनों नौसेनाओं के डोर्नियर समुद्री गश्ती विमान के साथ भारत-थाईलैंड समन्वित निगरानी (कोरपैट) के 31वें संस्करण में भाग ले रहे हैं।
  • दोनों नौसेनाएं 2005 के बाद से अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा पर कोरपैट में साल में दो बार भाग लेती रही हैं। इस अभ्यास का मकसद हिंद महासागर के अहम हिस्से को सुरक्षित और वैश्विक व्यापार के लिए खुला रखना है।
  • कोरपैट दोनों नौसेनाओं के बीच समझ बनाता है और अनियंत्रित रूप से मछली पकड़ने, नशीले पदार्थ की तस्करी, समुद्री आतंकवाद, सशस्त्र लूट और चोरी जैसी अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए कदम उठाता है।
  • साथ ही यह तस्करी, अवैध प्रवास को रोकने और समुद्र में खोज एवं बचाव अभियान चलाने के लिए सूचनाओं का आदान प्रदान कर संचालनात्मक तालमेल बढ़ाने में मदद करता है।
  • भारतीय नौसेना पिछले कुछ वर्षों से हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी मौजूदगी धीरे-धीरे बढ़ा रही है। कोरोना वायरस महामारी के बावजूद भारतीय नौसेना ने कई देशों के साथ पिछले कुछ महीनों में समुद्री अभ्यासों में भाग लिया है।

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नियुक्ति/निर्वाचन

अनूप चंद्र पांडेय

चर्चा में क्यों?

  • यूपी काडर के आईएएस अफसर (सेवानिवृत) अनूप चंद्र पांडेय को हाल ही में नया निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किया गया है।
  • अनूप चंद्र 1984 बैच के आईएएस अफसर रहे हैं, साथ ही उन्हें 37 साल की भारतीय प्रशासनिक सेवा का अनुभव है।

निर्वाचन आयोग की संरचना

  • भारत के निर्वाचन आयोग में मूलतः केवल एक चुनाव आयुक्त का प्रावधान था, लेकिन 16 अक्तूबर, 1989 को राष्ट्रपति की एक अधिसूचना के ज़रिये इसे तीन सदस्यीय बना दिया गया।
  • इसके बाद कुछ समय के लिये इसे एक सदस्यीय आयोग बना दिया गया और 1 अक्तूबर, 1993 को फिर से इसका तीन सदस्यीय आयोग बना दिया गया, तब से निर्वाचन आयोग में एक मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्त होते हैं।
  • निर्वाचन आयोग का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।
  • मुख्य निर्वाचन अधिकारी IAS रैंक का अधिकारी होता है, जिसकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है तथा अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति भी राष्ट्रपति ही करता है।
  • इनका कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु (दोनों में से जो भी पहले हो) तक होता है।
  • इन्हें भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के समकक्ष दर्जा प्राप्त होता है और उनके समान ही वेतन एवं भत्ते मिलते हैं।
  • मुख्य चुनाव आयुक्त को संसद द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया के समान ही पद से हटाया जा सकता है।

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