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आर्थिक वाणिज्यिक परिदृश्य

अडानी पोर्ट्स और स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड द्वारा कृष्णापटनम पोर्ट कंपनी लिमिटेड के अधिग्रहण

चर्चा में क्यों?

  • भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने अडानी पोर्ट्स और स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड द्वारा कृष्णापट्नम पोर्ट कंपनी लिमिटेड के अधिग्रहण को मंजूरी दी है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • प्रस्तावित अधिग्रहण में अडानी पोर्ट्स और स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड (अदानी पोर्ट्स) द्वारा कृष्णपट्टनम पोर्ट कंपनी लिमिटेड (केपीसीएल) में इक्विटी शेयरहोल्डिंग के साथ प्रबंधन नियंत्रण के अधिग्रहण की परिकल्पना की गई है।
  • अडानी पोर्ट्स एकीकृत पोर्ट अवसंरचना सेवा प्रदाता है जो वर्तमान में छह तटीय राज्यों – गुजरात, गोवा, केरल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और ओडिशा के दस घरेलू बंदरगाहों में मौजूद है।
  • अधिग्रहणकर्ता लॉजिस्टिक्स चेन (यानी जहाजों के प्रबंधन से लेकर जहाजों के ठहरने का स्थान, जहाज संचालन, कर्षण, लंगर डालने की जगह, सामानों के रखरखाव, आतंरिक परिवहन, भण्डारण और संचालन, प्रोसेसिंग व रोड या रेल द्वारा अंतिम निकासी) का प्रबंधन करता है।
  • केपीसीएल आंध्र प्रदेश के कृष्णापट्टनम में गहरे पानी के बंदरगाह को विकसित करने तथा संचालित करने का कार्य कर रहा है।

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI)

  • भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की स्थापना प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के तहत की गई थी और यह मार्च, 2009 में विधिवत गठित हुआ।

आयोग के उद्देश्य हैं

  • प्रतिस्पर्धा पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाले व्यवहारों को रोकना।
  • बाजारों में प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने और उसे बनाए रखना।
  • उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा और व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना।

सीसीआई के मुख्य कार्य

  • प्रतिस्पर्धा विरोधी समझौते, एकाधिकार तथा ऐसे विलय या अधिग्रहण जो प्रतिस्पर्धा को सीमित करते हैं की जांच और नियमन करना।
  • किसी भी कानून या सांविधिक अधिकार के तहत गठित प्राधिकरण या केन्द्र सरकार से प्राप्त संदर्भ के संबंध में प्रतिस्पर्धा मुद्दे पर अपनी राय देना।
  • प्रतिस्पर्धा मुद्दों को प्रोत्साहन के साथ साथ जन जागरूकता और प्रशिक्षण प्रदान करना।
  • केन्द्र सरकार अथवा कोई राज्य सरकार अथवा किसी भी कानून के तहत गठित प्राधिकरण जांच के लिए संदर्भ दे सकता है।
  • इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। इसके अध्यक्ष अशोक कुमार गुप्ता हैं।

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इतिहास, कला एवं संस्कृति

दियामर-भाशा बांध से प्राचीन बौद्ध धरोहरों के डूबने का खतरा

चर्चा में क्यों?

  • इतिहासकारों और पुरातत्व विशेषज्ञों का कहना है कि ईसा पूर्व सात हज़ार साल से लेकर 16वीं सदी तक के विभिन्न दौर से संबंधित रखने वाले पाँच हज़ार अत्यधिक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शिलालेख और कलाकृतियां दियामर-भाशा बांध (Diamer-Bhasha Dam) के पूरा होने पर पानी में डूब सकते हैं।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • चीन सरकार की मदद से बनने वाली इस बांध परियोजना का 15 जुलाई को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने उद्घाटन किया।
  • दियामर-भाषा बांध पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के खैबर पख्तूनख्वा (Khyber Pakhtunkhwa) के कोहिस्तान और गिलगित-बाल्टिस्तान के डायमर ज़िलों के बीच सिंधु नदी पर प्रस्तावित है।
  • भारत ने इस पर अपनी आपत्ति जताई है क्योंकि यह पाक अधिकृत कश्मीर में बनाया जा रहा है।

इतिहासकारों और पुरातत्व विशेषज्ञों के तर्क

  • कराकोरम पास के खुलने के बाद पाकिस्तान और यूरोप के विशेषज्ञों ने इन इलाक़ों में 30 हज़ार से लकेर 50 हज़ार तक शिलालेख और पाँच हज़ार के क़रीब विभिन्न तरह के अभिलेख को खोजा है।
  • बीसवीं सदी में खुलने वाला काराकोरम पास पाकिस्तान को चीन के शिनजियांग इलाक़े से मिलाता है जिसके ज़रिए पाकिस्तान का ज़मीनी संपर्क मध्य-पूर्व तक से हो सकता है।
  • यहां मिलने वाले शिलालेखो में मौजूद पत्थरों पर जानवरों, इंसानों और कुछ निशानियों की आकृतियां प्रागैतिहासिक काल की हैं।
  • इनके अलावा शिकारियों, घुड़सवारों और दूसरे तरह के कई शिलालेख हैं जिनका संबंध ऐतहासिक काल से है।
  • अभिलेखों की शुरुआती लिखावट गंधारी भाषा और ख़रोस्ती लिपी में हैं जो उस क्षेत्र में दो हज़ार से 1700 साल पहले प्रचलित थी।
  • शिलालेख पर मौजूद चित्र बालदेव, वासुदेव और राहुल के नाम के साथ ख़रोस्ती लिपी के साथ खुदे हुए हैं।
  • कुछ शिलालेखों में प्रवचन देते महात्मा बुद्ध के चित्र उत्कीर्ण हैं।

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भारत एवं विश्व

भारत और मालदीव के बीच आपातकालीन चिकित्‍सा सेवाओं के लिए समझौते पर हस्‍ताक्षर

चर्चा में क्यों?

  • भारत और मालदीव ने राजधानी माले में आपातकालीन चिकित्‍सा सेवाओं के लिए एक समझौते पर हस्‍ताक्षर किए हैं।
  • यह कई लघु और मध्‍यम परियोजनाओं में से एक है जिसे भारत अपने पड़ोसी देश के लिए लगभग दो करोड़ अमरीकी डॉलर की अनुदान सहायता के तहत उपलब्‍ध करा रहा है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • भारत ने कोरोना महामारी से निपटने के लिए मालदीव की आवश्‍यकताओं को पूरा करने के लिए पूर्ण समर्थन दिया है।
  • भारत ने 14 सदस्‍यीय चिकित्‍सा दल भेजा है और आवश्‍यक दवाएं, हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की गोलियां और दवाओं के निर्यात के लिए छूट प्रदान की है।
  • भारत ने हाल ही में सौ से अधिक मालदीव के रोगियों को परिचायक के साथ उन्‍नत चिकित्‍सा उपचार के लिए भारत आने पर विशेष छूट दी है।

मालदीव गणराज्य:

  • मालदीव का क्षेत्रफल 298 वर्ग किमी. है, जो हिंद महासागर में श्रीलंका के 600 किमी. दक्षिण पश्चिम में 1,200 प्रवाल द्वीपों में विस्तृत है, जिनमें से केवल 202 द्वीपों पर ही निवास है।
  • मालदीव की राजधानी माले है।
  • यहाँ का सबसे बड़ा धार्मिक संप्रदाय मुस्लिम धर्म है जो की कुल जनसंख्या का लगभग 99.04% है।

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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

तियानवेन-1: चीन का मंगल मिशन

चर्चा में क्यों?

  • चीन ने मंगल ग्रह के लिए अपना पहला मिशन लॉन्च कर दिया है। तियानवेन-1 (Tianwen-1) नामक इस मिशन को 23 जुलाई 2020 को  सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • इस मिशन को वेनचांग अतंरिक्ष केंद्र से ‘लॉन्ग मार्च-5’ रॉकेट से सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया।
  • इसके साथ ही चीन मंगल पर अपना रोवर भेजने वाले देशों की सूची में शामिल हो गया है।
  • इस मिशन को ‘तियानवेन-1’ या ‘क्वेश्चन्स टू हेवेन’ (स्वर्ग से सवाल) कहा जा रहा है।
  • तियानवेन-1 में ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर एक साथ हैं, जिनका उद्देश्य मंगल के वातावरण को समझना और वहां जीवन के संकेतों की खोज करना है।
  • लैंडिंग की कोशिश से पहले यह दो से तीन महीने लाल ग्रह की परिक्रमा करेगा और अगर सब कुछ योजना के अनुसार चला, तो लैंडर अप्रैल 2021 में रोवर को मंगल की सतह पर उतारेगा।
  • तियानवेन-1 को मंगल के इक्वेटर के ठीक उत्तर में ‘यूटोपिया इंपैक्ट बेसिन’ के पास उतारने का लक्ष्य रखा गया है।
  • अगर चीन इस प्रयास में सफल रहा, तो वह अमेरिका और सोवियत संघ के बाद मंगल ग्रह पर अंतरिक्ष यान उतारने वाला तीसरा देश बन जाएगा।

यूएई ने भी भेजा है मंगल मिशन

  • फिलहाल चीन अकेला देश नहीं है जो मंगल तक पहुंचने की कोशिश में लगा है। संयुक्त अरब अमीरात ने कुछ ही दिन पहले अपना स्वतंत्र मार्स ऑर्बिटर मिशन ‘होप’ लॉन्च किया है, जो मंगल ग्रह की कक्षा में रह कर उसकी परिक्रमा करेगा।
  • वहीं अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा अगले सप्ताह अपना “पर्सिवियरेंस” (Perseverance) रोवर लॉन्च करने की तैयारी में है।

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अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य

विश्व व्यापार संगठन (WTO) का 25 वां पर्यवेक्षक देश बना तुर्कमेनिस्तान

महत्वपूर्ण बिंदु

  • विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organization,WTO) जनरल काउंसिल ने मध्य एशियाई देश तुर्कमेनिस्तान को पर्यवेक्षक का दर्जा दिए जाने की घोषणा की है।
  • विश्व व्यापार संगठन (WTO) में पर्यवेक्षक का दर्जा मिलने के बाद, तुर्कमेनिस्तान इस अंतराष्ट्रीय व्यापार निकाय के साथ औपचारिक संबंध बनाने वाला अंतिम पूर्व सोवियत गणराज्य बन गया है।
  • इससे तुर्कमेनिस्तान की अर्थव्यवस्था को विकसित करने, बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने, विदेशी निवेश को आकर्षित करने और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संबंधों को विकसित करने में मदद मिलेगी।

विश्व व्यापार संगठन (WTO)

  • विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organization) विश्व में व्यापार संबंधी अवरोधों को दूर कर वैश्विक व्यापार को बढ़ावा देने वाला एक अंतर-सरकारी संगठन है।
  • जिसकी स्थापना वर्ष 1995 में मराकेश संधि के तहत की गई थी।
  • इसका मुख्यालय जिनेवा में है। वर्तमान में विश्व के 164 देश इसके सदस्य हैं।
  • 29 जुलाई, 2016 को अफगानिस्तान इसका 164वाँ सदस्य बना था।
  • सदस्य देशों का मंत्रिस्तरीय सम्मलेन इसके निर्णयों के लिये सर्वोच्च निकाय है, जिसकी बैठक प्रत्येक दो वर्षों में आयोजित की जाती है।
  • इसके महानिदेशक रॉबर्टो अजेवेडो हैं।

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अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन का 87 वां सदस्य बना निकारागुआ

महत्वपूर्ण बिंदु

  • मध्य अमेरिकी देश निकारागुआ गणराज्य अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance, ISA) फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर करने वाला 87 वां देश बन गया है।
  • इस समझौते पर हस्ताक्षर संयुक्त राष्ट्र में निकारागुआ के स्थायी प्रतिनिधि जैमे हर्मिडा कैस्टिलो द्वारा न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के लिए भारत के स्थायी मिशन में किए गए थे।

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन:

  • अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन ((International Solar Alliance,ISA) सौर ऊर्जा से संपन्न देशों का एक संधि आधारित अंतर-सरकारी संगठन है।
  • अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन की शुरुआत भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांसुआ हॉलैंड द्वारा संयुक्त रूप से 30 नवंबर, 2015 को पेरिस जलवायु सम्‍मेलन के दौरान की थी।
  • इसका मुख्यालय गुरुग्राम (हरियाणा) में है।
  • ISA के प्रमुख उद्देश्यों में 1000 गीगावाट से अधिक सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता की वैश्विक तैनाती और 2030 तक सौर ऊर्जा में निवेश के लिये लगभग 1000 बिलियन अमेरिकी डॉलर की राशि को जुटाना शामिल है।
  • अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन की पहली बैठक का आयोजन नई दिल्ली में किया गया था।

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