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जेनिफर हॉलर पर किया गया COVID-19 की वैक्सीन का परीक्षण

कोरोना वायरस (COVID-19) के बढ़ते संक्रमण के बीच अमेरिका में कोरोना की वैक्सीन mRNA-1273 का परीक्षण किया है। यहां के सिएटल शहर में स्थित कैसर परमानेंट वाशिंगटन रिसर्च इंस्टिट्यूट में COVID-19 वैक्सीन पर स्टडी की गई। COVID-19 की वैक्सीन सबसे पहले जिस महिला को लगाई है उनका नाम जेनिफर हॉलर है। 43 वर्षीय जेनिफर हॉलर एक टेक कंपनी में बतौर ऑपरेशन मैनेजर काम करती हैं।
कैसे तैयार की गई वैक्सीन?
मीज़ल्स जैसी बीमारी के लिए बनाए गए सामान्य टीके नष्ट किए गए या कमजोर वायरस से बनाए जाते हैं। लेकिन mRNA-1273 को उस वायरस से नहीं बनाया गया है जिससे COVID-19 बीमारी होती है। बल्कि ये वैक्सीन लैब में बनाए गए वायरस के एक छोटे से हिस्से के जेनेटिक कोड को कॉपी करके बनाई गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस वैक्सीन की मदद से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता असली वायरस से लड़ने में कामयाब हो पाएगी।
क्या होती है वैक्सीन, और कैसे काम करती है?
वैक्सीन मानव शरीर में एंटीबॉडिज़ (Antibodies) का निर्माण करती हैं। ये मानव शरीर को बिना इसे इंफेक्ट किए बीमारी से लड़ने के काबिल बनाती हैं । अगर वैक्सीन लगा हुआ व्यक्ति उस खास बीमारी के संपर्क में आता है तो उसका इम्यून सिस्टम इसे पहचान लेता है और तुरंत एंटीबॉडिज़ रिलीज करता है। ये एंटीबॉडिज उस बीमारी के विषाणुओं से लड़कर उसे खत्म कर देते हैं।
जब किसी विशेष रोग से बचाव की वैक्सीन शरीर में प्रवेश करती है तो शरीर को आभास होता है कि वास्तव में इस बीमारी के वायरस ने हमला किया है और इस तरह शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र एंटीबॉडीज़ का निर्माण करता है और जब भविष्य में इस बीमारी का वास्तविक हमला होता है तो शरीर में इसके एंटीबॉडीज़ पहले से ही होते हैं।
नए पैदा हुए बच्चे पहले से ही कई बीमारियों से सुरक्षित होते हैं। इन बीमारियों में खसरा और रूबेला शामिल हैं। ऐसा बच्चों में मां के द्वारा मिले एंडीबॉडिज़ की वजह से होता है। इसे पैसिव इम्यूनिटी (Passive immunity) कहते हैं। पैसिव इम्यूनिटी सामान्यतौर पर कुछ ही हफ्ते या महीनों असरकारी होती है। खसरा और रूबेला के केस में पैसिव इम्यूनिटी एक साल तक असर करती है।
वैक्सीन कैसे बनती हैं?
वैक्सीन निर्माण में पहला कदम होता है ऐसा ऑर्गेनिज़्म तैयार करना जो एक खास बीमारी पैदा करता है। इसे पैथोजेन (Pathogen) कहते हैं। पैथोजेन एक वायरस या बैक्टेरियम होता है। वायरस और बैक्टेरिया लैबोरेटोरी में बड़े पैमाने पर पैदा हो सकते हैं। इसके बाद पैथोजेन में कुछ बदलाव किए जाते हैं ताकि यह पक्का हो सके कि यह स्वयं कोई बीमारी नहीं पैदा करेगा। इसके बाद इस पैथोजेन को अन्य टीके की चीजों के साथ मिलाया जाता है जैसे स्टेबलाइजर्स, प्रिजर्वेटिव। इस तरह वैक्सीन की डोज़ तैयार होता है।

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